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शेर की मूँछ // पश्चिमी अफ्रीका की लोककथाएँ // सुषमा गुप्ता

  देश विदेश की लोक कथाएँ — पश्चिमी अफ्रीका–1 :

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पश्चिमी अफ्रीका की लोक कथाएँ–1

बिनीन, बुरकीना फासो, केप वरडे, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऔ, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया,


संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

11 शेर की मूँछ[1]

यह लोक कथा भी पश्चिमी अफ्रीका के लाइबेरिया देश की लोक कथाओं से ली गयी है।

बहुत पहले की बात है एक जवान पति पत्नी अफ्रीका के एक छोटे से गाँव में रहते थे। कुछ दिनों से पति अपनी शादी से खुश नहीं था सो वह काम से घर देर से आता था।

उसकी पत्नी सोचती थी कि उसका पति बहुत ही अच्छा आदमी था पर वह भी अपनी शादी से बहुत ज़्यादा खुश नहीं थी क्योंकि उसका बरताव उसको बहुत दुखी कर रहा था।

जब वह बहुत तंग हो गयी तो गाँव के एक सबसे बूढ़े,े आदमी के पास गयी और उसको जा कर अपनी बात बतायी। वह बूढा, आदमी उसकी कहानी सुन कर बहुत दुखी हुआ।

उसी ने उन दोनों की शादी दो साल पहले करायी थी और उस समय उसको लग रहा था कि उन दोनों की शादी अच्छी रहेगी।

कुछ देर बाद कुछ सोच कर वह बोला — “अगर तुम यही चाहती हो कि तुम अपने पति से अलग हो जाओ तो मैं तुम्हारी शादी खत्म किये देता हूँ। उसके बाद तुम आराम से दूसरी शादी कर सकती हो। पर सोच लो तुम सचमुच यही चाहती हो क्या?”

पत्नी बोली — “नहीं, मैं शादी तोड़ना नहीं चाहती। मैं चाहती हूँ कि वह भी मुझे ठीक से रखे और मैं भी उसको ठीक से रखूँ। हम दोनों प्रेम से रहें पर ऐसा हो ही नहीं पा रहा है। इस समय हम दोनों परेशान हैं। ”

वह बूढ़ा आदमी बोला — “तब मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकता हूँ। मैं एक ऐसी दवा तैयार कर दूँगा जिसको पी कर वह एक अच्छे पति में बदल जायेगा। ”

पत्नी खुशी से चिल्लायी — “तो फिर तुम उसे जल्दी से जल्दी तैयार कर दो न। ”

बूढ़ा बोला — “मैं तो उसको इसी समय तैयार कर देता पर उसमें पड़ने वाली एक खास चीज़ मेरे पास नहीं है। मैं अब उस चीज़ को लाने के लिये काफी बूढ़ा हो गया हूँ सो अगर तुम वह दवा बनवाना चाहती हो तो तुम्हें ही उस चीज़ को लाना पड़ेगा। ”

पत्नी ने बड़ी उत्सुकता से पूछा — “क्या है वह चीज़? मैं उसको आज ही ला देती हूँ। ”

बूढ़ा बोला — “मुझे शेर की मूँछ का एक बाल चाहिये तभी वह दवा काम करेगी। ”

यह सुन कर तो वह कुछ सोच में पड़ गयी। उसने अपना नीचे वाला होंठ काटा फिर कुछ सँभल कर बोली — “ठीक है मैं उसको लाने की कोशिश करती हूँ। ”

अगली सुबह पत्नी ने कच्चे माँस का एक बहुत बड़ा टुकड़ा लिया और नदी के किनारे उस जगह चल दी जहाँ अक्सर शेर पानी पीने आया करते थे।

उसने वह माँस का टुकड़ा अपने छिपने की जगह से थोड़ी दूर पर रख दिया और वह खुद एक पेड़ के पीछे छिप कर शेर के वहाँ आने का इन्तजार करने लगी।

