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सावनी गीत // मंजुल भटनागर

सावनी गीत // मंजुल भटनागर


सूरज छिप गया कहीं
बादल घनेरा  है
समीर  मंद मंद
बूंदों की टिप टिप
सपनों की नाव को
यादों ने घेरा है  .
लो मौसम फिर बदला ,सावन का बसेरा है

किरणें नहा ली
पत्तियाँ भी धुली धुली हैँ
आसमान यूँ लगा
सप्तरंगी धनुष लिए 
सपनों में  जीने के रंग को उकेरा  है
लो मौसम फिर बदला, सावन का बसेरा है  .

गंगा के घाट पर भीड़ भाड़
चंद्र ग्रहण लग रहा
पूजा अर्चन है शंख नाद आज  
पूजा आस्था को सवेरे ने  बिखेरा है
लो मौसम  फिर बदला, .सावन का बसेरा है

गुलाब की कोंपलें
मुस्करा उठी प्रणय से
बांस मुग्ध हो सीटी मारे
चंपा पञ्च तत्व सी
  सन्देश बहुतेरे है
झूले  बैठ राधा तीज गीत गुंजारें है
लो मौसम फिर बदला ,सावन का बसेरा है

बिजुरी कौंधी  दिगंत में
  फुहारें आशीर्वचन है
प्रकृति  दुल्हन सी सजी बैठी
फूलों का अलंकरण है
दिगंत  चितेरा है
लो  मौसम फिर बदला ,  .सावन का बसेरा है .

मंजुल भटनागर
मुंबई अंधेरी वेस्ट

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