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यात्रा संस्मरण // केन्या (उत्तर अफ्रीका ) वन्य प्राणियों का स्वर्ग स्थल // राजेश माहेश्वरी

केन्या (उत्तर अफ्रीका ) वन्य प्राणियों का स्वर्ग स्थल

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मुझे मेरे निकट संबंधी देश के सुविख्यात उद्योगपति श्री वेणुगोपाल जी बांगड (चेयरमैन श्री सीमेंट ) एवं श्री हरिमोहन बांगड (मैनेजिंग डायरेक्टर श्री सीमेंट), एवं उनके परिजनों के साथ 6 जून को एक सप्ताह के लिये सपत्नीक केन्या जाने का अवसर प्राप्त हुआ। यह देश अपने घने जंगलों एवं जंगली जानवरों के लिये विश्व विख्यात है। हम लोग नैरोबी एयरपोर्ट पहुँचकर वहाँ से 10 कि.मी. दूर स्थित जिराफ संरक्षण केंद्र देखने हेतु गये जहाँ पर सभी उम्र के लोग जिराफ को उसका भोजन जो कि संरक्षण केंद्र में ही निर्मित होता है उसे खरीदकर जिराफ को खिला रहे थे। यह दृश्य देखकर बच्चे प्रसन्नता से फूले नहीं समा रहे थे।

इसके बाद दूसरे दिन हम लोग माऊंट केन्या जाने के लिये रवाना हो गये। यहाँ वातावरण में काफी ठंडक थी एवं पहाडियों के ऊपरी शिखर पर बर्फ जमी हुई थी। हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि केन्या में निजी क्षेत्र में भी बहुत बडे बडे जंगल है जिनका अवलोकन भी आप समुचित फीस देकर कर सकते हैं। यहाँ पर चलने वाली मुद्रा को शिलिंग कहते हैं। जिसका भारतीय मुद्रा में परिवर्तन मूल्य 70 भारतीय पैसे में 1 रू. शिलिंग का प्राप्त होता है। हमें ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय मुद्रा दर वहाँ की मुद्रा से ज्यादा मजबूत है परंतु वास्तव में वहाँ की सामग्री, होटल, टैक्सी, प्रवेश शुल्क आदि सभी कुछ अमेरिकन डॉलर पर निर्धारित रहता है जिसके कारण हमें विनिमय दर का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है।

यहाँ पर हम लोग दो दिन तक प्रतिदिन सुबह एवं शाम को जंगल में भ्रमण के लिये जीप में जाते थें। हमने यहाँ पर लगभग सभी जंगली जानवर जैसे जिराफ, जंगली सुअर, जंगली बफेलो,चीता, गोरिल्ला, कई प्रकार के बंदर, हिप्पोपोटेमस आदि देखे परंतु सिंह को देखने का अनुभव ही अद्भुत था। वे 15 से 20 के झुंड में अपनी राजशाही चाल से चल रहे थे। इनको देखकर ही प्रतीत होता था कि यह जंगल के राजा है। इसके बाद हम लोग नकूरा शहर चार्टर्ड हवाई जहाज से गये। यह एक छोटा विमान था जिसमें 12 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। नकूरा में हमारा रूकना एक बहुत सर्वसुविधा युक्त होटल में था। हम लोग आधे घंटे में ही माऊंट केन्या से नकूरा पहुँच गये थे। वहाँ पर हवाई पट्टी से सीधे ही जंगल देखने रवाना हो गये। हम यह देखकर दंग रह गये कि वहाँ पर हमारे देश में गाय, बैलों के विचरण के समान वहाँ के जंगली जानवर रेनो, बफेलो, हिरण, जिराफ, हाथी आदि घूमते रहते हैं।

इसके बाद हम लोग पुनः चार्टर्ड विमान से मसई मारा शहर पहुँचे जो कि सबसे ज्यादा घने जंगल के लिये केन्या ही नहीं बल्कि विश्व में जाना जाता है। यहाँ पर हमें जंगल में पेडों पर विश्राम कर रहे दस दस सिंहों को देखने का अवसर प्राप्त हुआ। उसमें से एक भूखा सिंह सामने से आ रहे हिरण को देखकर तेजी से पेड़ से कूदा और हमारे सामने देखते देखते ही भागते हुए हिरण को दबोचकर उसे मारकर उसके खून को पीने लगा। अब कुछ दूर आगे जाकर हमने 80 से 90 हाथियों का झुंड जाते हुए देखा जिसमें खास बात यह थी कि बेबी एलीफेंट अपनी माँ हाथी के साथ उसके चारों पैर के बीच में सुरक्षित रहकर चल रहे थे।

हम लोग पाँच दिन में जंगलों में जानवरों को देखकर पूर्णतया संतुष्ट होकर वहाँ की राजधानी नैरोबी, मसई मारा से हवाई जहाज द्वारा लगभग 45 मिनिट में पहुँच गये। यदि हम सडक मार्ग से जाते तो केन्या की खराब सडकों के कारण 8 से 10 घंटे में धक्के खाते हुए पहुँच पाते। हमें यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि केन्या के लोग इतने अनपढ है कि वहाँ की 80 प्रतिशत आबादी अमेरिकन डॉलर क्या होता है इसे जानती ही नहीं। वहाँ पर शाम 7 बजे के बाद होटल से बाहर निकलना असुरक्षित होने के कारण प्रतिबंधित है। नैरोबी का एयरपोर्ट एक साधारण दर्जे का बना हुंआ है। केन्या वासी 1967 में अंग्रेजों की दासता से मुक्त हुए है और अपने विकास की दिशा में धीरे धीरे प्रयासरत् है। केन्या का मुंबासा शहर प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है जहाँ पर लगभग 80 प्रतिशत भारतीय मूल की आबादी है जो कि वहाँ की प्रगति में अपना अभूतपूर्व योगदान प्रदान कर रहे हैं।

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