विचारों को संयमित करें // डॉ. हरीश सम्यक

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मुझे झूठ बोलने से डर लगता है। वास्तव में होता क्या है ?यहां अक्सर ऐसा ही होता है कि अगर मैं झूठ भी बोल दूं तो वह सच हो जाता है। ऐसा एक बार न...

मुझे झूठ बोलने से डर लगता है। वास्तव में होता क्या है ?यहां अक्सर ऐसा ही होता है कि अगर मैं झूठ भी बोल दूं तो वह सच हो जाता है। ऐसा एक बार नहीं पिछले तकरीबन 5 साल से ऐसा मेरे साथ हो रहा है और मैंने झूठ बोलने से बचने के बहुत प्रयास किए हैं।

अक्सर जीवन में ऐसा नहीं होता कि हम हर बार सच बोलते हैं। ये भी एक तथ्य है कि जीवन में हर समय हर किसी के साथ सच बोलना कोई आसन काम नहीं है। कोई नाराज न हो या किसी को कोई दुःख न पहुंचे या फिर किसी को हौसला देने के लिए कई बार आपको झूठ का सहारा लेना ही पड़ता है। प्रेम संबंधों में ,विवाह संबंधों में या फिर अपने आफिस या बिजनिस के कामों में सब कुछ ठीक रखने के लिए आपको झूठ भी बोलने पड़ते हैं। इस सच से इनकार करना मुश्किल है और हम में से शायद कोई इस बात से अछूता रह पाया हो। ईमानदारी से अपने आपसे ये बात पूछ कर देखिये क्योंकि अपने आप को शायद हमसे बेहतर कौन जान सकता है ?

कोई बहाना या किसी के साथ जाने से बचने के लिए या कोई ना कोई इनकार करने के लिए हमें झूठ बोलना ही पड़ता है ,तो ऐसी अवस्थाओं में मेरे साथ अक्सर ऐसा हुआ है कि जब मैं झूठ बोलता हूं तो सच हो जाता है वैसे ही हो जाता है मान लीजिए कि मेरे दोस्त ने कहा कि क्या तुम घर में हो?, तो मैं कहता हूं नहीं मैं बाहर हूं ,और पूछता कि तुम कहां हो तो मैं किसी शहर का नाम ले देता हूं, बाद में होता क्या है कि मुझे गाहे-बगाहे उस शहर की ओर जाना पड़ता है। कोई ना कोई कारण बन जाता है तो यह एक प्रकार का भ्रम है या कोई ऐसा तथ्य कह लीजिए जो जीवन में लगातार पक्का होता जा रहा है।

तो इसको ठीक कैसे किया जाए??? मैंने यह सोचना शुरू किया कि क्यों ना कुछ ऐसे झूठ बोले जाएं जिन्हें बोलने से हमें अप्रत्याशित लाभ प्राप्त हो सकें। हमें यह लगता है कि यह होगा नहीं यह जीवन में हो नहीं सकता ,तो क्यों न इस प्रकार के झूठ बोले जाए जैसे कि

मैं बहुत सफल हो रहा हूं

मेरी तरफ बहुत पैसा आ रहा है

मैं अच्छी सेहत का मालिक हूं

मुझे किसी प्रकार का कोई रोग नहीं है

मेरे जीवन की सारी आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं

परमात्मा की मेरे ऊपर बड़ी कृपा है

सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं

सभी लोगों के बीच मेरी बहुत इज्जत है

तो क्यों न इस तरह की बातें कही जाए क्योंकि आपके कथन तो सच हो रहे हैं ,इस बात पर विश्वास करना ही होगा। मेरे मामले में अगर मैं इस तरह की बातें करता हूं तो वाकई देर सवेर चीजें और हालत सुधर रहे है ,सच हो रहा है आपको बोला हुआ झूठ तो मुझे लगता है कि झूठ को सकारात्मक ढंग से बोलना चाहिए।

क्यों ना अच्छी चीजें ही कहीं चाहे??

