कथा साहित्य और मैं - गोवर्धन यादव

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तकरीबन ढाई-तीन दशक तक कविता की कुंज-वाटिका में रमण करते रहने के बाद मैंने कहानी जैसी कठोर भूमि पर चलने का दुस्साहस किया था. यह अनायास नहीं ब...

तकरीबन ढाई-तीन दशक तक कविता की कुंज-वाटिका में रमण करते रहने के बाद मैंने कहानी जैसी कठोर भूमि पर चलने का दुस्साहस किया था. यह अनायास नहीं बल्कि सायास हुआ था. होता यह था कि वरिष्ठ होने के कारण किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अथवा अध्यक्ष बना दिया जाता. काव्यपाठ में सहभागिता करने वाले मित्रगण अपनी कविता सुनाते और फ़िर लघुशंका का इशारा करते हुए अपनी जगह से उठ खड़े होते. और एक बार कमरे के बाहर कदम रखते तो फ़िर दुबारा लौटकर नहीं आते. एक तो यह कारण था और दूसरा यह कि उस समय तक मैं छॊटी-मोटी पत्र-पत्रिकाओं में शान से छप रहा था. मन में तरंग उठी कि किसी बडी पत्रिका में अपना भाग्य आजमाऊँ. मैंने एक आलादर्जे के संपादक (स्व) श्री प्रभाकर श्रोत्रिय जी के नाम, जो मेरे आदर्श रहे हैं, कुछ कविताएँ भेजी कि इसे अपनी पत्रिका में स्थान दें. जब उनसे प्रत्यक्ष भेंट हुई तो उन्होंने कहा कि अब इस तरह की कविताओं के दिन फ़िर गए हैं, यदि कोई अकविता लिखी हो तो भेजे, उसे स्थान जरुर मिल जाएगा.

आपको शायद याद होगा कि यह वह समय था जब कविता और अकविता के बीच एक अघोषित युद्ध चल रहा था. मैंने उसमें हाथ आजमाया लेकिन मैं उसमें सफ़ल नहीं हो पाया. ऎसा भी नहीं है कि मैंने उस तरह की कविताएं नहीं लिखी. लिखी जरुर लेकिन वे विष्णु खरे, लीलाधर मंडलोई, चन्द्रकांत देवताले, नईम अथवा मोहन डहेरिया जैसी तो बिल्कुल भी नही लिखी गई थी. मेरे लिए यह एक निराशा का समय था यह. फ़िर मैंने कहानी लिखने का मानस बनाया. मेरी पहली कहानी” एल मुलाकात” जो शुरु से ही एक रहस्य लिए हुए होती है जो अंत तक रहस्यमयी बनी रहती है. इसका नायक “समय” होता है, से अचानक मुलाकात होती है. वह मेरे बारे में सब कुछ जानता है और मुझसे कहता है कि मैं तेरा बचपन का साथी हूँ. लंबे समय तक साथ बने रहने के बाद भी मैं उसे पहचान नहीं पाता हूँ. कहानी के अंत में एक अप्रत्याशित घटना घटती है और वह सारे रहस्यों पर से पर्दा उठाता है. यह कहानी “कहानी” के क्षेत्र में अत्यंत सफ़ल कहानी रही. मुझे काफ़ी प्रशंसाएं मिली और अनेकानेक पत्र पाठकों से प्राप्त हुए. इस कहानी के सफ़लतापूर्वक लिखे जाने के बाद से मेरे मानस पटल पर छाया कुहासा छटने लगा था. इसके बाद मैंने पीछे मुडकर नहीं देखा.

