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पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ // 6 - गधे के कान वाला राजा // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ —

पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ

जिबूती, ऐरिट्रीया, केन्या, मैडागास्कर, रीयूनियन, सोमालिया, सूडान, यूगान्डा

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

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6 गधे के कान वाला राजा[1]

यह लोक कथा पूर्वीय अफ्रीका के सोमालिया देश की लोक कथाओं से ली गयी है।

यह बहुत पुरानी बात है कि एक राजा के बहुत बड़े कान थे जैसे कि गधे के होते हैं। राजा को अपने कान देख कर बड़ी शरम महसूस होती थी सो जब भी वह बाहर लोगों में होता तो वह अपने कान हमेशा ही ढक कर रखता ताकि गाँव के लोग उसके कानों के बारे में न जान पायें।

केवल एक ही आदमी ऐसा था जिसने राजा के कान देखे थे और वह था उसका नाई। राजा अपने नाई को अक्सर यह चेतावनी देता कि “तुम मुझसे यह वायदा करो कि तुम कभी किसी से यह नहीं कहोगे कि मेरे कान गधे के कान जैसे हैं नहीं तो में अपने दरबान तुम्हारे घर भेज दूँगा जो तुमको ज़िन्दगी भर के लिये जेल में बन्द कर देंगे। ”

हालाँकि राजा की चेतावनियों के बाद भी नाई को इस भेद को छिपाना बहुत मुश्किल हो गया था क्योंकि वह राजा के कानों के बारे में सब गाँव वालों को बताना चाहता था पर फिर भी बार बार राजा की चेतावनी उसके दिमाग में घूम जाती इसलिये कई साल तक वह इस भेद को छिपाये रहा। पर एक दिन तो उसकी यह इच्छा हद पार कर गयी।

एक सुबह जब वह नाई सो कर उठा तो उसको लगा कि अब वह यह भेद भेद नहीं रख सकता उसको इसे किसी न किसी से तो कहना तो था ही। सो वह कपड़े पहन कर तैयार हुआ और गाँव के बाहर खेतों की तरफ चल दिया जहाँ वह सोचता था कि वह अकेला ही होगा।

वहाँ उसने घास लगा एक जमीन का टुकड़ा देखा और वहाँ उसे हाथ से खोदना शुरू किया। धीरे धीरे उसने वह गड्ढा काफी गहरा कर लिया।

जब वह अपने काम से सन्तुष्ट हो गया तो वह उस गड्ढे के ऊपर झुका और अपनी सबसे तेज़ आवाज में चिल्लाया “राजा के गधे जैसे कान हैं। राजा के गधे जैसे कान हैं। ”

एक बार जब नाई ने राजा का भेद चिल्ला कर बोल दिया तो उसके दिल का बोझ काफी हल्का हो गया। इसके बाद उसने वह गड्ढा उस खोदी हुई मिट्टी और घास से ढक दिया और अपने घर वापस आ गया।

उसको यह विश्वास था कि उसने राजा के विश्वास को नहीं तोड़ा था क्योंकि उसने राजा का भेद किसी नहीं कहा था।

इसके बाद कई साल गुजर गये। कई साल बाद वहाँ उस गड्ढे के पास एक स्कूल बना और उस गड्ढे के चारों तरफ उस स्कूल का खेल का मैदान बना जहाँ उस स्कूल के बच्चे खेलते।

एक दिन जब बच्चे उस खेल के मैदान में खेल रहे थे तो एक छोटे बच्चे ने वहाँ घास और मिट्टी के नीचे एक गड्ढा छिपा देखा। बच्चे ने तुरन्त है वहाँ घास और मिट्टी हटायी तो उस गड्ढे में से एक बहुत ज़ोर की आवाज निकली “राजा के गधे जैसे कान हैं। राजा के गधे जैसे कान हैं। ”

उसे सारे बच्चों ने सुना। बच्चे नाई की यह आवाज सुन कर बहुत ही आश्चर्यचकित हो गये और राजा के कानों का यह भेद सुन कर आपस में हँसने लगे।

उस दिन जब वे स्कूल से घर वापस लौटे तो उन्होंने यह भेद अपने माता पिता से कहा। माता पिता ने यह भेद अपने परिवार के दूसरे सम्बन्धियों से कहा। और फिर उन परिवारों ने दूसरे परिवारों से कहा।

“राजा के गधे जैसे कान हैं। राजा के गधे जैसे कान हैं। ” कह कह कर वे आपस में बात करते रहे और हँसते रहे। बहुत जल्दी ही गाँव भर में यह बात सब लोग जान गये कि राजा के गधे जैसे कान हैं और वे यह सोच सोच कर हँसते रहे कि राजा सब लोगों के बीच में अपने कान ढक कर क्यों रखता था।

खैर फिर इस बात को राजा को भी जानने में बहुत देर नहीं लगी कि गाँव में सब लोग जान गये थे कि राजा के गधे जैसे कान हैं। इस बात को जान कर राजा को बहुत शरमिन्दगी हुई और बहुत गुस्सा भी आया।

राजा को याद आया कि उसके कानों के बारे में केवल एक ही आदमी जानता था और वह था उसका नाई। बस उसने तुरन्त ही अपने दरबान नाई को पकड़ कर जेल में बन्द कर देने लिये उसके घर भेजे।

दरबान भी तुरन्त ही नाई के घर गये उसको पकड़ कर लाये और ला कर उसको जेल में बन्द कर दिया। अब वहाँ उसको अपनी पूरी ज़िन्दगी जेल में काटनी पड़ेगी।

नाई ने राजा से बहुत प्रार्थना की कि वह उसको छोड़ दे पर राजा ने नाई से कहा — “तुमने मुझसे वायदा किया था कि तुम मेरा यह भेद किसी से नहीं कहोगे पर तुमसे यह भेद छिपाये नहीं छिपाया गया। मैंने तुम्हारे ऊपर विश्वास किया और तुमने मुझे धोखा दिया।

अब अपनी इस गलती के लिये तुम्हें अपनी सारी ज़िन्दगी जेल में काटनी पड़ेगी। तुम इसी तरीके से सीखोगे कि किसी का भेद छिपा कर ही रखना चाहिये न कि लोगों से कहना चाहिये। ”


इस तरह से नाई अपनी सारी ज़िन्दगी जेल में रहा और हमेशा ही राजा का भेद खोलने पर अफसोस करता रहा।


[1] A King With Donkey Ears – a tale from Somalia, Africa. Written by Ismael Dahir.

Adapted from the Web Site : http://teacher.worldstories.co.uk/book/383/preview

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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