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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–3 : 9 जानवरों का राजा // सुषमा गुप्ता

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6 जानवरों का राजा [1] एक बार एक आदमी था जिसकी पत्नी मर गयी थी। उसके एक बेटी थी जो बहुत सुन्दर थी पर कोई उस बेचारी की देखभाल करने वाला नहीं ...

6 जानवरों का राजा[1]

एक बार एक आदमी था जिसकी पत्नी मर गयी थी। उसके एक बेटी थी जो बहुत सुन्दर थी पर कोई उस बेचारी की देखभाल करने वाला नहीं था सो उसने तय किया कि वह दूसरी शादी करेगा।

पर जब उसने दूसरी शादी की तो उसकी दूसरी पत्नी तो बहुत ही खराब थी और वह अपने पति की बेटी स्टैलीना[2] को बहुत ही बुरे ढंग से रखती थी।

एक दिन स्टैलीना ने अपने पिता से कहा — “पिता जी, यहाँ रहने और और हमेशा दुख सहते रहने की बजाय मैं गांव में रहना ज़्यादा पसन्द करूँगी। मैं गांव जा रही हूँ।”

पिता बोला — “बेटी, थोड़ी देर धीरज रखो।”

पर एक दिन उसकी सौतेली माँ ने एक कटोरा तोड़ने पर उसको एक चांटा मारा तो स्टैलीना से और सहन नहीं हुआ और वह घर छोड़ कर चली गयी।

वह पहाड़ों में चली गयी। वहाँ उसकी एक बुआ रहती थी। वह एक परी की तरह थी पर वह बहुत गरीब थी। वह स्टैलीना को देख कर बोली — “बेटी, मैं बहुत गरीब हूँ। मुझे तुझे भेड़ों को चराने के लिये भेजना पड़ेगा पर मैं तुझको एक बहुत ही कीमती चीज़ दे रही हूँ।”

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कह कर उसने स्टैलीना को एक अंगूठी दी और कहा — “बेटी, तू अगर कभी भी किसी भी परेशानी में हो तो इस अंगूठी को अपने हाथ में पकड़ लेना और अपनी परेशानी बोलना तो तू उस परेशानी से बाहर निकल आयेगी।”

एक सुबह जब स्टैलीना घास के मैदान में अपनी भेड़ें चरा रही थी तो उसने एक सुन्दर नौजवान को अपनी तरफ आते देखा। वह उसके पास आ कर बोला — “तुम भेड़ चराने के लिये बहुत ज़्यादा सुन्दर हो। चलो तुम मेरे साथ चलो मैं तुमसे शादी कर लूँगा और फिर तुम एक राजकुमारी की तरह रहोगी।”

यह सुन कर स्टैलीना का चेहरा लाल हो गया और वह तुरन्त ही उसको कोई जवाब नहीं दे पायी। पर बाद में उस नौजवान ने उसको अपने साथ जाने पर मना लिया।

वे लोग पास में खड़ी एक गाड़ी में चढ़े और वह गाड़ी बिजली की सी तेज़ी से वहाँ से चल दी। वे करीब करीब सारा दिन चलते रहे। शाम को वे एक बहुत ही सुन्दर महल के सामने आ कर रुक गये।

वह नौजवान बोला — “आओ, अन्दर आ जाओ।” कह कर वह उसको महल के अन्दर ले गया और महल दिखाता हुआ बोला — “आज से यह महल तुम्हारा है। तुमको जो चाहिये वह तुम माँग लेना वह तुमको मिल जायेगा। अब मैं अपना काम देखने जाता हूँ। अब हम कल सुबह मिलेंगे।” यह कह कर वह चला गया।

आश्चर्य से भरी स्टैलीना के मुँह से कोई आवाज ही नहीं निकली। तभी उसको महसूस हुआ कि कोई उसको हाथ पकड़ कर कहीं ले जा रहा है पर वहाँ उसको दिखायी कोई नहीं दिया।

वह ले जाने वाला उसको एक बहुत ही बढ़िया सजे कमरे में ले गया जहाँ उसके पहनने के लिये कपड़े और गहने रखे थे। वहाँ उसके पुराने कपड़े उतारे गये और उसको नये कपड़े और गहने पहनाये गये और उसको एक कुलीन स्त्री की तरह सजाया गया।