मेरा पहला कहानी संग्रह “ महुआ के वृक्ष” पंचकुला हरियाणा से प्रकाशित हो कर आया. उस संग्रह पर लगभग पैंसठ समीक्षाएं मुझे प्राप्त हुईं. पाठक मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भोपाल से मेरे कथाकार मित्र श्री मुकेश वर्मा, श्री बलराम गुमास्ता श्री बलराम गुमास्ता, श्री मोहन सगोरिया, नागपुर से श्रीमती इंदिरा किसलय ने आकर उसे ऊँचाइयाँ दी. सभाग्रह में करीब ढाई सौ मित्रों की उपस्थिति रही. दूसरा संग्रह “तीस बरस घाटी” वैभव प्रकाशन रायपुर से प्रकाशित हुआ. इस संग्रह में मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिन्दी भवन भोपाल के मंत्री-संयोजक सम्मानीय श्री कैलाशचन्द्र पंतजी ने दो शब्द लिखे और इस संग्रह का विमोचन देश के प्रख्यात कवि-मंत्री-सांसद सम्मानीय श्री बालकवि बैरागीजी के हस्ते “हिन्दी भवन”भोपाल में हुआ. यह मेरे लिए अब तक की सबसे बडी सफ़लता थी. तीसरा कहानी संग्रह “ आसमान अपना-अपना” शैवाल प्रकाशन गोरखपुर में प्रकाशाधीन थी लेकिन किन्ही कारणों से प्रकाशित नहीं हो पायी. इसी बीच लगभग देढ़ सौ लघुकथाएं भी मैंने लिखी है और इसे पुस्तकाकार होने में समय लग सकता है. ( अपना-अपना आसमान और लघुकथाओं के संग्रह ई-बुक्स में प्रकाशित हो चुके हैं )इन लघुकथाओं पर भी माननीय श्री पंतजी ने अपना आशीर्वाद स्वरूप दो शब्द लिखकर दिया है. मेरी प्रायः सभी रचनाएं देश-प्रदेश की हर बडी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं है. इससे लाभ यह हुआ कि मेरे हर प्रांत में साहित्यकारों से प्रगाढ़ मित्रता स्थापित हो गई हैं. जगह-जगह से मुझे आमंत्रित किया जाता है और इस तरह करीब बीस से अधिक साहित्यिक संस्थाओं ने मुझे सम्मानीत किया है. इसका सारा श्रेय मैं दादा पंतजी को देना चाहता हूँ. अगर मेरा जुड़ाव राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से न हुआ होता तो शायद ही मैं इतनी ऊँचाइयाँ छू नहीं सकता था.

मित्रों, मैंने अब तक करीब तीस समीक्षाएं लिखी है. जब कहानी लिखने का मन नहीं होता है तो विभिन्न विषयों पर लेख-आलेख लिखता रहता हूँ. आज इन्टर्नेट का जमाना है, विभिन्न ईमेल पत्रिकाओं में इनका प्रकाशन होता रहता हैं. अब तो कुछ विदेशी ईमेल पत्रिकाओं में भी मेरी कहानियाँ, लघुकथाएँ लेख-आलेख प्रकाशित होते रहते हैं.मेरी अब तक 18 पुस्तकें ई-बुक्स में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनका विवरण इस प्रकार से है-

18 ई-बुक्स तथा उनके लिंक सहित.

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पी़डीएफ ईबुक – गोवर्धन यादव का कहानी संग्रह - महुआ के वृक्ष http://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_670.html

पीडीएफ ई बुक : गोवर्धन यादव का कहानी संग्रह - तीस बरस घाटी http://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_969.html

पी.डी.एफ़. ई बुक- कहानी संग्रह-अपने-अपने आसमान https://archive.org/details/apna-aasman-kahani-sangrah

पीडीएफ ईबुक – गोवर्धन यादव का कविता संग्रह - बचे हुए समय में http://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_51.html

पीडीएफ ईबुक : गोवर्धन यादव का लघुकथा संग्रह http://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_627.html

कौमुदी महोत्सव - हमारे तीज त्यौहार - http://www.rachanakar.org/2015/03/blog-post_444.html

देश-विदेश की यात्राएं. https://hindi.pratilipi.com/govardhan-yadav/ghumakkadi- romanchit-kar-dene-waali-yaatraaye

समीक्षा-आलेख की ई-बुक्स https://archive.org/details/samiksha-goverdhan-yadav- solah

सभी आलेख—(1)दृष्य की अपेक्षा अदृष्य रहस्यमय होता है-(2)आलेख-मायावी दुनियां (3)अकेलेनहीं हैं हम - https://hindi.pratilipi.com/govardhan-yadav-1

https://hindi.pratilipi.com/govardhan-yadav

गरजते-बरसते सावन के बीच खनकते गीत और फ़िल्मी दुनियां तथा अन्य आलेख .https://archive.org/details/goverdhan-yadav-filmi-geet

