नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

कटाक्ष–व्यंग्य // यह देश जवान कमीनों का // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

हमारे राज-नेता यह कहते हुए अघाते नहीं कि भारत आज युवाओं का देश है। जवानों की संख्या इस समय हिन्दुस्तान में सर्वाधिक है। इससे पहले भी हिन्दुस्तान में हसीन जवानों का टोटा नहीं था। कई वर्ष पूर्व एक फिल्मी गाना बड़ा प्रचलित हुआ था। आज भी उसकी लोक-प्रियता कम नहीं हुई है। शादी के मौकों पर जो सबसे अधिक बजाया जाने वाला गीत है वह नि:संदेह यही तो है – यह देश हसीन जवानों का !

लेकिन हमारे देश के इन हसीन जवानों को न जाने किसकी नज़र लग गई की उनके काम कनीने हो गए। किसी भी अखबार के पेज चौदह, जिसपर अमूमन खबरों की अपराध- कथाएँ छपती हैं, पर यदि हम नज़र डालें तो यह स्पष्ट हो जाएगा। आप कुछेक सुर्ख़ियों पर ज़रा गौर फरमाइए – एटा में शादी में सम्मिलित होने आई एक सात वर्ष की बच्ची की दुष्कर्म के बाद ह्त्या कर दी गई...बुलंदशहर में बकरी चराने गई आठ साल की मासूम के साथ दरिंदगी की गई.... बिजनौर में एक किशोरी को बंधक बना कर दुष्कर्म का मामला सामने आया है...पंजाब के अमृतसर में एक १२ वर्षीय बच्ची से एक युवक कई दिन तक बलात्कार करता रहा और धमकी देता रहा कि यदि किसी से शिकायत की तो वह उसे जान से मार डालेगा।

हिन्दुस्तान में पेज १४ बदनाम हो गया है। वहां प्रतिदिन ऐसी घटनाओं की एक लम्बी श्रृंखला देखी जा सकती है और आश्चर्य की बात तो यह है कि इस प्रकार के अपराधों की शिकार केवल किशोर आयु की बच्चियां ही नहीं हैं। बिल्कुल मासूम छोटी बच्चियां, अधेड़ स्त्रियाँ, यहाँ तक कि बूढी औरतें भी शिकार हो रही हैं। उम्र का कोई लिहाज़ नहीं है। जवान हो रहे एक लडके को हरियाणा में साढ़े तीन साल की एक बच्ची के साथ रेप करने के मामले में पकड़ा गया। इलाहाबाद में एक अवकाश प्राप्त वरिष्ट अध्यापिका के साथ बलात्कार कर जान से मार डाला गया। युवकों की कमीन जवानियाँ फूटी पड़ रही हैं। लानत है। और तुर्रा यह है कि हमारे राज-नेता इन विशुद्ध आपराधिक घटनाओं पर राजनीति कर अपनी अपनी रोटियाँ सेंक रहे हैं। उन्नाव काण्ड और कठुआ की करतूतें इसका प्रमाण हैं। जब रेप कमजोर तबकों को डराने और ताकत हासिल करने के लिए किया जाने लगे तो यह ओछी राजनीति की पराकाष्ठा है।

पत्रकारिता भी पीछे नहीं है। वहां के ‘हसीन’ जवान भी ऐसी कमीनी हरकतों में रस लेकर उन्हें बढ़-चढ़ कर परोस रहे हैं। पुलिस ने तो मानों सारी मर्यादाएं ही तोड़ दी हैं। उन्हें तो बस बहती-गंगा मिलनी चाहिए। उसमें हाथ धोने से वे भला कब बाज़ आए हैं। जवान ठहरे !

अखबार, ज़ाहिर है, अपवाद ही छापता है। मजबूरी है। पढ़ने वालों को भी तो रस चाहिए। रोज़-रोज़ की गैर-अपराधिक बातों पर भला कौन ध्यान देता है ? वे तो सामान्य रूप से घटती ही रहती हैं। हाँ कुछ अनहोनी हो जाए, तो मज़ा आता है ! हसीन जब कमीन हो जाए तो मज़ा आता है। खबर तो तभी बनती है ना। और खबर सिर्फ ‘खबर’ नहीं होती। वह ‘कथा’ होती है, एक ‘स्टोरी’ होती है। इसमें यथार्थ और कल्पना का एक ऐसा घाल-मेल होता है कि बात बजाए ‘सोचनीय’ के ‘दिलचस्प’ हो जाए। न्यूज़ को, इस प्रकार, ‘न्यूज़-स्टोरी’ बना दिया जाता है। क्या पुलिस, क्या राज-नेता, क्या पत्रकारिता, क्या जवानों तक मेरी यह आवाज़ जा रही है ? आखिर क्या बात है कि ऐसी वीभत्स बलात्कार की घनाओं को पढ़कर हमारे देश के हसीन जवानों का खून नहीं खौलता ?

कभी ‘हैंडसम’ की एक परिभाषा पढी थी। Handsome is one who handsome does. हसीन काम करने वाला हसीन होता है। लेकिन आज हसीनों को क्या हो गया है ? वे कमीनी पर क्यों उतर आए हैं ? आखिर वे कौन सा ऐसा रसायन इस्तेमाल करने लगे हैं जो अपनी जवानी को संभाल नहीं पा रहे हैं ? अभी भी देर नहीं हुई है। जाग जाइए। देश को हसीन जवानों का देश रहने दीजिए। उसे ज़हीन जवानों का देश रहने दीजिए। इसे कमीन जवानों का देश मत बनने दीजिए। आमीन।

डा. सुरेन्द्र वर्मा

१/१० सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११०११

3 टिप्पणियाँ

  1. क्या मेरे देश की धरती ने सोना उगलना बंद कर दिया है? सोने जैसे लोग नहीं रहे तो क्या
    युवावर्ग इतनी गीरी हुई घीनौनी हरकत पर उतर आया है? कोई ईश्वर यह स्थिति बदलने नहीं आएगा। मानसिकता बदलनी होगी। इस के लिए ज्ञान-स्व जागृति की आवश्यकता है।

    जवाब देंहटाएं
  2. क्या मेरे देश की धरती ने सोना उगलना बंद कर दिया है? सोने जैसे लोग नहीं रहे तो क्या
    युवावर्ग इतनी गीरी हुई घीनौनी हरकत पर उतर आया है? कोई ईश्वर यह स्थिति बदलने नहीं आएगा। मानसिकता बदलनी होगी। इस के लिए ज्ञान-स्व जागृति की आवश्यकता है।

    जवाब देंहटाएं
  3. डा आशा चौधरी8:00 pm

    सटीक व्यंग्य है । सच में वर्तमान में जो हो रहा है उसे देखते हुए यह बिचार आता है कि किसलिए बेटी बचाऐ?

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.