रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

समीक्षा : अनवरत यात्रा (दोहा संग्रह) / शिवमूर्ति सिंह // समीक्षक : डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

साझा करें:

शिवमूर्ति सिंह समीक्षा : अनवरत यात्रा (दोहा संग्रह) / शिवमूर्ति सिंह / प्रतिभा प्रकाशन / इलाहाबाद / २०१३ / मूल्य, रु, १५०/- दोहों में कटाक्ष...

शिवमूर्ति सिंह

समीक्षा : अनवरत यात्रा (दोहा संग्रह) / शिवमूर्ति सिंह / प्रतिभा प्रकाशन / इलाहाबाद / २०१३ / मूल्य, रु, १५०/-

दोहों में कटाक्ष

डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

शिवमूर्ति सिंह से मेरा परिचय एक कहानीकार के रूप में हुआ था | उस समय मुझे इस बात का बिलकुल आभास नहीं था कि वे एक बड़े कवि भी हैं जिन्होंने गीत, मुक्तक, दोहा आदि, काव्य विधाओं में उल्लेखनीय काम किया है | उनका यह दोहा संग्रह “एक अनवरत यात्रा” जब मुझे पढ़ने को मिला तो मैं दंग रह गया | मुझे लगा कि शिवमूर्ति जी के दोहे कबीर, रहीम और बिहारी के दोहों के बरक्स यदि रखे जाएं तो किसी भी तरह से वे उनसे कमतर नहीं हैं |

दोहा हिन्दी का आदि छंद माना गया है | यह अपने में स्वतन्त्र और सम्पूर्ण छंद होता है | प्राकृत और अपभ्रंश में इसे ‘दुहा’ कहा गया है | तमिल भाषा में इसे ‘कुरल’ की संज्ञा दी गई है | दक्खिनी हिन्दी में इसे ‘दोहरा’ कहते हैं | उर्दू में ग़ज़ल के ‘शेर’ भी बहुत कुछ दोहों की तरह होते हैं | अपने में स्वतंत्र और सम्पूर्ण | वे ग़ज़ल के दूसरे शेरों में ताका-झांकी नहीं करते |

हिन्दी में दोहों की एक अलग ही बुनावट है | दो पंक्तियों के इस छंद में चार चरण होते हैं | पहले और तीसरे चरण में १३-१३ मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं | इनकी विषय सामग्री बहुत व्यापक है | भक्ति, श्रृंगार, नीति, वीरता आदि, किसी भी विषय को वे अपनी अंतर्वस्तु बना लेते हैं | परम्परागत दोहों में हमें उपदेश भी मिलता है | वे ‘प्रस्क्रिप्टिव’ होते हैं |

दोहे अपने स्वरूप और अपनी अंतर्वस्तु से ही नहीं जाने जाते | उनमें अभिव्यक्ति की सहजता, भावों की गहनता, मार्मिकता और सम्प्रेषण की त्वरा भी आवश्यक है | थोड़े में बहुत कह जाना दोहों की विशेषता है |

समकालीन हिन्दी काव्य में अतुकांत कविता बहुत दिनों तक छाई रही | उससे उकताकर विरोध में जब नए सोच और नई शैलियों का पदार्पण हुआ तो दोहों को पुन: अपनी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त हो गई | यह स्वाभाविक था | अनेक नए और पुराने कवियों ने अपनी काव्याभिव्यक्ति का वाहन दोहों को बनाया | दोहाकारों की एक पूरी पंक्ति तैयार हो गई | अशोक अंजुम, और देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ ने स्वतन्त्र रूप से कई दोहा-संकलनों का सम्पादन किया | आज के दोहों को जन जन में पहुंचाने का इन्होंने प्रशंसनीय कार्य किया |