क्यों ना दूसरों के बारे में अच्छी बातें ही सोची जाएं??

और अपने आप को प्यार किया जाए। अपनी बुराइयों को या अपने को दोष देने के बजाय...

क्यों ना अपनी अच्छाइयों के बारे में बात की जाए।

जैसे कि मैं बहुत अच्छा हूं ,

मैं तंदुरुस्त हूं ,

मैं यह काम कर सकता हूं ,

और इससे अच्छा अगर आप यह कहे कि मैंने फलां सफलता या चीज प्राप्त कर ली है ,चाहे अभी वास्तव में प्राप्त नहीं की, लेकिन अपने दिमाग को यह संकेत देना कहीं ना कहीं आपको एक बड़ा भरोसा देता है कि ,हां यह चीज मैंने पा ली है। यह चीज मेरी जिंदगी में हो गई है| मेरे जीवन बहुत सारी खुशियां आ रही है, और मेरे जीवन में सारी जरूरतें हैं पूरी हो गई हैं।

आपको किसी आर्थिक सहायता की जरूरत है या आप किसी समस्या में फंस गए हैं तो अगर आप अपने दिमाग को लगातार यह संकेत देते हैं कि मैंने अपनी आर्थिक समस्या को दूर कर लिया है और उसे दूर करने के लिए हर संभव सहायता मुझे मिल चुकी है और इसी प्रकार की समस्या को लेकर आप यह सोचते हैं कि यह समस्या हल हो गई है घबराने की जरूरत नहीं है। आपके अंदर एक विश्वास और सुकून पैदा होता है जो आपको समस्या के संभावित हल की ओर भी ले जाता है। अपने दिमाग को जब आप साकारात्मक संकेत देते हैं तो कहीं ना कहीं आपके अंदर सकारात्मकता पैदा होती है आपके दिमाग को सुकून मिलता है। उसी तरह की जो शांति है वह पूरे शरीर में फैल जाती है और आप कहीं ना कहीं एक विश्वास प्राप्त कर लेते हैं। मुश्किलों को आसान महसूस करते हैं और जब आप लगातार इन सारी चीजों को सुबह उठ या रात को सोते समय या दिन में आप दोहराते हैं तो सच मानिए कि यह चीजें आप की ओर अग्रसर होने लग जाती हैं। आप की ओर आने लग जाती हैं इसे आप अपने जीवन को अपने शरीर को अपने मस्तिष्क को एक चुंबकीय प्रभाव के अधीन भी कह सकते हैं कि आपका शरीर और मस्तिष्क ऐसा है कि जैसा हम सोचते हैं वैसा ही जिंदगी में होना शुरू हो जाता है।

सच मानेंगे कि विचार जो आपके दिमाग में चलते हैं सारा दिन यहां आप जैसा लोगों के बारे में या अपने बारे में सोचते हैं वैसी ही अनुभूति और प्रतिक्रियाएं होने लग जाती हैं। मान लीजिये आप कहीं जा रहे हैं ,आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार का भय है, यां इस तरह की तस्वीरें बन रही है कि कोई दुर्घटना ना हो जाए, कोई मेरे साथ अप्रत्याशित घटना ना हो जाए या मेरी बेइज्जती ना हो जाए या पता नहीं मैं वहां पर अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगा या नहीं कर पाऊंगा ??इस तरह की संभावना है जब आप अपने दिमाग में पैदा करते हैं, सोचते हैं, तो कई बार उस तरह की स्थितियां पैदा हो जाती हैं, तो क्यों ना हम इस तरह के संकेत स्वयम को देना शुरू करें कि जहां भी हम जा रहे हैं ,वहां एक सुखद यात्रा होगी और सब हंसी खुशी वहां पर पहुंचेंगे और बहुत सी सफलता में प्राप्त होगी, बहुत सारा आदर हमें प्राप्त होगा, और वहां हम एक प्रसिद्ध वक्ता के तौर पर या  प्रसिद्ध व्यक्ति के तौर पर स्थापित होंगे।

