रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 15 शैतान ने तीन बहिनों से शादी कैसे की // सुषमा गुप्ता

साझा करें:

15 शैतान ने तीन बहिनों से शादी कैसे की [1] एक बार की बात है कि एक शैतान को शादी करने की बड़ी इच्छा हुई। सो उसने नरक छोड़ा, एक बहुत ही सुन्दर न...

dancing lady 2

15 शैतान ने तीन बहिनों से शादी कैसे की[1]

एक बार की बात है कि एक शैतान को शादी करने की बड़ी इच्छा हुई। सो उसने नरक छोड़ा, एक बहुत ही सुन्दर नौजवान का रूप रखा और एक बहुत ही बड़ा और सुन्दर मकान बनाया।

जब वह मकान पूरा बन गया तो उसमें उसने सब तरह का सबसे ज़्यादा फैशनेबिल जरूरत का सामान रखवाया और सब तरह की सजावट करवायी।

उसके बाद वह एक परिवार में गया और अपना परिचय दिया। उस परिवार में तीन बेटियाँ थीं। उसने उनमें से सबसे बड़ी वाली लड़की को पटाया और उसको खुश किया। वह उससे शादी करने को राजी हो गयी।

लड़की के माता पिता यह देख कर बहुत खुश थे कि उनकी बेटी की शादी कितने अच्छे घर में हो रही थी। जल्दी ही दोनों की शादी हो गयी। शादी के बाद शैतान लड़की को अपने घर ले गया।

घर ले जा कर उसने अपनी पत्नी को बहुत बढ़िया फूलों का एक छोटा सा गुलदस्ता दिया जो उसने उसके सीने पर लगा दिया। फिर वह उसको अपने घर के सारे कमरे दिखाने ले गया।

आखीर में वह एक बन्द दरवाजे के पास आया और उससे बोला — “यह सारा मकान तुम्हारा है तुम इसमें कुछ भी कर सकती हो पर किसी भी हालत में तुम इस दरवाजे को मत खोलना।”

पत्नी ने उसका कहा मानते हुए उस समय तो हाँ में सिर हिला दिया पर वह तो उस पल का ही इन्तजार करती रही जब उसको वह बन्द दरवाजा खोल कर देखना था।

अगली सुबह शैतान ने उससे कहा कि वह शिकार को जा रहा है। सो जब वह शैतान घर से बाहर चला गया तो तुरन्त ही वह लड़की उस बन्द दरवाजे की तरफ दौड़ी और उसे खोल दिया।

वहाँ तो उसने बहुत ही भयानक आग जलती देखी जो उसकी तरफ बढ़ी और उससे उसके सीने पर लगे वे फूल मुरझा गये जो उसके पति ने उसको दिये थे।

जब उसका पति घर आया तो उसने उससे पूछा कि उसने वह दरवाजा खोला तो नहीं तो उसने बिना किसी हिचक के जवाब दिया “नहीं”। पर जब शैतान ने अपने दिये फूलों की तरफ देखा तो उसको पता चल गया कि वह झूठ बोल रही है।

वह बोला — “अब मैं तुम्हारी उत्सुकता का और ज़्यादा इम्तिहान नहीं लूँगा। आओ मेरे साथ आओ मैं तुमको खुद दिखाता हूँ कि इस दरवाजे के पीछे क्या है।”

कह कर वह उसको दरवाजे तक ले गया, वह दरवाजा खोला और उसको इतने ज़ोर का धक्का दिया कि वह नरक में जा पड़ी। उसके बाद उसने वह दरवाजा बन्द कर लिया।

कुछ महीने बीतने के बाद उसने उसी परिवार की दूसरी लड़की को अपने साथ शादी करने के लिये पटाया और उसका दिल जीत लिया। उसके साथ भी ठीक वही हुआ जो उसकी बड़ी बहिन के साथ हुआ था।

अन्त में वह उसी परिवार की तीसरी लड़की के पास गया। यह लड़की होशियार थी। उसने सोचा “यकीनन इसने मेरी दोनों बहिनों को मार डाला है पर यह मेरे लिये अच्छा जोड़ा है। सो अब की बार मैं इसके साथ जाती हूँ और देखती हूँ कि मैं उन दोनों से ज़्यादा खुशकिस्मत हूँ या नहीं।”

और इस प्लान के साथ उसने उससे शादी के लिये हाँ कर दी। उसको भी घर ले जाने के बाद उसने उसे एक बहुत सुन्दर फूलों का छोटा सा गुलदस्ता दिया और उसको उसके सीने पर लगा दिया।