फिर वे उसको एक और कमरे में ले गये जहाँ गरमागरम खाना उसका इन्तजार कर रहा था। वह वहाँ मेज पर बैठ गयी और खाना खाने लगी। उसकी प्लेटें बदलती जाती थीं और नया नया खाना आता जाता था पर वहाँ भी उसको उन प्लेटों को लाने वाला कोई दिखायी कोई नहीं दे रहा था।

जब वह खाना खा चुकी तो उसको महल दिखाने ले जाया गया। कुछ कमरे वहाँ पीले रंग में सजे थे और कुछ लाल रंग में। उनमें दीवान लगे थे, कुरसियाँ थीं और बहुत सारी सुन्दर सुन्दर सजाने वाली चीज़ें रखी थीं।

महल के पीछे एक बहुत सुन्दर बागीचा था। उसमें बहुत सारे किस्म के जानवर थे – कुत्ता, बिल्ली, गधा, मुर्गी ही नहीं बल्कि वहाँ बड़े बड़े मेंढक भी थे। स्टैलीना को वे सब आदमियों के एक समूह की तरह लगे जो एक साथ बातें कर रहे हों।

स्टैलीना तो यह सब देखती की देखती ही रह गयी। वह उन सबको तब तक देखती रही जब तक अंधेरा नहीं हो गया। फिर वह सोने चली गयी।

उसको एक ऐसे कमरे में ले जाया गया जो राजकुमारियों के सोने के लायक सजा हुआ था। वहाँ एक बहुत ही बढ़िया पलंग पड़ा था।

वहाँ उसको किसी ने कपड़े बदलने में सहायता की। उसके लिये रात के सोने के कपड़े पहनने के साथ साथ एक लैम्प भी लाया गया और एक जोड़ी स्लिपर भी लाये गये।

वह बिस्तर पर लेट गयी और बस फिर सब कुछ शान्त हो गया। वह सो गयी और जब वह उठी तो सुबह हो गयी थी। उसने सोचा कि मैं घंटी बजाती हूँ और देखती हूँ कि कोई आता है कि नहीं।

पर जैसे ही उसने घंटी बजाने के लिये घंटी को छुआ तो एक चांदी की ट्रे वहाँ आ गयी जिसमें कौफी और केक रखी हुई थी। उसने कौफी पी और उठ गयी। उसने कपड़े पहने तो किसी ने उसके बाल सॅंवार दिये। इस तरह उसकी एक राजकुमारी की तरह सेवा हो रही थी।

बाद में वह नौजवान आया और उसने उससे पूछा — “क्या तुम ठीक से सोयीं? क्या तुम खुश हो?”

स्टैलीना बोली — “हाँ, मैं ठीक से सोयी।”

नौजवान ने स्टैलीना का हाथ पकड़ा और कुछ पल बाद कहा “गुड बाई” और चला गया।

यह उस नौजवान का रोज का तरीका था और स्टैलीना उसको दिन में एक बार बस इसी समय देखती थी।

दो महीने बाद वह ऐसे तरीके से तंग आ गयी। एक सुबह जब वह नौजवान चला गया तो स्टैलीना ने सोचा कि मैं आज थोड़ा बाहर घूम कर आती हूँ।

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उसके मुँह से ये शब्द निकले भी नहीं थे कि किसी ने उसको एक टोपी, एक पंखा और एक छाता[3] ला कर दे दिया।

उसने सोचा “इसका मतलब है कि हर समय मेरे साथ कोई न कोई रहता है जो कुछ भी मैं कहूँ सुनता रहता है। एक बार मुझे तुम्हें देखने दो बस।” पर इसके जवाब में उसे कोई जवाब नहीं मिला और न ही उसे कोई दिखायी दिया।

उसी पल स्टैलीना ने अपनी बुआ की दी हुई अंगूठी को याद किया। अभी तक तो उसको उसने इस्तेमाल करने की सोचा ही नहीं था क्योंकि उसे उसको इस्तेमाल करने की जरूरत ही नहीं पड़ी थी।

वह वहाँ से वापस गयी और अपनी ड्रैसिंग टेबिल की ड्रौअर से वह अंगूठी निकाल लायी।

एक बार वह अंगूठी उसके हाथ में आ गयी तो उसने उस अंगूठी से कहा — “मैं देखना चाहती हूँ कि मेरी सेवा कौन कर रहा है?”