कई घंटों के इन्तजार के बाद एक शेर उधर पानी पीने आया। उसको कच्चे माँस की खुशबू आयी तो उसने इधर उधर देखा। माँस का एक टुकड़ा उसको पास ही पड़ा दिखायी दे गया। उसने उसको दो तीन बार सूँघा और एक ही बार में खा गया।

खा कर उसने अपना बड़ा सा सिर ऊपर उठाया। उसको पता चल गया कि कोई आदमी वहाँ था। शेर को अपने इतने पास देख कर पत्नी की साँस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी पर वह साँस रोके वहीं बैठी रही।

शेर ने भी इधर उधर देखा पर फिर जंगल की तरफ वापस चला गया और गायब हो गया। अगले दिन पत्नी ने फिर वही किया।

अब की बार उसने एक और बड़ा सा कच्चे माँस का टुकड़ा लिया और वहीं नदी के किनारे ला कर रख दिया और खुद पेड़ के पीछे छिप गयी।

आज शेर जल्दी ही आ गया। उसी तरह से उसने वह माँस का टुकड़ा खाया, पानी पिया और चला गया। कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा।

दिन हफ्तों में बदल गये। रोज वह पत्नी अपने छिपने वाली जगह से निकल कर शेर के पास और और ज़्यादा पास आती गयी।

एक महीने बाद तो वह शेर के बिल्कुल पास बैठ गयी और शेर को माँस खाते देखती रही। उसके हाथ काँप रहे थे पर उसने हाथ बढ़ा कर शेर की मूँछ का एक बाल नोच लिया।

उस बाल को हाथ में पकड़े पकड़े वह वहीं जमी हुई सी बैठी रह गयी जब तक शेर माँस खा कर वहाँ से चला नहीं गया।

शेर के जाते ही वह वहाँ से उठी और उस बूढ़े आदमी के पास भागी भागी आयी और चिल्ला कर बोली — “मैं ले आयी, मैं ले आयी। ”

जब उस बूढ़े ने उसकी कहानी सुनी कि वह कैसे शेर की मूँछ का बाल ले कर आयी तो वह तो दंग रह गया।

वह बोला — “तुमको अपने पति को बदलने के लिये जादू की कोई जरूरत नहीं है। तुम तो खुद ही इतनी बहादुर हो कि तुम ज़िन्दा शेर की मूँछ का बाल तोड़ कर ला सकती हो।

यह जो काम तुमने किया है इस काम के लिये चतुराई और बहादुरी दोनों की जरूरत होती है। क्या यही धीरज, बहादुरी और चतुराई तुम अपने पति को बदलने में इस्तेमाल नहीं कर सकतीं?”

“लेकिन वह दवा? क्या वह दवा ठीक से काम नहीं करेगी?”

बूढ़ा बोला — “शायद वह दवा काम कर जाये पर वह बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। मेरी बच्ची, मेरा विश्वास करो। तुम रोज अपने पति को यह जताओ कि तुम उसको कितना प्यार करती हो।

तुम उसकी उलझनों को बाँटो और उनको सुलझाने में सहायता करो। उसको ऐसा जताओ कि तुमको घर में उसकी जरूरत है। उसको भी बदलने के लिये थोड़ा समय दो और फिर देखो कि क्या होता है। ”

पत्नी यह सुन कर घर चली गयी और उस बूढ़े की सलाह मान कर काम किया। धीरे धीरे उसका पति उसके पास वापस लौट आया।

अब वह भी खेत पर से दूसरे लोगों के साथ ही वापस लौट आता था। वह अब अपनी पत्नी को देख कर बहुत खुश होता था। कुछ महीनों के अन्दर ही उनकी ज़िन्दगी पहले जैसी हो गयी।



[1] Lion’s Whisker - folktale from Kush, Liberia, West Africa. Adapted from the Web Site :

http://africa.mrdonn.org/lion.html

[A similar story is told and heard in Ethiopia too. It may be read in my “Ethiopia Ki Lok Kathayen-2” book given under the title “Ek Aurat Aur Ek Sher”]

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के  लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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