संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 94 : मेरी शुक्रवारी यात्रा // समीक्षा तैलंग

SHARE:

समीक्षा तैलंग प्रविष्टि क्र. 94 मेरी शुक्रवारी यात्रा समुंदर की यात्रा शुक्रवारी होती जा रही है. जैसे मंगल-बुध की हाट हो... हर शुक्रवार आँ...

image

समीक्षा तैलंग

प्रविष्टि क्र. 94

मेरी शुक्रवारी यात्रा

समुंदर की यात्रा शुक्रवारी होती जा रही है. जैसे मंगल-बुध की हाट हो... हर शुक्रवार आँख खुली नहीं की सुबह समुंदर के किनारे. जहां, किनारे कभी नहीं मिलते.... बगैर मिले ही न जाने कितनी ही अनगिनत कहानियाँ गढ़ जाते हैं. हर कहानी का अपना अलग पहलू. शुद्ध कहानियाँ, देसी किरदार... लेकिन रंगीनीयत से भरे. ये रंगीनीयत न तो बेआबरू होते जिस्म की है और न ही उन तमाम जामों में बसे धुआँ उड़ाते शहरों की.... इस जहां में सब कुछ वैसा नहीं जिसे हम उथली आँखों से देखते हैं. गहराइयों तक पहुँचने के लिए गहरापन जरूरी है. जो अंधकार में उजलापन ढूंढ सके.

एकटक निगाहें घूरती जा रही थीं, उन बेजान पत्थरों को.... तेज होती सूरज की किरणें सीधे पानी पर पड़ती.... कहीं पानी हरा तो कहीं नीला दिखाई देता... मानो इंद्रधनुष आसमान से उतरकर समुंदर को सलामी ठोक रहा हो. किनारे पर बड़े-बड़े पत्थरों की बाड़ बनी है जिस पर मेरा ठिकाना होता है.... घंटों बैठती हूँ.... उन लहरों को आते-जाते देखना मन को तरोताजा करता है. हरेक लहर अपना सुख-दुख का अनुभव लेकर आती और लौट जाती. बाड में से खिसके हुये कुछ छोटे पत्थर किनारे पर धँसे हैं. जिन से लहरें बार-बार टकराती.... सूरज की किरणें जब पानी पर पड़ती, तब वे डूबे हुये पत्थर सोने के दिखने लगते. जैसे सोने की लंका की कुछ शिलाएँ बहकर वहाँ बस गई हों. वैसे भी रावण की लंका में कौन रहना चाहता है. न... जान, न... बेजान... कोई नहीं...

जैसे ही लहरें पीछे की ओर खुद को धकेलती, ये धँसे हुये पत्थर अपनी असली पहचान कराते. मान गई थी, हर पीली चमकदार चीज सोना नहीं होती. पर कुछ लोग ऐसे ही लाल-पीले हुआ करते और कुछ.... सोना न होते हुये भी तासीर से सोना ही रहते. पानी में पड़े उन छोटे पत्थरों के आसपास छिंगुली बराबर मछलियाँ अपने शिकार के इंतज़ार में सर...सरर... कर पलक झपकते ही इधर से उधर तेजी से निकल जाती. हर बार यही लगता कि शायद अभी-अभी यही वाली गुजरी थी. इसी तरह मनुष्य के झुंड में मनुष्य की पहचान बहुत कठिन है. कोई चारा डालता है, मछली फंसाने. जो एक्सपर्ट होते हैं, वे अपने जाल में सब तरह की मछलियों को आसानी से फंसा लेते हैं. शौकिया लोग हैं.... हफ्ते भर के खाने की तैयारी कर ही वहाँ से विदा होते हैं.

