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अधखुली आँखें (कहानी)

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रवि सुमन

1.
मिठनपुरा, जुब्बा सहनी पार्क के पास, मिस्कॉट लेन नंबर- 6.. उस हलचल भरी भयानक सुबह को लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। उस सुबह फिर एक आत्महत्या... नहीं- नहीं एक हत्या को अंजाम दिया गया था।
रस्सी का दबाव गर्दन के जिस हिस्से पर था, गर्दन वहाँ से टेढ़ा हो गया था। दोनों होठ फूल के अपने वास्तविक आकार के दोगुने दिख रहे थे और उसका मोटा जीभ दोनों होंठो के बीच फँसा था। चेहरा सूख गया था और आँखें.. आँखें अभी भी आधी खुली हुई.. शायद किसी के इंतजार में..


उसकी अधखुली आँखों ने मुझे अपनी ओर खींचा.. उन अधखुली आँखों में एक बार झाँक लो तो सारी सच्चाई का पता चल जाए। अब भी हर आते- जाते लोगों में उसकी अधखुली आँखे किसी को ढूंढ रही थी.. उसकी आँखें सिसक- सिसक कर कह रही थी.. किसी ने उसे खबर दी क्या.. अरे जल्दी करो उसे बताओ कि मैं मर गया हूँ.. जब उसे पता चलेगा न तो वो दौड़ते हुए आएगी और मेरे सीने पर मुक्के मार- मार कर मुझे जगाएगी.. उसे अंतिम बार देख भर लूँ तो.. मरना सफल हो जाएगा.. जल्दी करो उसे बताओ कि कोई उसके सपनों के साथ आज खुद एक सपना हो गया है..
अब कौन समझाए इन अधखुली आँखों को.. और राकेश जैसे उन हजारों लड़कों को जो अपने सपनों को बेरंग होता देख बावला हो जाते हैं और लटक जाते है फंदे से ऐसे ही लेन नंबर- 6 जैसी किसी गली के किराए के छोटे- से कमरे में..
देश में इनके जैसे सैकड़ों लड़के रोज ऐसे ही कहीं बन्द कमरे में नसें काट लेते हैं, सल्फास चाट जाते हैं या किसी ऊंची इमारत से छलांग लगा देते हैं..
अब कौन समझाए इन्हें या कौन समझाए मुझे कि इनके मरने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता.. एक दिन स्थानीय समाचार- पत्र के कोने में परिवर्तित नामों के साथ थोड़ी- सी जगह.. और लोगों के लिए हप्ते भर के मसाले का जुगाड़.. इस से ज्यादा कुछ नसीब नहीं होता इनकी अधखुली आँखों को। तरह- तरह की कहानियाँ बनाई जाती हैं पर इनका पक्ष जानने की किसी को भी जरूरत महसूस नहीं होती..
कौन समझाए इस अधखुली आँखों को.. जिसके लिए वो शांत और ठंडा पर गया है.. वो आज मन- ही- मन अपनी आजादी मना रहा है। अरे, तुम उसकी नई जिंदगी के लिए बस एक तनाव थे और अब नहीं हो.. उसके लिए इस से अच्छी बात क्या हो सकती है।


चलो मान लिया कि तुम बहुत बड़े आशिक ठहरे और उसकी नई जिंदगी को खुश देखना चाहते थे पर उनकी खुशी का क्या जिन्होंने कल ही अपने एक दोस्त को बड़े गर्व के साथ बताया था कि उनका बेटा अब बड़ा समझदार हो गया है.. कल सुबह जब तुमने फ़ोन पर उनसे पूछा.. 'पापा तबीयत कैसी है' तो उन्हें लगा कि उनका बेटा अब उनकी चिंता करने लगा है और तुम्हारी आवाज सुनने मात्र से बुढ़ापे की उनकी सारी बीमारी दूर हो गई पर.. उन्हें क्या पता था कि ये आवाज अब वो दुबारा नहीं सुन पाएंगे.. और
उनकी खुशी का क्या जिनके लिए तुम्हारी सफलता- असफलता कोई मायने नहीं रखती थी, जिसे तुम तुम्हारी सारी गलतियों के साथ भी स्वीकार थे.. जिनके लिए तुम बस एक बेटे थे.. और
जो तुम्हें ऐसे टंगा देख खुद भी मर जायेंगे.. रोते हुए जिनकी साँसे अटकेगी.. बेहोशी आएगी.. दिल के दौरे पड़ेंगे.. और पूरी जिंदगी जिनकी आँखें तुम्हारे इंतजार में पत्थर हो जाएगी.. पर..
तुम नहीं आओगे..