अशोक अंजुम द्वारा संपादित कृति “नई सदी के प्रतिनिध दोहाकार” में शिवमूर्ति सिंह को भी स्थान मिल चुका है | शिवमूर्ति सिंह के दोहों में, जैसा कि वे स्वयं स्वीकार करते हैं, जहां क्रूर और अमानवीत समय के सच को रेशा रेशा खोला गया है वहीं अमानवीय मूल्यों को प्रकाशित कर उन्हें स्थापित करने का भी आग्रह है | इन दोहों मे समाज की धड़कने हैं, धर्म और राजनीति के विद्रूप और विसंगतियां हैं, प्रकृति है, ऋतुएँ हैं, पाश्चात्य प्रभाव से घायल हमारी संस्कृति और हमारे मूल्य हैं और वह उपेक्षित आम-आदमी है जो भयावह, क्रूर समय के थपेड़े झेल रहा है |

वैसे तो शिवमूर्ति के दोहों में आपको कई स्वर और अनेक छटाएं मिलेंगीं किन्तु इनके दोहों का मूल स्वर व्यंग्यात्मक है | शिवमूर्ति जी वर्तमान व्यवस्था और राजनीति से ही नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक स्थितियों से भी अति असंतुष्ट हैं | इस क्रोध की अभिव्यक्ति उनके दोहों में कटाक्ष और व्यंग्य के रूप में हुई है | उन्हें जहां जहां भी असंगतियाँ और विरोधाभास दिखाई दिया है वहां वे तंज कसने से चूकते नहीं | बुराई की वे भर्त्सना करते हैं, तोहमत करते हैं, उसे दुत्कारते और धिक्कारते हैं |

आज व्यंग्य के लिए राजनीति सर्वाधिक और सहज रूप से उपलब्ध है | राजनीति को निशाना बनाते शिवमूर्ति के कुछ दोहे उद्धरित करने योग्य हैं –

राजनीति में नीति के अतिरंजित दो वर्ण

राज करो, साधो सदा सुरा, सुन्दरी, स्वर्ण

कैसा माया जनतंत्र की क्या कुदरत का खेल

माथ छछूंदर लग रहा शुद्ध चमेली तेल

एक समय था जब राजनीति गांधी जी के सिद्धांतों पर चलने के लिए उत्साहित थी और ‘अंतिम व्यक्ति’ के लिए उसकी प्रथम चिंता थी | लेकिन आज –

‘अन्त्य’ पंगु होकर गिरा पीट रहा है माथ

‘उदय’ धूर्त जा मिल गया हथेलियों के साथ

कृषक खुदकशी कर रहे राजभवन में जश्न

संसद पर हंसते रहे, भूख मौत के प्रश्न

तख़्तनशीं हैं आज सब, क़तली जोकर धूर्त

ये ही गांधी के सभी, स्वप्न करेंगे मूर्त

यों कहने के लिए आज का प्रजातंत्र प्रजा का, प्रजा द्वारा, प्रजा के लिए शासन है किन्तु आमजन आज हाशिए पर पडा है और संवेदनहीन ‘नेता’ प्रजातंत्रीय फसल काट रहे हैं | क्योंकि आज –

सेवक, तस्कर माफिया व्यापारी श्रीमंत

नेता जी की देह में हुए सभी जीवंत

कुर्सी ने सर चढ़ कहा, पूज मुझे बन काठ

अगर दया दिखलायगा बिखर जायगा ठाट

जब से भारत इंडिया हुआ है पश्चिमी बयार ने हमारे सारे समाज और संस्कृति को भृष्ट कर दिया है | शिवमूर्ति सिंह इस प्रभाव को अपनी देशी ठसक में ‘पछुआ’ हवा कहते हैं | निम्न दोहे में दोहाकार ‘बाज़ार हाट’ की जगह ‘हाट-बार’ कहकर इसी पछुआ (बयार) को रेखांकित करता हैं |--