तुरन्त ही उसके सामने एक दासी आ कर खड़ी हो गयी। उसको देख कर तो स्टैलीना बहुत ही खुश हो गयी। उसके मुँह से निकला — “कम से कम अब मैं किसी के साथ बात तो कर सकती हूँ।”

दासी बोली — “धन्यवाद धन्यवाद। आपने मुझे आखिर दिखायी देने लायक बना ही दिया। मैं अब तक जादू के ज़ोर की वजह से किसी को दिखायी ही नहीं देती थी और न ही बोल सकती थी।”

वे दोनों आपस में बहुत अच्छी दोस्त हो गयीं और उन्होंने साथ साथ उस जगह के भेद का पता लगाने का निश्चय किया कि वहाँ क्या चल रहा था। वे बाहर चली गयीं और एक पगडंडी पर चलने लगीं।

वे काफी दूर तक उस पगडंडी पर चलती चली गयीं कि एक जगह वह पगडंडी दो खम्भों के बीच से गुजरती थी। उन दो खम्भों में से एक खम्भे पर लिखा था “पूछो” और दूसरे खम्भे पर लिखा था “और तुमको पता चल जायेगा”।

जिस खम्भे पर “पूछो” लिखा था उसके सामने खड़ी हो कर स्टैलीना बोली — “मुझे यह मालूम करना है कि मैं कहाँ हूँ।”

इस पर दूसरा खम्भा जिस पर लिखा था “और तुमको पता चल जायेगा” बोला — “तुम एक ऐसी जगह हो जहाँ तुम ठीक रहोगी लेकिन …”

स्टैलीना ने पहले वाले खम्भे से पूछा — “लेकिन क्या?”

पर दूसरे वाले खम्भे ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

clip_image006दोनों दोस्तों ने सोचा कि यह “लेकिन” तो ठीक नहीं है और वे कुछ चिन्ता करती हुई आगे बढ़ गयीं। चलते चलते वे बागीचे के आखीर तक पहुँच गयीं। आखीर में बागीचे के चारों तरफ चहारदीवारी लगी थी। उस चहारदीवारी के दूसरी तरफ जमीन पर एक नाइट[4] बैठा था।

जब उसने इन दोनों को आते देखा तो उठ कर खड़ा हो गया और उन दोनों से पूछा — “तुम लोग यहाँ कैसे आयीं? सावधान रहना तुम लोग एक बहुत बड़े खतरे में हो। तुम लोग जानवरों के राजा के कब्जे में हो। वह हर किसी को जिस किसी को भी पकड़ लेता है यहाँ ले आता है और एक-एक करके मार देता है।”

यह सुन कर स्टैलीना तो बहुत डर गयी तुरन्त बोली — “तो हम यहाँ से कैसे बच सकते हैं?”

वह नाइट बोला — “मैं तुमको यहाँ से बाहर ले जा सकता हूँ। मैं भारत के राजा का बेटा हूँ और दुनिया घूम कर अपना समय गुजार रहा हूँ।

जैसे ही मैंने तुम्हें देखा तो मुझे तुमसे प्यार हो गया इसी लिये मैं यहाँ आ कर बैठ गया कि कभी तो तुम इधर आओगी। मैं तुमको अपने पिता के पास ले चलूँगा। वह तुम्हारा और तुम्हारी दासी दोनों का ठीक से स्वागत करेंगे।”

स्टैलीना बोली — “ठीक है। मैं तुम्हारे साथ चलूँगी।”

दासी बोली — “पर अगर यह महल खजाने से भरा है तो इसको इस तरह से छोड़ कर जाना तो बेवकूफी है। जब वह जानवरों का राजा घर में न हो तब हमको यह खजाना अपने हाथों में ले लेना चाहिये और उसके बाद ही यहाँ से भागना चाहिये। कल हम लोग यहीं मिलेंगे और फिर यहाँ से भाग चलेंगे।”