हाँ, अब तुम नहीं आओगे...
अरे जिसके लिए मरे हो उसे तो लाखों मिल जाएंगे पर
उनका क्या जिन्हें खुद के मरने के दिन तक तुम्हारे मरने का भरोसा नहीं हो पाएगा..
अधखुली आँखों से मेरा सवाल- जवाब चल ही रहा था कि तभी हलचल बढ़ी.. सैकड़ों सवाल थे जो मैं अब भी उन अधखुली आँखों से चिल्ला- चिल्ला के पूछना चाहता था.. पुलिस ने कमरे की तलाशी लेनी शुरू की..

2.
सुसाइड नोट-
मम्मी.... पापा.... आई एम सॉरी...
मैं आपका अच्छा बेटा नहीं बन पाया... मैंने आपको हर मौके पर निराश ही किया है। आई एम सॉरी... पापा...
पापा मैं किसी लायक नहीं बचा हूँ.. मुझे पता है अगर मैं चाहता तो कुछ भी बन सकता था पर.. अब.. मन नहीं है.., पापा और अब तो दिमाग भी काम नहीं करता.. दिल और दिमाग के हर कोने पर तो रौशनी का बस हो गया है..
जब तक आप इसे पढोगे तब तक... आई एम सॉरी..


मुझे पता है, मैं मर के भी आपको बदनामी के अलावे कुछ नहीं दे पाउँगा.. मुझे ये भी पता है कि ये सब पढ़ के आपको बहुत बुरा लगेगा और आपको गुस्सा भी आएगा.. पर.. पापा.. मैं ऐसा ही हूँ.. मैं बाकियों जैसा नहीं हूँ..
मेरे बाद दुनिया मेरे बारे में जो भी समझे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन पापा मैं बुरा नहीं हूँ.. मैंने किसी की जिंदगी खराब नहीं की है और ना ही मैंने किसी को ब्लैकमेल किया है..
सॉरी, पापा मेरे कारण आपको पुलिस स्टेशन आना पड़ा.. लेकिन आप मुझे गलत समझो उस से पहले मैं आपको सब कुछ बता देना चाहता हूँ..
हमारा प्यार फिल्मी नहीं था। हमने काफी सोच- समझ के प्यार किया था। मैंने पहले ही दिन उससे बोल दिया था कि अगर पूरी जिंदगी साथ दे पाओगी तभी मेरी जिंदगी में आना.. नहीं तो प्लीज मुझे अकेले ही रहने दो..
मैं बहुत बड़ा ज्ञानी नहीं हूँ.. मेरे लिए प्यार का बस एक ही मतलब है किसी भी हाल में एकसाथ रहना.. बस.. इसके अलावे मुझे कोई प्यार समझ में नहीं आता।
उसने वादा भी किया था कि चाहे जो हो जाए, वो सब को छोड़ देगी पर मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेगी..


चार साल से हम दोनों प्यार में थे.. या प्यार से कुछ ज्यादा... हम दोनों को एक दूसरे की आदत थी। सुबह उठो तो उसी से शुरू होता था और रात को उसी पे खत्म हो के सो जाता था.. मेरी तो पूरी दुनिया ही उसी पे शुरू और उसी पे खत्म हो जाती थी.. हम हर रोज मिलते थे.. इसी बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर उसका रूम है.. हर रोज प्रॉब्लम पूछने के बहाने वो मेरे कमरे में आ जाती थी फिर हमलोग खूब बातें करते थे..
मैं पूरी दुनिया से कट गया था.. मेरे लिए अब कुछ था ही नहीं रौशनी के अलावे। मैं अपना एक- एक पल रौशनी के नाम कर चुका था.. मैं अपने दोस्त, रिस्तेदार, अपने परिवार, सबसे दूर हो गया था.. रोम- रोम में बस रौशनी... रौशनी... बस रौशनी...


