देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–4 : 2 सालमन्ना अंगूर // सुषमा गुप्ता

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2 सालमन्ना अंगूर [1] एक बार एक राजा था जिसके एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी। वह शादी के लायक थी। उधर पड़ोस के राज्य के एक राजा के तीन बेटे थे और व...

2 सालमन्ना अंगूर[1]

एक बार एक राजा था जिसके एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी। वह शादी के लायक थी। उधर पड़ोस के राज्य के एक राजा के तीन बेटे थे और वे तीनों उस राजकुमारी को प्यार करते थे।

सो एक दिन वे राजकुमारी से शादी का प्रस्ताव ले कर राजा के पास गये तो राजकुमारी के पिता ने कहा — “जहाँ तक मेरा सवाल है मेरे लिये तो तुम तीनों ही बराबर हो।

मैं तुम तीनों में से किसी को भी यह नहीं कह सकता कि तुम तीनों में से फलां राजकुमार मुझे ज़्यादा अच्छा लगता है पर मैं तुम लोगों में आपस में जलन भी नहीं पैदा करना चाहता।

इसलिये ऐसा करते हैं कि क्यों न तुम सब 6–6 महीने के लिये दुनिया घूमो और जो भी राजकुमारी के लिये सबसे अच्छी भेंट ले कर आयेगा वही मेरा दामाद[2] बनेगा।”

सो वे तीनों भाई साथ-साथ निकल पड़े। चलते-चलते वे लोग एक ऐसी जगह आये जहाँ से सड़क तीन दिशाओं में जाती थी। वे लोग वहीं पर ठहर गये और छह महीने बाद वहीं पर मिलने का वायदा करके तीनों ने अलग-अलग सड़क पकड़ी और अपने-अपने रास्ते चल दिये।

सबसे बड़ा भाई तीन, चार, पांच महीने तक चलता रहा पर उसको कहीं कोई ऐसी चीज़ नहीं मिली जो राजकुमारी को भेंट देने के लायक होती।

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तब छठे महीने में एक सुबह को बहुत दूर के एक शहर में उसने अपनी खिड़की के नीचे एक ठेले वाले[3] को यह आवाज लगाते सुना — “बढ़िया कालीन ले लो, बढ़िया कालीन ले लो।”

उसने खिड़की से बाहर झांका तो नीचे एक कालीन वाले को कालीन बेचते देखा। कालीन बेचने वाले ने उससे पूछा — “क्या आप एक बढ़िया कालीन खरीदेंगे?”

राजकुमार ने जवाब दिया — “जब कुछ नहीं मिलेगा तब देखूँगा। कालीन तो मेरे महल में सब जगह बिछे हुए है, यहाँ तक कि मेरी तो रसोई में भी कालीन बिछा हुआ है।”

पर कालीन बेचने वाले ने जिद की — “पर मुझे यकीन है कि आपके घर में ऐसा जादुई कालीन नहीं होगा जैसा मेरे पास है।”

“इस कालीन में क्या खास बात है भाई?”

“इस कालीन में यह खास बात है कि जब आप इस पर पैर रखेंगे तो यह आपको हवा में उड़ा कर दूर दूर तक ले जायेगा।”

राजकुमार ने चुटकी बजायी और सोचा “यही सबसे अच्छी भेंट है राजकुमारी के लिये। मैं इसे ही उसके लिये खरीद लेता हूँ।”

उसने कालीन बेचने वाले से पूछा — “इसका क्या दाम है?”

“100 क्राउन[4]।”

“ठीक है।” उसने 100 क्राउन गिने और वह कालीन उससे खरीद लिया।

जैसे ही उसने उस कालीन के ऊपर पैर रखा वह कालीन तो उसको ले कर हवा में उड़ चला – पहाड़ों के ऊपर, घाटियों में हो कर और फिर वह वहाँ उसी सराय में आ गया जहाँ तीनों भाइयों ने अपनी छह महीने की यात्रा से लौट कर मिलने का वायदा किया था।

उसके दोनों भाई अभी तक नहीं लौटे थे।

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बीच वाला भाई भी दूर दूर तक गया पर वह भी कोई ऐसी चीज़ नहीं पा सका जिसको वह राजकुमारी के लिये भेंट में ले जा सकता।

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वह यह सोच ही रहा था कि वह क्या करे कि एक दिन उसको एक दूरबीन बेचने वाले की आवाज सुनायी पड़ी — “दूरबीन ले लो दूरबीन। ओ नौजवान, दूरबीन खरीदोगे?”