हिन्दी-देश से परदेश तक तथा अन्य आलेख - https://archive.org/details/goverdhan-yadav-hindi-pardesh

कथा साहित्य में म.प्र. का योगदान तथा अन्य आलेख https://archive.org/details/goverdhan-yadav-katha- sahitya

दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन तथा अन्य आलेख. https://archive.org/details/goverdhan-yadav-matsya- puran

पर्यावरण पर केन्दीत विशेष आलेख. https://archive.org/details/goverdhan-yadav-paryavaran

कहानी पोस्टकार्ड की एवं अन्य आलेख.-https://archive.org/details/goverdhan-yadav-postcard

ऋषि परम्परा के प्रतीक एवं अन्य आलेख.- https://archive.org/details/goverdhan-yadav-rishi- parampara

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अन्य जरुरी दस्तावेज.

मेरी भूटान यात्रा.--http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

मारीशस के प्रख्यात साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का साक्षात्कार

http://www.rachanakar.org/2018/01/blog-post_5.html

न्युअर्सी अमेरिका की सुश्री देवी नागरानी जी से गोवर्धन यादव की बातचीत-

(1). http://www.rachanakar.org/2018/03/blog-post_89.html

(2) http://sahityakaronkiduniya.com/archives/1074

(3) https://samalochan.blogspot.in/2

कथा साहित्य में मध्यप्रदेश का योगदान

देश के ख्यातनाम कहानीकारों की कहानियों के अलावा प्रदेश के अनेक कहानीकारॊं को पढने का सुअवसर मिला है. पद्मश्री मान.श्री रमेशचन्द्र शाहजी, श्रीमती ज्योत्सना मिलन, गोविन्द मिश्रजी, रमेश दवेजी,श्रीमती मेहरुन्निसा परवेज जी, महेश अनघ, सूर्यकांत नागर, शशांक, भालचन्द्र जोशी, ए असफ़ल, राजेन्द्र दानी, ज्ञानरंजनजी, हरिभटनागर, तरुण भटनागर, अजीत हर्षे, स्वाति तिवारी ,उर्मिला शिरीष, उदयन बाजपेयी, युगेश शर्माजी, मालती शर्माजी, मालती जोशीजी, उदयप्रकाश, रामचरण यादव, रामसिंह यादवजी, डा.पुन्नीसिंहजी, अमरनाथजी, नवल जायसवाल जी, प्रभु जोशीजी, ध्रुव शुक्लजी, छिन्दवाडा के श्री हनुमंत मनघटेजी, दिनेश भट्टजी, राजेश झरपुरेजी, स्व. मनीषरायजी, आदि-आदि ,फ़ेहरिस्त काफ़ी लंबी हो सकती है. ये सारे कथाकार अपनी लेखनी के बल पर पूरे देश में जाने जाते हैं.