इस तरह हमारे जीवन में एक नई और सुखद प्राप्ति जो है ,वह और जुड़ जाएगी। मुझे लगता है कि हमें सोचना चाहिए, जब हम अच्छा सोचते हैं तो हम अच्छी बातों को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं|

मैं सोचता हूं कि इस मामले में हमें अपने विचारों को काफी सहजता से सोचना चाहिए या उनके ऊपर कार्य करना चाहिए| हम खाली बैठे हो या कोई काम कर रहे हो या हम सोने से पहले कुछ सोच रहे हो तो उस समय हमारे विचार सकारात्मक हो ,समस्या के बीच भी हम ये माने कि हमने समस्या हल कर ली है और सब कुछ सुखद अंत की और बढ़ चला है।

हमारे विचार बहुत स्वस्थ हो। हमारे विचार बहुत ही रोमांचकारी हो| बहुत ही शांतिमय हो| दूसरों की और अपनी भलाई के लिए प्रकट किए गए हो| चाहे मेरे दिमाग में हो या हमारी जबान पर ,हम किसी से फोन पर बात भी कर रहे हो, या किसी और आमने सामने बात कर रहे हो ,तो हमें नकारात्मक बातों से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार का कोई मन में जलन या क्या द्वेष ना हो किसी प्रकार की कोई निराशा दूसरों को लेकर ना हो या किसी प्रकार की हीन भावना हमारे मन में पैदा ना हो| ये समय ऐसा होता है बहुत से नकारात्मक विचार और संदेह भी आपके मन में बार आ रहे होते है पर आपको इनसे लड़ने की बजे अच्छे और सुखद विचारो को भी लगातार अपने मन मस्तिष्क में जिलाए रखना है।

वैसे तो आजकल की जिंदगी में हर व्यक्ति इस तरह की सोच से बच नहीं पाता है ,वो समाज में रहता है ,उसे क्रोध भी आता है उसे गुस्सा भी आता है ,उसे लोगों से ईर्ष्या भी होती है| कई बार वह अपनी सफलता को लेकर निराश भी होता है और उसे संघर्ष करना पड़ता है पर एक बात दूसरी भी है कि अगर हम लगातार इस तरह के अच्छे संकेत अपने दिमाग को दे या अपने आप को एक आत्मविश्वास से लबरेज रखें कि हाँ मैंने ये कर लिया है और मैं सफल हो गया हूँ तो

हम सफल होंगे और हमें होना ही है और हम हो गए और हमें सब कुछ मिल गया है| लोग हमें प्यार कर रहे हैं और मैं बहुत ही प्यारा इंसान हूं| मैं अगर दूसरों को प्यार करता हूं तो वह भी मुझे प्यार कर रहे हैं , ईश्वर मेरे साथ है और मैं सफल हो रहा हूं।

मैं सब कुछ प्राप्त कर रहा हूं मेरा परिवार मेरे साथ है और मेरे परिवार में मैं दूसरों के साथ बहुत ही प्यार से पेश आ रहा हूं तो मुझे लगता है कि इस तरह की बातें आपके जीवन में होना शुरू हो जाएंगी। आरोग्यता और प्रसन्नता आपके जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन जाएगी।

ये एक तथ्य है जिस प्रकार आप सोचते हैं उस प्रकार की सोच आपके दिमाग में कहीं ना कहीं आपके अवचेतन में घर कर जाती है। क्योंकि जिंदगी एक लंबी प्रक्रिया है। बचपन में बहुत सी यादें या घटनाएँ है जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं| कई बार वह अच्छे कारण भी हो सकते हैं और बुरे कारण भी हो सकते हैं। लेकिन हम अपने बुरे वक्त को या बुरी यादों को बार-बार दोहराते रहे, बार-बार याद करते रहे तो उससे समस्या का हल नहीं होता है बल्कि समस्या और भी गंभीर हो जाती है,हम कई अनचाहे रोगों का शिकार हो जाते हैं , तो इसको लेकर हमें इस प्रकार का उपक्रम करना चाहिए या इस प्रकार का उपाय करना चाहिए कि हम उन बातों को भूलकर अच्छी यादों को या अच्छी घटनाओं को याद करे।