फिर वह उसको अपने घर के सारे कमरे दिखाने ले गया और एक बन्द दरवाजे को दिखाते हुए उससे उसको हर हाल में खोलने से मना कर दिया।

वह लड़की अपनी बहिनों की तरह उतनी उत्सुक तो नहीं थी पर फिर भी अगले दिन जब उसका पति घर से बाहर चला गया तो उसने वह बन्द दरवाजा खोला। पर इत्तफाक से उसने अपने सीने पर लगे फूल पहले से ही पानी में रख दिये थे।

सो उसने भी वह दरवाजा खोलने पर वह भयानक आग देखी और देखीं उसमें अपनी दोनों बहिनें।

उसके मुँह से निकला — “उफ़ मैं कितनी लाचार हूँ। मैं तो सोचती थी कि मैंने एक सामान्य आदमी से शादी की है पर यह तो शैतान है। अब मैं इसके चंगुल से बाहर कैसे निकलूँ।”

फिर उसने अपनी दोनों बहिनों को बड़ी सावधानी से उस नरक में से बाहर खींचा और उन्हें छिपा दिया। उसके बाद उसने वह फूलों का गुलदस्ता फिर से अपने सीने पर लगा लिया।

जब शैतान घर आया तो उसने अपने दिये हुए उन फूलों की तरफ देखा जो उसने उसके सीने पर लगाये थे। वे फूल उसको बिल्कुल ताजा लगे सो उसने उस लड़की से कोई सवाल नहीं पूछा। उसको विश्वास हो गया कि उसने अपना वायदा निभाया था। पहली बार उसने उसको सचमुच में प्यार किया।

कुछ दिनों बाद उस लड़की ने अपने पति से कहा कि क्या वह तीन आलमारियाँ रास्ते में बिना कहीं उनको नीचे रखे और बिना आराम किये उसके पिता के घर ले जायेगा।

शैतान ने कहा “हाँ हाँ क्यों नहीं।”

“पर ध्यान रहे कि तुम अपना वायदा याद रखना क्योंकि मैं तुमको यहाँ से देखती रहूँगी।”

शैतान ने उससे वायदा किया कि वह वैसा ही करेगा जैसा उसने उससे करने के लिये कहा है।

सो अगले दिन उसने अपनी एक बहिन को एक आलमारी में बन्द किया और उसको अपने पति के कन्धों पर लाद दिया। वह शैतान ताकतवर तो बहुत था पर साथ में सुस्त भी था। इसके अलावा उसको काम करने की आदत भी नहीं थी।

वह उस आलमारी को ले कर चला तो उस भारी आलमारी को उठाते उठाते थक गया। इससे पहले कि वह अपनी उस सड़क से बाहर निकलता जहाँ उसका मकान था वह कुछ देर आराम करना चाहता था कि उसकी पत्नी चिल्लायी — “इसको नीचे नहीं रखना। मैं तुम्हें देख रही हूँ।”

शैतान अनमनेपन से उस आलमारी को ले कर चलता रहा जब तक कि वह अपनी सड़क के कोने पर नहीं आ गया। वहाँ आ कर उसने सोचा कि यहाँ तो वह मुझको नहीं देख पायेगी सो मैं यहाँ इसको नीचे रख कर थोड़ा आराम कर लेता हूँ।

वह बस उस आलमारी को नीचे रखने ही वाला था कि उसकी पत्नी की बहिन जो उस आलमारी के अन्दर थी बोली — “इसको नीचे मत रखना मैं तुम्हें देख रही हूँ।”

गालियाँ देते हुए वह उस आलमारी को दूसरी सड़क तक ले गया और किसी दूसरे के घर के दरवाजे पर उसको फिर से रखने ही वाला था कि उसने फिर से उसकी बहिन की आवाज सुनी “इसको नीचे मत रखना मैं अभी भी तुम्हें देख रही हूँ।”

उसने सोचा मेरी पत्नी की ऑखें कैसी हैं कि वह सीधे तो सीधे कोने के दूसरी तरफ भी देख लेती हैं। और शायद वे दीवार के आरपार भी देख लें अगर वे शीशे की बनी हों।

इस तरह सोचते सोचते पसीने से लथपथ बहुत थका हुआ वह अपनी सास के घर आ पहुँचा। वहाँ उसने वह आलमारी उसको दी और तुरन्त ही घर वापस लौट गया ताकि घर जा कर वह बढ़िया नाश्ता कर सके।

अगले दिन भी वही हुआ। वह दूसरी आलमारी ले कर अपनी सास के घर गया और उसको उसको दे कर तुरन्त ही वापस आ गया।