स्टैलीना बोली — “हाँ यह ठीक है। मैं तुम्हारे साथ चलती हूँ।”

राजकुमार ने पूछा — “और मैं यहाँ खुले में रात कैसे गुजारूँगा यहाँ तो कोई झोंपड़ी भी नहीं है।”

स्टैलीना बोली — “मैं देखती हूँ।” उसने अपने छोटे से बटुए में से वह जादू की अंगूठी निकाली, मुठ्ठी में दबायी और बोली — “मुझे यहाँ पर एक बड़ा सा एक मकान चाहिये, तुरन्त। नौकरों, गाड़ियों, खाने पीने और सोने की सुविधाओं के साथ।”

बस उसका यह कहना था कि उसके सामने वाले घास के मैदान में एक बड़ा सा मकान खड़ा हो गया। मकान बहुत सुन्दर था। राजकुमार ने दोनों लड़कियों को गुड बाई कहा और उस घर में चला गया।

स्टेलीना और उसकी दासी दोनों महल में लौट आयीं। खजाना ढूँढने के लिये उन्होंने उस सारे महल को ऊपर से ले कर नीचे तक छान मारा। फिर उनको तहखाने में जा कर एक कमरा मिला जिसमें बहुत सारे बक्से रखे थे।

स्टैलीना बोली — “यह क्या है। यह तो तहखाने की बजाय एक भंडारघर ज़्यादा लग रहा है। देखते है कि इन बक्सों में क्या है।” उन्होंने उन बक्सों के ढक्कन खोल कर देखा तो उन सबमें तो सोना चांदी हीरे जवाहरात पैसा आदि बहुतायत से भरा पड़ा था।

स्टैलीना ने उस अंगूठी को अपनी मुठ्ठी में फिर से दबाया और कहा — “ये सब बक्से भारत के राजकुमार के मकान में पहुँचा दो।”

उसके यह कहते ही वह सारा तहखाना खाली हो गया। सारे बक्से वहाँ से हट कर भारत के राजकुमार के मकान में पहुँच चुके थे।

स्टैलीना और उसकी दासी फिर से उस महल में घूमने लगे कि उनको ऊपर जाती हुई एक छिपी हुई सीढ़ी मिली। वे उससे ऊपर चढ़े तो एक अंधेरी जगह में आ गये।

वहाँ एक आवाज बार-बार कह रही थी — “ओह मैं क्या करूँ? ओह मैं क्या करूँ?”

स्टैलीना उस आवाज को सुन कर काँप गयी उसने फिर से अपनी अंगूठी को याद करते हुए उसी आवाज की दिशा में अपने कदम बढ़ाये जहाँ से वह आवाज आ रही थी।

अब की बार वे एक बड़े कमरे में आ गये। वहाँ एक बड़ी मेज पर बहुत सारे सिर, हाथ, पैर आदि पड़े हुए थे और शरीर के दूसरे हिस्से कुरसियों और दीवारों पर लगे हुए थे।

वे सिर बोल रहे थे “ओह मैं क्या करूँ? ओह मैं क्या करूँ?”

ये सब देख कर दोनों लड़कियाँ बहुत डर गयीं। उनको लगा कि यह जानवरों के राजा का छिपा हुआ घर था।

फिर वहाँ उन्होंने वहाँ भूसे, मक्का, ओट्स[5] आदि से भरा एक भंडारघर देखा तो उन्होंने सोचा कि यह शायद उन जानवरों के खाने के लिये होगा जो उन्होंने बागीचे में देखे थे।

उनको लगा कि शायद वे सब वे ही जानवर होंगे जिनको जानवरों के राजा ने जानवर बना कर रख लिया होगा। यकीनन वह इन जानवरों को भी खा जायेगा।

उस रात स्टैलीना को रात भर नींद नहीं आयी। सुबह सवेरे हमेशा की तरह जानवरों का राजा उससे मिलने आया तो उसने रोज की तरह उससे पूछा — “क्या तुम ठीक से सोयीं?”

