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साहित्यिक गतिविधियाँ // *कठिनाइयों में भी अडिग रहे प्रेमचंद*

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*कठिनाइयों में भी अडिग रहे प्रेमचंद*  छात्रों ने भी सुनाई अपनी रचनाएं

    नारायणी साहित्य अकादमी एवं ज्ञानवाहिनी शिक्षण समिति  के संयुक्त तत्वावधान में कुशालपुर स्थित पाञ्चजन्य विद्या मंदिर में *प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक संदेश* विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

     संस्था की प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ श्रीमती मृणालिका ओझा ने संस्था के उद्देश्य बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों एवं युवाओं को साहित्य लेखन एवं पठन- पाठन के लिए प्रेरित करना हमारा उद्देश्य है।

      इस अवसर पर शाला के छात्र करण यादव ने प्रेमचंद का जीवन परिचय बताते हुए कहा कि गरीबी, अभाव, शोषण, उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों के बाद भी प्रेमचंद ने अपार साहित्य रचा और समाज को एक दिशा प्रदान की। शाला की शिक्षिका श्रीमती नीलिमा सोनी एवं शिक्षक  श्री सुरेन्द्र कुमार यादव ने भी परिवार से लेकर वैश्विक स्तर की समस्या को लेकर रचे गए प्रेमचंद के साहित्य को लगातार पढ़ने की जरूरत पर बल दिया।

    प्रेमचंद के अतिरिक्त अन्य विषयों पर भी छात्रों ने अपने विचार व्यक्त किये।  'सभी व्यक्तियों में एकता की भावना ही राष्ट्रीयता है' जैसी बात कुमारी तनु साहू ने कही। सूरज पटेल ने पर्यावरण प्रदूषण को गंभीर बताते हुए इससे हो रहे विनाश के प्रति ध्यान आकर्षित किया। कुमारी भावना साहू ने ॠतुओं के बारे में, कुमारी श्वेता चिचोलकर ने गुरू की महिमा पर, एवं कुमारी संजना वर्मा, कुमारी निशा हाईत,  तथा कुमारी प्रीति देवांगन  सहित अन्य  विद्यार्थियों  ने विभिन्न विषयों पर अपनी कविताएं प्रस्तुत की।

      कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अजय अवस्थी किरण ने प्रेमचंद साहित्य का उल्लेख करते हुए हम बडे भी छात्रों से प्रेरणा लेना चाहते हैं जैसी बात कही। रजनीश कुमार यादव ने   कहा कि उस समय समाज में जो बुराइयाँ थी उनका और अंग्रेजी शासन का विरोध प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से किया। संजीव ठाकुर ने बुजुर्गों के स्नेह एवं गांव की मधुर यादों पर गीत सुनाते हुए उनके प्रति सम्मान बनाये रखने की बात कही।  मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए प्रख्यात कवयित्री  शशि दुबे ने प्रेमचंद साहित्य पर विस्तीर्ण प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीयता के महत्व को बताया। अध्यक्षता करते हुए डॉ. स्नेह लता पाठक ने प्रेमचंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विद्यार्थियों को उनके साहित्य से क्या संदेश मिलता है। किस तरह विद्यार्थी धनपत राय उपन्यास सम्राट प्रेमचंद के नाम से पहचाने गये।

     कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र ओझा ने किया एवं   अंत में प्राचार्या  श्रीमती इन्द्राणी शर्मा   ने संपूर्ण कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्पद बताते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

राजेंद्र ओझा

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