और इतना प्यार करता भी क्यूँ नहीं मैं.. वो भी तो मेरे बिना एक पल भी नहीं रह पाती थी। खाना खाया की नहीं.. पढ़ रहे हो या नहीं.. तबीयत ठीक है कि नहीं....
हल्का- सा सर में दर्द बोल देता तो पागल हो जाती थी.. लड़की तो दूर वो मुझे किसी लड़के के साथ भी देख लेती तो उसे बुरा लगता.. वो मुझे एक पल के लिए भी किसी और से बाँटना नहीं चाहती थी..
हमने सारी योजनायें बना ली थी.. उसने पहले ही बताया था कि शादी के लिए उसके घर के लोग नहीं मानेंगे तो हमलोग कोर्ट में शादी कर लेंगे..
एक पल के लिए भी हम दोनों एक दूसरे से दूर हो जाते तो लगता कि बेचैनी से मर जायेंगे..


तेरह तारीख को उसका भाई अचानक आया और उसे बिना कुछ बताए अपने साथ संतोषी माता के मंदिर ले गया जहाँ उसे देखने लड़के वाले आए थे..
मैं बिस का था और वो सत्रह की.. हम दोनों को शादी के लिए बालिग होने में अभी एक साल बाकी था.. इसलिए हमने अभी तक शादी नहीं की थी.. और अपने बालिग होने का इंतजार कर रहे थे ताकि हम अदालत तक जा सकें।
लड़के वालों ने रौशनी को पसंद कर लिया.. और उसी दिन रिश्ता पक्का हो गया..
मंदिर से आते ही रौशनी बिना कुछ बताये अपने भाई के साथ घर चली गयी.. फ़ोन भी बंद आने लगा..
दो दिन में ही मैं पागल- सा हो गया.. कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था.... पर मुझे पूरा भरोसा था कि वो जरूर आएगी..
फिर तीसरे दिन उसका फ़ोन आया.. उसने खुद मुझे उस लड़के का नंबर दिया और कहा कि मैं उससे बात करूँ और उससे बोलूँ की रौशनी मुझसे प्यार करती है इसलिए वो इस शादी के लिए मना कर दे और उसी ने कहा था कि अगर उसे भरोसा नहीं हो तो मैं उसे हमदोनो का साथ वाला कुछ फोटो दिखाऊँ और कॉल रिकॉर्डिंग सुनाऊँ..
और इस बात की कॉल रिकॉर्डिंग भी है.. जिसे मैंने पेन ड्राइव में स्टोर कर के इस नोट के पास ही रखा है।


साथ वाली दो तस्वीर और एक कॉल रिकॉर्डिंग के साथ एक छोटा- सा मैसेज मैंने उस लड़के के व्हाट्सएप्प पर भेज दिया... रौशनी का फोन फिर से ऑफ आने लगा और उस लड़के का भी कोई जवाब नहीं आया।
दो दिन बाद मेरे पास रौशनी के भाई का कॉल आया.. उसने मुझे भद्दी- भद्दी गालियाँ दी और धमकी भी.. मैंने उसे बहुत समझाया कि मैंने कोई जबरदस्ती नहीं की है बल्कि मैं और रौशनी एक- दूसरे से प्यार करते हैं और ये सब मैं अपने प्यार को बचाने के लिए कर रहा हूँ और रौशनी भी यही चाहती है..
उसी दिन शाम को रौशनी और उसका भाई एक पुलिस वाले के साथ आए.. डेरा मालिक के कमरे में मुझे बुलाया गया.. मैं वहाँ गया तो उस पुलिस वाले और उसके भाई ने मुझे धमकियाँ देनी शुरू कर दी.. उसने कहा कि मैं एक लड़की को ब्लैकमेल और बदनाम कर रहा हूँ..
जब मैंने बताया कि मैं और रौशनी चार साल से एक-दूसरे से प्यार करते हैं और शादी भी करना चाहते है तो वे बौखला गए और मुझे मारना शुरू कर दिया.. मैंने रौशनी की ओर देखा और बोला की तुम बताती क्यों नहीं की तुम भी मुझसे प्यार करती हो..