स्टैलीना ने आज भी उसको वैसी ही नम्रता से जवाब दिया जैसे वह उसको रोज देती थी — “हाँ, बहुत अच्छे से सोयी।”।

वह भी रोज की तरह से बोला — “ठीक है स्टैलीना, गुड बाई, खुश रहो। मैं कल सुबह तुमसे फिर मिलता हूँ।” और यह कह कर वह वहाँ से चला गया।

clip_image008उसके जाने के बाद स्टैलीना और उसकी दासी दोनों ऊपर के भंडारघर में गयीं। वहाँ उन्होंने उस भंडारघर की खिड़की खोली और भूसा, मक्का, ओट्स सभी कुछ जो कुछ वहाँ था उस खिड़की से बाहर बागीचे में फेंक दिया जहाँ जानवर घूम रहे थे ताकि वे खाने में लगे रहें और उनके उस महल को छोड़ने के बारे में अपने मालिक को बताने न जा सकें।

जब वे जानवर खा रहे थे तो स्टैलीना और उसकी दासी दोनों ने अपना कुछ सामान लिया और बागीचे की तरफ चल दीं।

जब वे उन दोनों खम्भों के पास आयीं जिन पर लिखा हुआ था “पूछो” और “और तुमको पता चल जायेगा” तो स्टैलीना ने अपनी अंगूठी अपनी मुठ्ठी में दबायी और बोली — “मैं तुम्हें हुकुम देती हूँ कि तुम मुझे यह बतलाओ कि तुम्हारे उस दिन के “लेकिन” का क्या मतलब था।”

खम्भा बोला — “उस लेकिन का मतलब यह था कि तुम यहाँ से तब तक नहीं भाग सकतीं जब तक कि उस जानवरों के राजा को तुम मार न दो।”

स्टैलीना बोली — “लेकिन यह मैं कैसे करूँ?”

clip_image010खम्भा फिर बोला — “तुम राजा के कमरे में जाओ। वहाँ उसकी एक आराम कुरसी रखी है। उसकी गद्दी के नीचे एक अखरोट रखा है। तुम उस अखरोट को निकाल लो। तुम्हारे उस अखरोट को वहाँ से निकालते ही वह राजा मर जायेगा।” और यह कहते ही वह खम्भा टूट कर गिर पड़ा।

स्टैलीना तुरन्त वापस महल में गयी और राजा की आराम कुरसी पर रखी गद्दी के नीचे रखा अखरोट निकाला। जैसे ही उसने वह अखरोट निकाला जानवरों का राजा चिल्लाता हुआ महल की तरफ भागा — “स्टैलीना, तुमने मुझे धोखा दिया। स्टैलीना, तुमने मुझे धोखा दिया।” और वह मर कर नीचे गिर पड़ा।

जैसे ही वह मर कर नीचे गिरा सारे जानवर आदमियों और औरतों में बदल गये। उन सबके ऊपर डाला हुआ जादू टूट चुका था।

वे सब राजा, रानी और राजकुमार थे और उस जानवरों के राजा का डाला हुआ जादू टूटते ही राजा रानी और राजकुमार बन गये थे। उन्होंने सबने स्टैलीना को धन्यवाद दिया।

वे सब उसको अपना राज्य देना चाहते थे और उससे शादी भी करना चाहते थे पर वह बोली — “मुझे अफसोस है कि मैंने अपना दुल्हा पहले से ही चुन रखा है और वह मेरा इन्तजार कर रहा है।”

कह कर स्टैलीना और उसकी दासी दोनों उस महल से बाहर निकल गयीं। उनके बाहर निकलते ही सारा महल जल कर खाक हो गया।

राजा, रानी राजकुमार आदि सब अपने अपने घर चले गये। स्टैलीना और उसकी दासी भारत चले गये। वहाँ जा कर स्टैलीना ने भारत के राजकुमार से शादी कर ली और फिर वह सारी ज़िन्दगी खुशी खुशी रही।


[1] The King of the Animals (Story No 52) – a folktale from Italy from its Bologna area. Adapted from the book: “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Stellina – the name of the daughter

[3] Translated for the word “Parasol” – see its picture above.

[4] A knight is a person granted an honorary title of knighthood by a monarch or other political leader for service to the Monarch or country, especially in a military capacity. See its picture above.

[5] Oats is a kind of grain. See its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–3 : 9 जानवरों का राजा // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–3 : 9 जानवरों का राजा // सुषमा गुप्ता
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