राजकुमार ने कहा — “मैं और दूरबीन ले कर क्या करूँगा? मेरे घर में तो बहुत सारी दूरबीन हैं।”

दूरबीन बेचने वाला बोला — “मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ कि आपके घर में बहुत सारी दूरबीनें जरूर होंगी पर आपने ऐसी जादुई दूरबीनें कभी नहीं देखी होंगी।”

“ऐसी क्या खास बात है इन दूरबीनों में?”

दूरबीन बेचने वाला बोला — “इन दूरबीनों से आप केवल 100 मील दूर का ही नहीं बल्कि दीवार के उस पार का भी देख सकते हैं।”

राजकुमार यह सुन कर बहुत खुश हुआ। उसने सोचा “राजकुमारी के लिये यही बहुत अच्छी भेंट है मैं इसी को खरीद लेता हूँ।”

उसने दूरबीन बेचने वाले से पूछा — “कितने की दी है यह दूरबीन?”

“100 क्राउन की एक दूरबीन।”

उसने भी 100 क्राउन उस दूरबीन बेचने वाले को दिये और उससे एक दूरबीन खरीद ली।

दूरबीन खरीद कर वह भी उसी सराय में आ गया जहाँ उसका बड़ा भाई ठहरा हुआ था। वहाँ वे दोनों अब अपने सबसे छोटे भाई का इन्तजार करने लगे।

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सबसे छोटे भाई को आखिरी दिन तक कुछ नहीं मिला। वह अब अपनी सारी आशाएँ छोड़ चुका था। सो उसने खाली हाथ ही घर लौटने का निश्चय किया।

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जब वह घर वापस आ रहा था तो रास्ते में उसको एक फल बेचने वाला मिला। वह चिल्लाता जा रहा था — “सालमन्ना अंगूर ले लो, सालमन्ना अंगूर। ये बहुत बढ़िया सालमन्ना अंगूर हैं।”

इस राजकुमार ने कभी सालमन्ना अंगूर का नाम नहीं सुना था क्योंकि वे उसके देश में उगते ही नहीं थे। सो वह उस फल बेचने वाले के पास गया और उससे पूछा — “ये सालमन्ना अंगूर क्या होते हैं?”

फल बेचने वाला बोला — “ये सालमन्ना अंगूर कहलाते हैं और इनसे ज़्यादा अच्छे अंगूर दुनिया भर में कहीं नहीं होते। ये एक और आश्चर्यजनक काम करते हैं।”

“वह क्या?”

“एक अंगूर किसी ऐसे आदमी के मुँह में रखो जो अपनी आखिरी सांसें ले रहा हो तो वह तुरन्त ही ठीक हो जाता है।”

राजकुमार खुशी से चिल्लाया — “क्या तुम ठीक कह रहे हो? अगर ऐसा है तो मैं इनमें से कुछ खरीद लेता हूँ। कितने के हैं ये?”

“हालाकि ये अंगूर एक एक करके बेचे जाते हैं पर मैं आपके लिये इनका खास कम दाम लगा दूँगा – 100 क्राउन का एक अंगूर।”

राजकुमार के पास केवल 300 क्राउन थे सो उनसे वह केवल तीन अंगूर ही खरीद सका। उसने उनको एक छोटे से बक्से में रखा और अपने भाइयों से मिलने के लिये सराय चल दिया।

जब वे तीनों भाई सराय में मिले तो तीनों ने एक दूसरे से पूछा कि उन्होंने क्या क्या खरीदा।

सबसे बड़ा लड़का बोला — “ओह केवल एक छोटा सा कालीन।”

बीच वाला लड़का बोला — “मैंने एक छोटी सी दूरबीन खरीदी।”

सबसे छोटा वाला लड़का बोला — “और मैंने केवल एक छोटा सा फल खरीदा, ज़्यादा कुछ नहीं।”

और तीनों अपने घर की तरफ चल पड़े कि उनमें से एक लड़का बोला — “पता नहीं हमारे घर में अभी क्या हो रहा होगा। और राजकुमारी के महल में भी।”

सो बीच वाले लड़के ने अपनी दूरबीन अपने घर की तरफ की तो देखा कि वहाँ सब ठीक चल रहा था। फिर उसने अपने पड़ोसी राज्य की तरफ देखा जहाँ उसकी प्रेमिका का महल था तो वह तो चीख ही पड़ा।

भाइयों ने पूछा — “क्या हुआ?”

बीच वाला भाई बोला — “मैं इस दूरबीन से अपनी प्रेमिका का महल देख सकता हूँ। पर वहाँ बहुत सारी गाड़ियों की लाइन लगी है। लोग रो रहे हैं और अपने बाल नोच रहे हैं।

“और महल के अन्दर?”

