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साहित्यिक समाचार - ‘‘पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं प्रमिला झरबड़े ’मीता’

‘‘पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं

saahityik samaachaar - ‘‘paavas ke din bin tumhaare aise kaaTe hai.n pramilaa jharabade ’meetaa’

भोपाल। पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं, तन की गलियां सूनी-सूनी, रोम-रोम सन्नाटे हैं,’’‘मन की दहलीज पे आके क्यूं तुम लौट जाते हो, अनुबंध कर दो प्रेम के मन को तुम ही भाते हो।’’ कुछ ऐसी ही रचनाएं काव्यगोष्ठी में कवियों ने सुनाकर वातावरण को आनंदित कर दिया। इन्द्रपुरी में नैनागिरि स्थित मनोरम निवास में संपन्न काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने प्रेम, विरह, बारिश और प्रकृति के साथ ही मानवीय संवेदनाओं पर केन्द्रित एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं।

होरीजोन गुडफेथ एजुकेशनल एंड ह्यूमन वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से निर्भया साहित्य संस्था की 11 वीं काव्य गोष्ठी गीत, गज़ल, कविता और क्षणिकाओं के साथ संपन्न हुई। कवयित्री मनोरमा मनु ने सुनाया दिल लगाना खेल हो गया है आजकल’’और मैं फिर से चहचहाना चाहती हूं, वही गुजरा जमाना चाहती हूं,’’ ऋषि श्रृंगारी ने पीड़ा के सारे दरवाजे बंद लिख दिए,’’ गीत सुनाया तो कवि सुरेश जी ने बूंद-बूंद पानी को तरसे जिस घर के लोग, वहीं घर अब पानी में डूब रहा है’’ गजल सुनाई। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि अशोक निर्मल ने विरह गीत सुनाया। पावस के दिन बिन तुम्हारे ऐसे काटे हैं,’’ कवि अशोक व्यग्र ने क्षीण मन की कामनाएं अत्यधिक उद्दिग्न मन’’ छंदबद्ध कविता सुनाई। पंकज पराग ने वेदना के स्वर मुखर हैं,’’ कमलेश वर्मा ने वतन के चमन में महकता हूं मैं,’ अशोक गौतम ने ले चल मन के पंछी जहां मिले मनमीत’’ रमेश कुमार ने आसपास सब संबंधों के जितने रिश्ते हैं,’’ और तेज सिंह तेज ने बाजारों में भटकता रहा है बेचारा इंसान’’ गीत सुनाया।

मंडीदीप से आए कवि प्रेम कुमार प्रेम ने कहा-‘क्या बतलायें कैसे रिश्ते-नाते हैं, अपने-अपने मतलब देखे जाते हैं।’’ बचपन बचाओ पर डॉ. मीनू पांडे ने अतुकांत कविता सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि हरिवल्लभ हरि ने कहा-‘किस पर करें भरोसा अब हम किस पर नहीं करें,’’ वरिष्ठ रचनाकार दानिश जयपुरी ने मंजिल के रूबरू हैं बड़ी कशमकश में हम’’सुनाकर दाद बटोरी। कवयित्री सीमा हरि, कवि आशीष श्रीवास्तव और मनोज देशमुख की प्रस्तुति को भी सराहा गया। काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन कवयित्री मनोरमा मनु ने किया। रचनाकारों के आग्रह पर कवयित्री प्रमिला मीता ने आशाओं की बगिया में एक कली खिली’’ और कभी तो आना मेरे द्वारे श्याम सलौने सांवरे, थक गए हैं, राह निहारे मेरे नैना बावरे’’ गीत सुनाया।

प्रमिला झरबड़े ’मीता’

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