मुझे नहीं पता रौशनी के साथ क्या हुआ था.. उसने कहा कि नहीं मैं आप से प्यार नहीं करती हूँ.. ये सब झूठ है.. आप मुझे बदनाम क्यों कर रहे है.. मुझे कुछ भी समझ नहीं आया और मैंने अपनी बात साबित करने के लिए सबको हम दोनों के साथ वाला फोटो दिखाया और कॉल रिकॉर्डिंग सुनाया और सबको बताया कि रौशनी सच में मुझसे प्यार करती है.. अभी वो झूठ बोल रही है शायद कोई दवाब हो उसके परिवार वालों की ओर से..
इस पर झट- से रौशनी ने कह दिया कि ये सारे फोटोज मैंने उसके साथ जबरदस्ती खिंचवाए हैं और फोन पर भी वो मुझसे बात करती थी क्योंकि मैं उसे धमकी देता था..
एक पल में उसने मुझे अपराधी बना दिया.. उन लोगों ने फिर से मुझे धमकी दी कि अगर मैंने फिर किसी को फोटो दिखाया या कॉल रिकॉर्डिंग सुनाया तो वे लोग मुझ पर केस कर के अंदर कर देंगे..
मैं पागल हो गया.. मेरे लिए सारे रास्ते बंद हो गए.. मैंने दुबारा उस लड़के को मैसेज किया और सारे फोटोज दिखाया और कॉल रिकॉर्डिंग भी सुनाया ताकि उसे पता चल सके कि इतना कुछ कोई किसी के साथ जबरदस्ती या धमकी देकर नहीं कर सकता.. पर बात नहीं बनी और आपको पुलिस स्टेशन बुलाया गया..


मेरा मकसद किसी को ब्लैकमेल करना या बदनाम करना नहीं था, मैं तो बस रौशनी को खोना नहीं चाहता था.. ऐसा करने से रौशनी दुनिया की नजर में बदनाम जरूर हुई.. पर मैं किसी भी कीमत में बस अपने प्यार को मुक्कमल करना चाहता था..
अगर हम किसी के साथ उसकी मर्जी से कुछ करते हैं तो वो प्यार कहलाता है.. लेकिन जब इस में जबरदस्ती या धमकी शब्द जुड़ जाए तो ये रेप या अपराध कहलाता है.. मेरे सर पे एक रेपिस्ट और एक अपराधी का टैग लग गया था..
मैं अपने- आप में घुटने लगा था.. मैं जब बाहर निकलता तो मुझे लगता कि सारे लोग मुझे ही घूर रहे है और मन- ही- मन मुझे भद्दी-भद्दी गालियाँ दे रहे हैं.. मैं किसी भीड़ में जाता तो मुझे लगता कि सब मुझ-से डर के अलग भाग रहे हैं..
पापा, हमने इस जिंदगी की सारी प्लांनिग कर ली थी.. रौशनी के बिना अगर पूरी दुनिया भी जीत लेता तो भी उसका कोई मतलब नहीं होता क्योंकि सच यही था कि मैं खुद को हार चुका था.. रौशनी के बिना इस जिंदगी का कोई मतलब ही नहीं था..


एक रेपिस्ट या एक अपराधी के टैग के साथ सब कुछ फिर से शुरू करने और दर्द के उसी दौर से गुजरने से बेहतर लगा कि भाग जाऊँ.. और इस तरह मैं हार गया.. और भाग गया..
लेकिन पापा आप रौशनी से नफरत मत करना इन चार सालों में रौशनी ने मुझे जिंदगी के सारे रंग दिखाए हैं..
अपने मम्मी-पापा की नजरिए से अगर उसने खुद को एक अच्छी लड़की साबित करने की कोशिश की तो इसमें गलत क्या है.. देखना जब उसे पता चलेगा न कि मैं मर गया हूँ तो वो दौड़ते हुए आएगी और चिल्ला-चिल्ला के सब को सच बताएगी.. फिर पूरी दुनिया को पता चल जाएगा कि रौशनी भी मुझसे प्यार करती है..
काश, उस सच वाली रौशनी और उस दिखावे वाली रौशनी में सच वाली रौशनी जीत जाती तो आज ये नौब्बत न आती..
मुश्किल है पापा, अब मेरे लिए एक भी पल जीना मुश्किल हो गया है.. रात-रात भर सो नहीं पाता.. कभी- कभी लगता है कहीं मैंने सच में किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की है..
अब मैं जा रहा हूँ पापा, अपना और मम्मी का ख्याल रखना और .. बस एक अंतिम बार मुझपे भरोसा करना पापा की बेशक मैं कमजोर नहीं था पर.. भरोसा करो इस बात का की मेरे पास कोई दूसरा उपाय न था... जिंदगी मतलब रौशनी..