ले आई पछुआ यहाँ भोगवाद के बीज

घर की लक्ष्मी हो गई हाट-बार की चीज़

युवा करें रंगरेलियाँ, बूढ़े कोसें भाग

रिश्ते पापड़ सा जले इस पछुआ की आग

तन-मन पर ऐसा चढ़ा पछुवा का उन्माद

अपनी अमराइयों की पुरवा लगे अस्वाद

आज मनुष्य अपनी सभी सीमाओं को लांघ गया है | उसने अपना नाता पूरी तरह से भोगवादी संस्कृति से जोड़ लिया है | मनुष्यता के सारे बंधन टूट गए हैं और जैसा की कवि कहता है, “इंसानों में आरही चौपायों की गंध” | ‘यूज़ एंड थ्रो’ का ऐसा रोग लग गया है कि ‘’नारी (तक) हुई ‘कमाडिटी’, फेंको करके भोग” | समाज की इस दुर्गति के लिए शिवमूर्ति जी पाश्चात्य जीवन पद्धति को ही उत्तरदायी मानते हैं कि जिसमें अध्यात्म के लिए कोई स्थान नहीं है और अर्थ ही एकमात्र साध्य हो गया है | किन्तु इसके विपरीत भारतीय सोच में –

अर्थ सदा साधक रहा, किन्तु आज यह हाल

सिद्धि-साध्य सबकुछ यही, साधक है बेहाल

यही कारण है कि सारे मानवीय मूल्य विमूल्य हो गए हैं | स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि

है कोहरे की कैद में फंसा हुआ दिनमान

मांग रहा है रोशनी खाद्योतों से दान

डाल डाल वट वृक्ष की गिद्ध काक अधीन

कोयल कीर कपोत सब हैं कौड़ी के तीन

ऐसा नहीं है कि शिवमूर्ति सिंह के यहाँ केवल कटाक्ष ही मिलते हैं | वे अत्यंत सहृदय और संवेदनशील भी हैं | वे तो वस्तुत: प्रेम-पथ पर एक अनवरत यात्रा के लिए निकले हैं | इस संकलन का आगाज़ ही प्रेम विषयक दोहों से किया गया है |

प्रेम पंथ में है नहीं कोई कहीं पड़ाव

एक अनवरत यात्रा एक अरोध बहाव

अकथ कथा है प्रेम की अकथ अनोखी रीत

गूंगे का गुड जानिए, है अभिव्यक्ति अतीत

भोग नहीं यह योग है, योगी प्रेमी यार

नित चकोर सा चोंच से चुनना है अंगार

शिवमूर्ति सिंह के कुछ दोहों में प्रकृति चित्र भी लाजवाब हैं | बरखा सम्बंधित दोहे देखते ही बनते हैं | ‘खुश्बू के मधु-छंद’ शीर्षक खंड में सभी दोहे प्रकृति के रूप रंग को ही समर्पित हैं –

बरसे वारिद झूमकर, सरसे गिरी-वन-बाग़

सिर सिज सिरसिज हो गए, सरसी-सरित तड़ाग

इन्द्रधनुष ले हाथ में बरसा है शर तान

मार रहा नभ, मेदनी मुदित झेलती बान

‘आश्लेवा’ को अंक ले भागा रसिया मेह

विसुध अभागिन ‘आद्रा’ रही सिसकती गेह

“अनवरत यात्रा” का शायद ही कोई ऐसा दोहा हो जो उल्लेखनीय न हो | पूरी पुस्तक ही उद्धृत की जा सकती है अत: सहृदय पाठकों के लिए बजाय इसके कि वे पुस्तक पर समीक्षाएं पढ़ें स्वयं पुस्तक को ही पढ़कर उसका रसास्वादन लेना अभीष्ट होगा |

-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो.९६२१२२२७७८)

१/१० एच आई जी,/ सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3845,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2788,कहानी,2118,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,839,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,8,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1923,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,649,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,56,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: समीक्षा : अनवरत यात्रा (दोहा संग्रह) / शिवमूर्ति सिंह // समीक्षक : डॉ. सुरेन्द्र वर्मा
समीक्षा : अनवरत यात्रा (दोहा संग्रह) / शिवमूर्ति सिंह // समीक्षक : डॉ. सुरेन्द्र वर्मा
https://lh3.googleusercontent.com/-tQpiIaIsA9E/WIGmTejYSgI/AAAAAAAAyTU/k9JKRsjk94A/image_thumb%25255B6%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-tQpiIaIsA9E/WIGmTejYSgI/AAAAAAAAyTU/k9JKRsjk94A/s72-c/image_thumb%25255B6%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/10/blog-post_3.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/10/blog-post_3.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