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किताबें मिलीं - अंधी पीसे, कुत्ते खाएँ : व्यंग्य कविताएँ - अविनाश ब्यौहार

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अविनाश ब्यौहार का व्यंग्य काव्य संग्रह रचनाकार.ऑर्ग को पिछले दिनों मिला. प्रस्तुत है संग्रह की कुछ कविताएँ -

39. पाप

हमारे सरकारी

बाबू बगैर

पैसे लिये

टस से मस

नहीं होते हैं....!

बाद में

वे गंगा में

डुबकी लगाकर

पापों को

धोते हैं.,!?


40. महंगाई

भ्रष्टाचार

की दुलहन

घूंघट ही घूंघट

में शरमाई.....!

और बड़ी

नजाकत के

साथ बोली-

मैं तो

हूँ महंगाई..¡¡

2०. चरित्र

वह यदि

नेता है तो

उसके चरित्र

में कोई

खोट है.....!

और उसका

चरित्र प्रमाण पत्र

वोट है.....!!

21; बिजली का बिल

हां तो

मेहरबानों,

कदरदानों,

थाम कर बैठिये

अपना दिल.....!

हम आपको

दिखाने जा

रहे हैं

बिजली का बिल!!

1. अंत

रावण का

अंत करने

राम आये थे,

कंस का

अन्त करने

श्याम आये थे

यह बात

मुझे क्या

कोई बतायेगा......?

कि दहेज का

अन्त करने

कौन आयेगा......?

2. दाम

आजकल

आम आदमी

आम हो

गया है......!

आम तो आम

गुठलियों के

दाम हो

गया है...... ।

28. प्रजातंत्र

पुलिस वालों

में देशभक्ति,

जन सेवा का

अभाव है.....!

ईमानदारी के

तन पर

रिश्वत का

गहरा घाव है....¡

राजनीति की

मांद में

चोर, डकैत, बदमाशों

का बसेरा है.... .!

हंसता हुआ

अंधकार

चीत्कार करता

सबेरा है.....!!

चाटुकारिता

कुर्सी बचाने का

मूल मंत्र है.....!

सही मायने में

क्या यही

हमारा प्रजातंत्र है...¡¡

173. लोक लीक

कोई दहेज दे

अथवा न दे

यहां तक तो

सब ठीक है.....!

पर बहुओं

को जलाना

कहां की

लोक रीत है.....!!

174 कंटक

जनता के

नुमाइंदे

जनता के लिये

जनता के द्वारा

चुनकर जाते हैं....!

लेकिन बाद में

वे जनता के

लिये ही

लोक कंटक

बन जाते हैं... ¡¡

31. बेलगाम महंगाई

बेलगाम महंगाई

आम आदमी

का गला

रेत रही है.....!

फिर भी

सरकार क्यों

नहीं चेत

रही है....!!

32. महंगी सब्जी

सब्जी का.

महंगा भाव

सुनकर

मेरे चेहरे से

उड़ने लगी हवाई...¡

जी हां,

अब हम

सब्जी ऐसे खायेंगे

जैसे कि

हो दवाई ¡¡

83. सोच

उनकी

सोच की चादर

मैली है....!

तभी तो

भ्रष्टाचार की आग

देश के

कोने-कोने में

फैली है....¡¡

८४. विकास की गंगा

मंत्री जी ने

दी सफाई,

कि हमने

विकस की

गंगा बहाई-.!

मैं बोला-

मंत्री महोदय

आपकी विकास

की गंगा

ऊपर से

चलते-चलते

बीच में आकर

कहीं खो गई.....।

'राम तेरी

गंगा मैली

हो गई'.....!!

किताबी कोना 8393265343324017026

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