3.
तीन महीने बाद (मैं- लेखक)
उस दिन राकेश की अधखुली आँखों से सैकड़ों सवाल पूछना चाहता था.. पर आज जब मैंने खुद राकेश को जिया है.. हर आँखें अधखुली लगती हैं..
मैंने खुद को आईने में देखा और पाया कि मेरी आँखें अधखुली हो गयीं हैं, वो सैकड़ों सवाल मर गए हैं.. और बस एक बात दिलो- दिमाग में है कि 'हाँ, हमारे पास कोई उपाय नहीं था, सब कुछ फिर से शुरू करने और दर्द के उसी दौर से गुजरने से बेहतर था भाग जाना'..


अस्पताल से आए कई दिन हो गए हैं.. कमरे से निकलना अजीब लग रहा है.. फेसबुक पर रौशनी का प्रोफाइल देखा.. रिलेशनशिप स्टेटस- मैरिड..
बैग उठाया और किसी से बिना कुछ बोले निकल गया..
वो रही.. उस खिड़की के पास खड़ी रौशनी.. उसकी आँखें.. अधखुली.. कई सवाल खुद से अपनी अधखुली आँखो में बयाँ करती हुई..
'काश, मैंने दुनिया को अपने नजरिए से देखा होता और उस दिन खुद को एक चरित्रवान लड़की साबित करने की कोसिस ना कि होती तो आज जिंदगी कुछ और होती.. वो सपने सच होते जो कभी हमने साथ में देखे थे.. कम- से- कम एक बार यही बोल देती की हाँ ये सब सच है.. मैं प्यार करती हूँ राकेश से तो शायद आज वो जिंदा होता..' रौशनी की अधखुली आँखें आत्मग्लानि से सिसक रही थी.. पर जो भी हो.. जिस हाल में भी हो.. उसकी अधखुली आँखें कम- से- कम जिंदा तो थी.. पर राकेश.. वो तो अब न था.. और ना ही उसकी अधखुली आँखें..


मोतिहारी जिले का एक छोटा- सा गांव.. राकेश का गांव.. एसबेस्टस वाली छत.. घर के अगले भाग में छोटा- सा बरामदा..
कुर्सी पर पीठ टिकाये.. जमीन की ओर देख रहे राकेश के पापा.. और वहीं जमीन पर बैठे रास्ता निहार रही उसकी माँ.. इनकी आँखें भी अधखुली.. शायद किसी के इंतजार में.. शायद इस उम्मीद में की ये कोई सपना हो और कुछ ही पल में सुबह हो जाए और लौट आए उनका बेटा और तब शुरू हो उनकी यथार्थ की दुनिया..


उनकी नजर मुझ पर पड़ी.. उन्होंने पहचान लिया मेरी अधखुली आँखों को.. उनकी पथराई हुई अधखुली आँखों ने मेरी अधखुली आँखों से संपर्क साधा और.. पूछा.. उस दिन तो तुमने कई सवाल पूछे थे राकेश की अधखुली आँखों से तो फिर क्या हुआ.. आखिर तुम राकेश क्यों हो गए.. मैंने देर नहीं की कह दिया उनकी अधखुली आँखों से.. राकेश ने खोया रौशनी और मैं खो बैठा अपनी रागिनी..
लौटते हुए मैं थक गया था.. सोच ही रहा था कि उस पेड़ के छांव में सुस्ता लूँ तभी एक अजीब सी आवाज आई और फिर.. उसी पेड़ से लटका पड़ा मिला एक और राकेश.. फिर से अपनी अधखुली आँखों में एक और अनकही और अनसुलझी कहानी लिए..


और अब भी जारी है मेरा सफर.. जिस सफर में हर मोड़ पर मिल जाता है मुझे कोई-न -कोई राकेश अपनी अधखुली आँखों में ये कहते हुए की 'भरोसा करो हमारे पास कोई उपाय न था, सब कुछ फिर से शुरू करने और दर्द के उसी दौर से गुजरने से बेहतर था भाग जाना'..

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