जैसे कई बार क्या होता है कि जब हम बहुत ही मुसीबत में हो या किसी बात को लेकर बहुत परेशान हो तो इसके ऊपर एक जादुई प्रयोग यह है कि आप उस समय ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को याद करें ,जिसने आपको या  आपने जिसे बहुत ज्यादा प्यार किया हो। जो आपके जीवन में बहुत ही ज्यादा आपको अच्छा लगता हो| आप उसे याद करें। उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा याद करें तो आप बहुत ही ज्यादा हल्का महसूस करेंगे और आपको बहुत ही शांति महसूस होगी| आपके मन में जब इस प्रकार की शांति फैलती है तो वह समस्या के हल के लिए सुझाव भी अपने आप आपकी तरफ आना शुरू हो जाते हैं। याद कीजिये आर्केमीडीज के ‘यूरेका ‘ को। उसने भी स्वयं को एक पानी के टब में विचार हीन छोड़ दिया था कि तभी सही उत्तर का संकेत उसे मिल गया। कोई ना कोई उपाय दिमाग ढूंढना शुरू कर देते हैं ,जब आप विचारों से लड़ना छोड़ देते है , बीएस उन्हें होने देते हैं। आपका दिमाग जो है वह एक अच्छा काम करता है और अपने आप आपको आपके ही द्वारा समझे अर्जित किये गए संकेतों में से निकलकर अच्छे संकेत देता है।

इसलिए अपने विचारों को संयमित करना अपने विचारों को या सोच को सकारात्मक करना, अपने विचारों को अच्छे विचारों से भर लेना, यह एक सुंदर जीवन जीने की कला है। सुबह उठकर या दोपहर में या शाम को हमें इस तरह की घटनाओं को या लोगों को या बातों को सुनना जानना पढ़ना चाहिए जो हमें सकारात्मक सोच के लिए अग्रसर करें| जो नकारात्मक चीजें हैं छोड़ दीजिए। जानने का अर्थ क्या है ? यही है कि हमें यह जानना है कि हमें कौन सी ऐसी चीज है जिन को हमें छोड़ना है। तो अपने आप हमें वह चीजें प्राप्त हो जाएगी जो हमें प्राप्त करना है| जीवन एक ऐसी परीक्षा है जहाँ सभी सवाल हल करने की जरूरत नहीं क्योंकि नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था भी है। तो सभी सवाल हल करने के चक्कर में सही भी गलत हो जाते है। जब जीवन थोड़े सवालों के हल से ही सही हो सकता है ,सफलता प्राप्त कर सकता है तो हम क्यों अपना धैर्य खोएं। हम ज्यादातर ऐसी चीजों को पकड़ रखते हैं ,ऐसी चीजों पर उलझे रहते हैं जो हमें दुखी करती हैं| हमें परेशान करती हैं, तो हमें उन चीजों को छोड़ देना चाहिए| हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए जीवन में अच्छी चीजों को पकड़ने की। कोशिश करेंगे तो जरुर सफल होंगे। जीवन लगातार प्रयोगों पर ही आधारित है तो क्यों न प्रयोग किए जाएं| एक ही ढर्रे पर जीवन को घसीटते रहने का क्या लाभ ?? जीवन को अच्छे दोस्त दिए जाएं, अच्छे विचार दिए जाएं, अच्छी किताबें दी जाएं ,अच्छे विचार या अच्छे वक्ता दिए जाएं| हम अच्छा संगीत सुनें| जरूरी नहीं है कि हमारे पास अवसाद का संगीत ही सुनने के लिए हो| चाहे हम सड़क जा रहे हैं ,टीवी देख रहे हैं तो बहुत कुछ है जो देखने लायक नहीं होता है। जिसे देखने से आपका मन विचलित होता है, आप उग्रता की और बढ़ते है तो इसे छोड़ दें, चैनल बदल दें।