“महल के अन्दर मुझे एक डाक्टर दिखायी दे रहा है, एक पादरी दिखायी दे रहा है। वे दोनों राजकुमारी के पलंग के पास खड़े हैं। राजकुमारी अपने बिस्तर पर चुपचाप पड़ी हुई है। उसका रंग पीला पड़ा हुआ है और वह मरी जैसी लग रही है।

जल्दी चलो भाइयों जल्दी। इससे पहले कि हमको देर हो जाये हमको जल्दी ही वहाँ पहुँचना चाहिये।”

“पर हम वहाँ जल्दी कभी नहीं पहुँच सकते। वह तो 50 मील दूर है।”

सबसे बड़ा भाई बोला — “तुम लोग चिन्ता न करो। तुम दोनों मेरे इस कालीन पर बैठ जाओ और हम लोग बहुत जल्दी ही वहाँ पहुँच जायेंगे।”

सो तीनों उस कालीन पर बैठ गये और कालीन उन तीनों को ले कर उड़ चला। पलक झपकते ही वह कालीन तीनों राजकुमारों को ले कर राजकुमारी के कमरे में जा कर एक बहुत ही साधारण से कालीन के ऊपर उतर गया।

सबसे छोटे भाई ने सालमन्ना अंगूरों के चारों तरफ लिपटी हुई रुई पहले से ही हटा रखी थी। उसने झट से एक अंगूर निकाला और राजकुमारी के मुँह में रख दिया।

वह उस अंगूर को निगल गयी और तुरन्त ही उसने अपनी आँखें खोल दीं। उस लड़के ने जल्दी से एक और अंगूर उसके मुँह में रख दिया जिससे उसके चेहरे का रंग वापस आ गया।

फिर उसने तीसरा और आखिरी अंगूर भी उसको खिला दिया। उसको खाते ही उसने एक गहरी सॉस ली और अपनी बॉहें उठा दीं। वह अपने बिस्तर पर बैठ गयी और उसने अपनी दासियों को हुकुम दिया कि वे उसको उसके सबसे सुन्दर कपड़े पहना कर सजा दें।

सब लोग बहुत खुश थे कि अचानक सबसे छोटा भाई बोला — “मैं जीत गया और अब राजकुमारी मेरी है। बिना मेरे सालमन्ना अंगूर खाये तो अब तक तो वह कभी की मर ही गयी होती।”

बीच वाले भाई ने कहा — “नहीं भाई, अगर मैं अपनी दूरबीन से नहीं देखता और तुमको यह नहीं बताता कि राजकुमारी बीमार है तो तुम्हारे अंगूर अकेले क्या कर लेते? इसलिये राजकुमारी मेरी है और मैं ही उससे शादी करने का हकदार हूँ।”

सबसे बड़ा भाई बोला — “नहीं भाई नहीं, मुझे अफसोस है कि राजकुमारी तुममें से किसी की भी नहीं है केवल मेरी है और इसे मुझ से कोई नहीं छीन सकता।

तुम लोगों का सहयोग तो मेरे सहयोग के सामने कुछ भी नहीं। अगर मेरा कालीन तुम सबको यहाँ समय से नहीं लाता तो तुम दोनों वहाँ बैठे-बैठे क्या कर सकते थे।”

इस तरह राजा जो झगड़ा उन तीनों राजकुमारों में नहीं चाहता था वह और ज़ोर ज़ोर से होने लगा।

राजा ने फिर उस झगड़े का अन्त इस तरह किया कि उसने अपनी बेटी की शादी किसी चौथे आदमी से कर दी जिसके पास कुछ भी नहीं था।

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[1] The Salamanna Grapes (Story No 65) – a folktale from Italy from its Montale Pistoiese area. Adapted from the book: “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980..

[There are a few similar tales in Vikram Vaitaal Stories also, read them at:

(1) Three Princes - http://sushmajee.com/shishusansar/stories-vikram-vaitaal/vaitaal-1/5-three-princes.htm (2) Three Delicate Queens - http://sushmajee.com/shishusansar/stories-vikram-vaitaal/vaitaal-2/10-delicate.htm (3) Three Suitors - http://sushmajee.com/shishusansar/stories-vikram-vaitaal/vaitaal-1/2-three-suitors.htm (4) Varamaalaa - http://sushmajee.com/shishusansar/stories-vikram-vaitaal/vaitaal-1/7-varmaalaa.htm ]

[2] Son-in-law – daughter’s husband

[3] Translated for the word “Hawker”

[4] Crown is the currency used in those days in Europe

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. 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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–4 : 2 सालमन्ना अंगूर // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–4 : 2 सालमन्ना अंगूर // सुषमा गुप्ता
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