तीसरे दिन उस लड़की को खुद को एक आलमारी में बैठ कर जाना था। सो उसने अपनी एक मूर्ति बनायी और उसको अपने कपड़े पहना दिये।

उसको उसने उस शैतान के मकान के छज्जे पर खड़ा कर दिया और खुद आलमारी में जा कर बैठ गयी। एक दासी ने उस आलमारी को शैतान के कन्धे पर रख दिया।

उसको उठाते हुए वह बुड़बुड़ाया — “उफ़ यह आलमारी तो उन दोनों आलमारियों से कहीं ज़्यादा भारी है। और आज जब वह छज्जे पर बैठी हुई है तो आज तो मेरे आराम करने का कोई मौका भी नहीं है।”

सो बड़ी मुश्किल से उस भारी आलमारी को उठा कर वह अपनी सास के घर बिना रुके चला। वहाँ उसने वह आलमारी भी अपनी सास को दी और जल्दी से अपने घर नाश्ते के लिये वापस दौड़ पड़ा। आज तो वह भारी आलमारी ले जाते ले जाते उसकी कमर ही टूट गयी थी।

पर आज जब वह घर पहुँचा तो रोज की तरह से उसकी पत्नी आज उसको लेने बाहर नहीं आयी। यहाँ तक कि उसका नाश्ता भी तैयार नहीं था सो उसने उसे आवाज लगायी — “मारगरीटा[2] तुम कहाँ हो?” पर उसकी इस पुकार का भी उसको कोई जवाब नहीं मिला।

वह अपने मकान में चारों तरफ भागता फिरा। एक बार उसकी नजर एक कमरे की खिड़की के बाहर पड़ी तो उसने देखा कि उसके छज्जे पर मारगरीटा खड़ी है।

वह बोला — “मारगरीटा, क्या तुम सो गयी हो? नीचे आओ। मैं कुत्ते की तरह थक गया हूँ और भेड़िये की तरह भूखा हूँ।”

फिर भी उसको कोई जवाब नहीं मिला तो वह गुस्से से ज़ोर से चिल्लाया — “अगर तुम नीचे नहीं आयीं तो मैं ऊपर आ कर तुमको नीचे ले कर आता हूँ।” पर मारगरीटा तो हिली भी नहीं।

गुस्से में भर कर वह ऊपर गया और उसके कान पर एक ज़ोर का घूँसा मारा कि उसका तो सिर ही उड़ गया। उसने देखा कि उसका सिर तो एक मूर्ति का सिर था और उसका नीचे का शरीर तो केवल चिथड़ों का बना हुआ था।

यह देख कर तो उसका गुस्सा बहुत ही बढ़ गया। वह अपने सारे घर में चीज़ों को तोड़ता फोड़ता फिरा पर उससे क्या फायदा था। इससे उसकी पत्नी तो मिलने वाली नहीं थी। उसको अपनी पत्नी के गहनों का केवल खाली बक्सा ही मिला।

वह बोला — “सो वह मेरे दिये गहने भी चुरा कर ले गयी।”

वह तुरन्त ही उसके माता पिता को इस बात की खबर करने दौड़ा। पर जब वह उसके घर के पास आया तो उसने देखा कि ऊपर छज्जे पर तो तीनों बहिनें यानी उसकी तीनों पत्नियाँ खड़ी हैं और उस पर हँस रही हैं।

उन तीनों पत्नियों को एक साथ वहाँ खड़ा देख कर तो वह शैतान इतना डर गया कि वह वहीं से उलटे पैरों भाग खड़ा हुआ और फिर अपने घर आ कर ही दम लिया।

उसके बाद से उसने फिर कभी शादी के बारे में सोचा भी नहीं।


[1] How the Satan married Three Sisters (Story No 16)– a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free on the Web Site :

https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[2] Margerita – name of the third and the youngest sister

------------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3845,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2789,कहानी,2119,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,839,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,8,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1924,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,650,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,689,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,56,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 15 शैतान ने तीन बहिनों से शादी कैसे की // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 15 शैतान ने तीन बहिनों से शादी कैसे की // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-7kHZXSbqTdM/WjvFI9uUJbI/AAAAAAAA9k8/JEWc_WsMOAA6_lb3roQ9Gx59wcUqMbmRwCHMYCw/dancing%2Blady%2B2_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-7kHZXSbqTdM/WjvFI9uUJbI/AAAAAAAA9k8/JEWc_WsMOAA6_lb3roQ9Gx59wcUqMbmRwCHMYCw/s72-c/dancing%2Blady%2B2_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/12/10-15-italy-ki-lok-katha-teen-bahan.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/12/10-15-italy-ki-lok-katha-teen-bahan.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