उन पत्थर को धकेलते हुये अंदर तक गुजरने की कोशिश में मेरी नजरें न जाने किन-किन रहस्यों को टटोलती आगे बढ़ती जा रही थीं. धँसती हुई रेत और उसमें धँसे बड़े-बड़े जीवित शंख. अनगिन रंगों से बने ये सीपी और शंख गवाह थे, कि ऊपरी सतहों पर हमेशा ही सब कुछ रंगीन होता है..... जैसे कोई जादू-नगरी.... ये इस बात का भी द्योतक हैं कि ईश्वर रचित सारी कायनाथ में सारे रंग शामिल हैं. पर आखिर में सारे रंग मिलकर उस काले रंग से सफेदा तैयार करते हैं. शुभ्र सफ़ेद... श्वेत-श्याम का भेद जानने का यह अंतिम मार्ग है. इस मार्ग पर पहुँचते-पहुंचते सत्य पूरा सफ़ेद होने लगता है.

रेत आगे-आगे और और धँसती जाती है. रेत का धंसना और पानी का गहरा होना समानान्तर चलता जाता है. वहीं ढेर सारे कवक, अलग-अलग प्रजातियों के, मुझसे मिलने आतुर थे. पर मैं उन सबसे अनजान थी. इसलिए परिचय होने में जरा वक्त लगा. लेकिन वक्त के साथ-साथ आगे बढ़ती नजरें सबको अपने में समेटती हुई बढ़ती जा रही थी. अलग-अलग आकृति और भुजाओं वाले शैवाल, जैसे स्वागत के लिए ही बिछे हुये हों. उनको शायद मनुष्यों का साथ थोड़ा भाता है. तभी जल्द ही दोस्ती करने में माहिर थे.

मेरी आँखें अब और तेजी से पानी को भेदती हुई बढ़ती जा रही थी. पानी की धार के विपरीत बढ़ना बड़ा ही कष्टप्रद होता है. पर यह एक अत्यंत सुखद अनुभव था. इसीलिए उस कष्टप्रद यात्रा को झेलने के लिए बार-बार तैयार.... आगे बढ़ने पर छोटे-छोटे टीलेनुमा आकृति कुछ चकित करने वाली थी. ऐसा लग रहा था- कोई व्यक्ति एक पैर पर खड़ा हो तपश्चर्या कर रहा हो. दो भुजाएँ ऐसी, जैसे प्रणाम की मुद्रा में जुड़ी थीं. दो और भुजाएँ दूर तक फैली हुई थी. जिस पर कुछ गोल आकृति के शैवाल लिपटे हुये थे रुद्राक्ष की माला की भांति. गले में एक विचित्र सर्पाकार शैवाल था. आभास सर्प का ही हो रहा था, उससे.... एक शिव रूप.... शैवाल में शैव भी और शव भी.... पर दोनों ही अ-शव की स्थिति में... पूर्णतः जागृत....

उफ़्फ़.... क्या था यह अनुभव- विचित्र किन्तु सत्य.... फिर सत्य था तो विचित्र क्यों? जिज्ञासा अधिक बढ़ने लगी... पलकें अपलक ही रहीं... यात्रा का संघर्ष और आकर्षण दोनों ही आनंददायक था. ये क्या?? आगे बढ़ने पर मेरी आँखें भौचक्की रह गईं. पूरा का पूरा ब्रह्मांड जैसे इसी समुंदर में समाया हो... हिमालय-सी दिखने वाली ऊंची-ऊंची पर्वत शृंखलाएं, बड़े-बड़े दैत्याकार वृक्ष, न जाने कितनी ही आकृतियाँ जो बार-बार उनके मानव होने का अहसास करा रही थीं. क्या यही वह जगह थी जहां मनुष्य देह त्यागने के बाद आता है? क्यों मेरी आँखें सब देखकर पथरा गई थीं? ये मानवकृति इस समाधि की अवस्था में क्या कर रही थी? क्या ऐसा ही अनुभव होता है जब मनुष्य समाधि में होता है? उन मानवों के बीच कुछ असुर भी थे. कोई अनगिनत मुंडों वाले थे तो कोई अनगिनत भुजाओं वाले... पर मेरी आँखें अभी थकी नहीं थीं. किस खोज में थी, इसका अंदाजा मुझे भी नहीं था. लेकिन वो जो भी खोज रही थी, बहुत ही रहस्यमय था. शायद ये इसी बात को इंगित कर रहा था, पृथ्वी के रहस्यों की खोज जारी रहनी चाहिए.... इतना आसान नहीं उसके रहस्य जानना, न ही खुद के अस्तित्व को जानना आसान है. जिस दिन गर्भ को जान लिया, ब्रह्मांड को जानना आसान हो जाएगा.