इसके लिए सबसे जरूरी काम है अपने जीवन के प्रति अपने शरीर के स्वास्थ्य के प्रति और जो भी आपके पास है उसके प्रति ,आभारी होना| धन्यवादी होना| भविष्य में आपको क्या मिलेगा या नहीं मिलेगा ,आगे की बात है लेकिन वर्तमान में जो आपके पास है ,चाहे आपके पास आपका शरीर पूरा सवस्थ अवस्था में आपके पास है| आप रोग हीन है तो यह भी आपकी उपलब्धि है आपका सबसे अनमोल खजाना है। किसी प्रकार का आपको कोई लाभ हो रहा है, आपको कोई अच्छे दोस्त मिल रहे हैं ,कोई अच्छी सलाह मिल रही है यह भी आपके लिए एक प्राप्ति है ,एक सफल प्राप्ति। तो इसे आप को त्यागना नहीं चाहिए| इसके लिए आभारी होना चाहिए| धन्यवाद देना चाहिए|

चीजों की आलोचना करने की बजाय हमेशा दूसरों की अच्छाई को बताने में ज्यादा रुचि लेनी चाहिए। इस प्रकार हमारा जीवन जो है वह बड़ा सफल होगा मन बड़ा हल्का होगा और दिमाग में शांति भरी होगी| प्रसन्नता महसूस होगी क्योंकि मुस्कुराने के लिए कोई ज्यादा आपको बल नहीं लगाना पड़ता। आप मुस्कुराइए, दूसरे को देख कर मुस्कुराए| उन्हें धन्यवाद कहिए ,प्रशंसा के दो शब्द कहिये। गर्मजोशी से हाथ में मिलाइये। आसान सी चीजें हैं जो आप बड़ी आसानी से कर सकते हैं। एक दूसरे को आदर देना, एक दूसरे की बात को सुनने की कोशिश करना और एक-दूसरे से हंसते मुस्कुराते हुए मिलना। बस इतना सा ही करना है आपको। अपने काम को पूरी प्रसन्नता से करिए उसे इन्जाय कीजिये।

आप सोचिए कि सुबह से लेकर शाम तक जहाँ गए ,जहां आप बैठे , चाहे आप स्टेशन पर गए चाहे आप बस स्टैंड पर गए, आप दफ्तर में गए यां आप ट्रैफिक में फंसे हुए थे तो आपने किस प्रकार ट्रैफिक को पार किया| किस प्रकार दिमाग में शांति बनाए रखी और किस प्रकार रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर लगे हुए जाम में आपने आप अपने आप को नियंत्रित रखा| खुशनुमा रखा ,अच्छे संगीत को सुनते रहे,गुनगुनाते रहे , अच्छे लोगों को देखते रहे। लोगों की तरफ देखकर आपने मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन किया ..... तो यह बड़ी आसान सी चीजें हैं। क्योंकि हम जो देते हैं हमें वही प्राप्त होता है|

दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो नकारात्मकता से भरे हुए हैं लेकिन मेरा अनुभव यह रहा है कि अगर हम नकारात्मक लोगों को भी हंसी खुशी मिले और उनका धन्यवाद करते रहे। उनकी प्रशंसा कर दे, एक बार तो उनके ऊपर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगले दिन से ही वह आपका भी धन्यवाद करना शुरू कर देते हैं आपकी तरफ नरम होना शुरू कर देते हैं और आपके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।

नाम

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रचनाकार: विचारों को संयमित करें // डॉ. हरीश सम्यक
विचारों को संयमित करें // डॉ. हरीश सम्यक
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