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रावण को कौन जलाए // लघुकथा // सुशील शर्मा

आज मुहल्ले में बहुत उत्साह था।सब बच्चे रावण की तैयारी में दो दिन से लगे थे।आज शाम को रावण बन कर तैयार था।दस सिर वाला रावण मुहल्ले के मैदान में खड़ा था।किंतु अब एक नई समस्या सामने आ गई थी।मुन्नू,शंटी, बंटी,सोनू सब ने खूब मेहनत कर रावण बनाया था और हर बच्चा चाहता था कि रावण को सबसे पहले वो आग लगाए।

सोनू सबसे बड़ा था कहने लगा "देखो मेरे मार्गदर्शन में ये रावण बना है और मैं तुम सबसे बड़ा हूँ तो इसे सबसे पहले आग मैं ही लगाऊंगा।"

शंटी चिल्लाया "नही ऐसा नही हो सकता मैंने घर घर जाकर चंदा इकठ्ठा किया है,अगर पैसा नही होता तो कहां से बना लेते रावण?सबसे पहले मैं ही आग लगाऊंगा।"

"अरे वाह मैं दिन भर से मेहनत कर रहा हूँ बांस का ढांचा बनाया मटके का सिर बनाया पसीना बहा रहा हूँ मेरा पहला अधिकार है रावण जलाने का"मुन्नू ने अपना दावा पुख्ता पेश किया।

"अच्छा और मैंने दिन भर रावण के कपड़े सिले उसका क्या पहले मैं ही आग लगाउंगी"

रानी ने अपना पक्का दावा ठोका।

बच्चों की बातें बड़ो तक पहुंची हर बच्चे के माता पिता को उनके बच्चे की बात तर्कसंगत लगी।

आखिर निर्णय हुआ कि आप पर ये निर्णय छोड़ा जाए कि इन चार बच्चों में से रावण को कौन सबसे पहले जलाएगा।

आप का निर्णय तर्क सहित सादर आमंत्रित हैं।

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