उन पर्वतों से गुजरना सुगम्य बिलकुल नहीं था.... जितने जानवरों को हम धरती पर देखते हैं, उससे कहीं अधिक इस पाताल लोक में थे. बहुत ही अलग.... हम जो जानवर देख पाते हैं उससे हजारों गुना अधिक बड़े आकार और प्रकार के प्राणी उस लोक में थे. पृथ्वी का पूरा भू-भाग हूबहू जल के अंदर.... बचपन में अक्सर परिकथाओं-कथाओं में सुना था, लेकिन देखने का सुकून अलग था ... यहाँ शांति थी. किसी की किसी से वैमनस्यता नहीं थी. न कोई खून का प्यासा था. मेरी आँखों ने ऐसी शांति पहली बार महसूस की थी. और उसमें गूँजती वह आवाज.

वह क्या था? कैसी आवाज थी? क्या यही पृथ्वी के गर्भ की आवाज थी, वही तरंगें जो एक सुमधुर स्वर में तब्दील हो रही थी? खड्ज का स्वर.... हाँ, यही था... वही गूंज रहा था.... उसकी तरंगदैर्ध्य भी निश्चित अंतराल की थी. कोई संगतकार नहीं था, न ही कोई स्वरपेटी.... जैसे कोई संगीतज्ञ गहन रियाज में केवल खड्ज का रियाज कर रहा हो. बस एक ही स्वर... ओम कहो चाहे खड्ज कहो.... कहने से ज्यादा सुनना अत्यंत ही मधुर. पूरे शरीर में उसकी तरंगों को महसूस किया जा सकता था. मेरा पूरा शरीर उसी आवाज को सुनने शून्य में था. शायद इसे ही अ-शव या समाधि की अवस्था कह सकते हैं. यह वही ध्वनि थी जो ब्रह्मांड में गूंजायमान है. और यह वही शून्य की स्थिति थी जिसे प्राप्त करने न जाने कितने ही लोग क्या-क्या नहीं करते. मैं उस दृश्य को देखने और उस ध्वनि में ऐसी अंतर्ध्यान थी, एक ही क्षण में इतना मोह. वहाँ से बाहर आना बहुत ही कष्टप्रद था. बस वहीं रुक जाना चाहती थी. इससे सुंदर यात्रा और इससे मधुर ध्वनि कोई हो ही नहीं सकती थी.

उतने में ही पास खड़े एक बच्चे ने पानी में कुछ उछाला, जिससे पानी के छींटे मेरे चेहरे पर थे.... और मैं अपनी तंद्रा से बाहर निकली. न जाने कितनी ही यात्राएं की अभी तक के सफर में... और न जाने कितनी ही करनी होंगी... पर ये मेरे जीवन की सबसे सफलतम यात्रा थी. जिसने न केवल हृदय पर बल्कि जीवन पर भी अमिट छाप छोड़ी है. मेरी, यह मनमोहक स्तब्ध करने वाली यात्रा, सम्पूर्ण यात्राओं में सर्वोपरि है....

समीक्षा तैलंग, आबुधाबी (यू.ए.ई.)

snehal123ind@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 94 : मेरी शुक्रवारी यात्रा // समीक्षा तैलंग
संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 94 : मेरी शुक्रवारी यात्रा // समीक्षा तैलंग
https://lh3.googleusercontent.com/-s38qe0V39hc/Wry588CKm4I/AAAAAAABAd0/U5oPNIpcDXwxfEpP7xShMHFVEOI3bH3_wCHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-s38qe0V39hc/Wry588CKm4I/AAAAAAABAd0/U5oPNIpcDXwxfEpP7xShMHFVEOI3bH3_wCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/03/94.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/03/94.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content