इन सबकी कहानियाँ जहाँ अपने काल का अक्स प्रस्तुत करती हैं वहीं वे समाज की विकृतियों को दूर करने का आगाह भी करती है. या यह कहें कि समग्र अर्थों में अपने युग की कड़वी सच्चाई को प्रस्तुत करने का सफ़ल कार्य कर रही हैं. माननीय रमेशचन्द्र शाहजी की कहानी “ अभिभावक” पश्चिमी माडल पर आधारित आज की शिक्षा प्रणाली, अभिभावकों की दोहरी मानसिकता और उच्च आकांक्षाओं के बीच पिसते बच्चो के बचपन का मार्मिक विवेचन करती है. आपकी लेखनी का जादू पाठक के दिल-दिमाक पर गहरा असर डालती है, वहीं आपकी शब्द संपदा, शब्द सामर्थ्य, चिंतन बोध, भाषायी सुचिता की बानगी देखते ही बन पड़ती है. निःसंदेश यह आपके धीर-गंभीर लेखन का परिणाम है. ज्योत्सना मिलनजी की कहानी “चीख के उस पार” प्रभावशाली है. उर्मिला शिरीष की कहानी “तमाशा” एकदम नए विषयवस्तु पर लिखी समाज की सच्चाई को बयां करती महत्वपूर्ण कहानी है. सम्मानीय श्री रमेश दवे की कहानी “भुल्लकड़” रिटायरमेंट पर लिखी कहानी है, उसी तरह आपकी एक कहानी “खबरें”आज के अखबारों में पसरी मानसिक उदासी को प्रस्तुत करती है. कि अब अखबार पढ़ने की चीज नही रह गयी है. कहानी का नायक अपनी पत्नि गायत्री से कहता है—“नहीं-नहीं गायत्री अब खबरें नहीं पढी जाती-अच्छा तो कल से अखबार बंद कर दो” काफ़ी गहरा असर पाठकों के दिल-दीमाक पर छोड़ती है. मालती जोशी की कहानी “विषपायी” बेटी-बेटे के बीच दृष्टिभेद पर लिखी मार्मिक कहानी है, जिसने समाज का बेडा गर्क कर दिया है. मेहरुन्निसा परवेज की कहानी “ अपने होने का अहसास” अंधविश्वास पर लिखी कहानी है. सूर्यकांत नागर की कहानी “विभाजन” तथा बेटियां” प्रभावकारी है. श्री ज्ञानरंजनजी की कहानी “पिता” पिता पर लिखी अब तक की तमाम कहानियों पर भारी पड़ती है. मंगला रामचन्द्रण की कहानी “मिन्नी बड़ी हो गई”-“भावनाएं अपाहिज नही होतीं,” “हम होंगे कामयाब”, श्री मुकेश वर्मा की कहानियां खेलणपुर तथा अन्य कहानियां में- साक्षात्कार, होली, न्यायाधीश, रात, अन्ना, कस्तवार प्रभावशाली है. इस पर मैंने समीक्षा भी लिखी थी.

साहित्य समाज का दर्पण तो है ही साथ ही वह एक ऎसा प्रकाश स्तंभ भी है जो समाज को दिशा देखाने का कार्य भी संपादित करता है. उसका कारण यह है कि साहित्य में जहाँ एक ओर जीवन के लिए आदर्शों की प्रस्तुति की गुंजाइश होती है, तो दूसरी ओर वह समाज में व्याप्त आनियमितताओं, विकृतियों, प्रतिकूलताओं रोजमर्रा की कशमकशताओं, उसमें बिंधी इच्छाएं, आकांक्षाएं, विस्मृतियों, विडम्बनाओं, उत्पीडन, तथा अन्यान्य बुराइयों पर प्रहार करने का माद्दा भी होता है.

जहाँ तक समकालीन कहानियों का प्रश्न है तो इस समय की कहानियां समग्र अर्थों में अपने युग की कडवी सच्चाई को प्रस्तुत करने का सफ़ल कार्य कर रही है, वह आम आदमी के पक्ष में खडी दिखाई देती है. वर्तमान समय में जहाँ चारों ओर भ्रष्टाचार ताडंव कर रहा है, जहां बलात्कार मामुली सी चीज बन कर रह गई है, जहां भूख, कराह और विसंगतियों का माहौल है, समकालीन लेखकों द्वारा अधिकारपूर्वक कलम चलाई जा रही है. आज की समकालीन कहानियां जहां एक ओर साम्प्रदायिकता के विरुद्ध शंखनाद छेड़े हुए है. वहीं वह ‌ईष्या, द्वेष, झूठ ,छल, फ़रेब, राजनीति में अपराधिकरण, जनप्रतिनिधियों का चारित्रिक पतन ,गिरते जीवन मूल्यों, आहत होती भावनाओं पर जमकर लिखा जा रहा है.

उपरोक्त उदाहरणॊ से यह बात स्पष्ट होती है कि आज के कथाकार अपने दायित्वों का निर्वहन बडी शिद्दत के साथ कर रहे हैं अतः यह कहा जाना कि” आज की कहानियों में समकालीनता बोध का किंचित भी अभाव है” ,तो यह सर्वथा अनुचित होगा. यह बात निर्विवादरुप से कही जा सकती है कि आज की कहानियां युगानुरुप है, बल्कि वर्तमान की आवश्यकताओं के अनुकूल भी है.

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103,कावेरी नगर,छिन्दवाड़ा (म.प्र.) 480001 गोवर्धन यादव 09424356400

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड 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रचनाकार: कथा साहित्य और मैं - गोवर्धन यादव
कथा साहित्य और मैं - गोवर्धन यादव
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