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लघुकथा // इज्जतघर // डॉ. नन्द लाल भारती

लघुकथा :इज्जतघर

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बधाई हो रोशनी बिटिया।

कैसी बधाई मम्मी। अभी तो रिजल्ट ही नहीं आया।

बिटिया बी.ए.का रिजल्ट नहीं आया, आ जायेगा, तुम अच्छे नम्बर से पास हो जाओगी। विश्वास है, कभी कोई परीक्षा फेल नहीं हुई हो अब क्या फेल होगी,अब तो तुम्हारा नसीब और प्रबल हो गया है।

कैसी नसीब मम्मी  ?

बेटी  बरसों की तमन्ना पूरी हो गई। तुम्हारे योग्य घर -वर जो  मिल गया।

मम्मी घर-वर के अलावा और कुछ देखा है क्या ?पापा से पूछ लेना।

और क्या देखना है रोशनी    ?

इज्जतघर मम्मी ।

बेटी समधी जी गाँव के प्रधान है, हवेली जैसा मकान है, दमाद जी सरकारी कालेज में प्रोफेसर है, इससे बड़ा इज्जतघर और क्या होगा।

ये इज्जतघर नहीं है मम्मी रोशनी बोली।

फिर कैसा इज्जतघर होता है बेटी।

शौचालय से बड़ा इज्जतघर क्या कोई हो सकता है मम्मी ?

डां नन्द लाल भारती

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