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बाल नाटक - स्वर्णिम स्वतंत्रता दिवस - डॉ. रानू मुखर्जी

बाल नाटक

स्वर्णिम स्वतंत्रता दिवस

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डॉ. रानू मुखर्जी

(पर्दा खुलते ही कुछ लोग एक जगह इकठ्ठे होकर बात करते हुए नजर आतें हैं और कुछ चहल कदमी कर रहे होते हैं इधर से उधर। उधर से इधर।)

राजेश - रामू जरा बताना इस बार हम सब मिलजुलकर जो १५ अगस्त का कार्यक्रम करना चाहतें हैं उसमें कौन- कौन भाग लेने वाले हैं?

रामू - बड़े भैया अगली बार तो बच्चों को हमने समझाया था कि चाहे कुछ भी हो जाए हमें पढाई करने के साथ साथ खेल कूद में भी ध्यान देना पड़ेगा नहीं तो खेल प्रतियोगिताओं में हम पिछड़े ही रहेंगे। अब बताओ इसका कितना फायदा हुआ। हमारे शहर के अधिकांश बच्चे दूसरे शहर के बच्चों को पछाड़कर मेडल जीत लाए न?

मोहन –पर बात तो इस बार की हो रही है रामू भैया। मेरे विचार से इस बार सालभर जिन बच्चों ने कोई साहसिक कार्य अर्थात समाज सुधारक या सुरक्षात्मक कार्य में अपना हुनर या साहस दिखाया है उन्हें पुरस्कृत किया जाए। आप सभी के क्या विचार है?


दो-चार लोग एक साथ बोल उठे – सही है मोहन भैया, एकदम सही। हम सभी का यही विचार है।

रजनी - और लड़कियों को भी बताना है कि जो लड़कियां नृत्य और संगीत में अच्छा करेगी उनको भी अलग से इनाम मिलेगा।

माला – रजनी दीदी में तो उस दिन झंडा बनाकर ले आऊंगी।

मोहन – अरे वाह! बड़े अच्छे विचार है। ये तो हम सभी कर सकते हैं। हम सब मिलकर एक साथ दस – दस झंडा बनाएंगे । और लोगों में बाँटेंगे।

(सब एक साथ मिलकर ताली बजाते है और गाते हैं।)

हम सब भारत माँ के बच्चे

दिल के हैं सरल और सच्चे

जीतेंगे दिल सभी का करेंगे काम ऐसा

गर्व करेगा विश्व सारा देखेगा जब ऐसा नजारा।

मोहन - मेरे घर के पास एक बहुत बड़ा गड्ढा है जिसमें कुछ समय पहले पानी भर गया था।

माया - फिर क्या हुआ मोहन भैया?

मोहन – अचानक रात को जोर जोर से भौंकने की आवाज आई। मैं दौड़कर बाहर निकला तो देखता हूं क्या? कि एक छोटा पिल्ला उस गढ्ढे में गिर गया है और बाहर निकलने कि कोशिश में लगातार रो रहा है।

रजनी – मुझे तो बहुत दुख हो रहा है, फिर पिल्ले को वहां से किसने निकाला?

माया – बेचारा! बहुत रो रहा था क्या?

मीरा – हां मैंने इस घटना को अखबार में पढ़ा था। पास ही रहनेवाला एक लड़का वहां से गुजर रहा था, उसने रात को ही उस ठंडे पानी में उतरकर उस पिल्ले को वहां से निकालकर ले आया।

मोहन - हम उस लड़के ढूंढकर पुरस्कार देंगे। यह अच्छा काम होगा और साथ ही और लोगों तक संदेश भी जाएगा कि हमें अपने आस पास के पशु पक्षियों की देख भाल और मदद करनी चाहिए।

साधना – घर के बुजुर्गों को बुलाकर उनका भी एक कार्यक्रम करेंगे। झंडा उत्तोलन उन्हीं से करवाएंगे। (सब उत्साहित हो गए। खुश खुश एक दूसरे से बातें करने लगे।)

चलो चलो सब अपना काम करने में लग जाएं। मोहन, राजेश, रजनी तुम सब लोग इस मैदान की साज सज्जा का काम संभालोगे। बाकी सब लोग झंडा बनाने और पुरस्कृत लोगों का नाम इकट्ठा करेंगे।

मालती – जिनके दादा- दादी नाना – नानी है मेरा विचार है वो सभी १५ अगस्त के कार्यक्रम में उनको लेकर आएं। बड़ों का सम्मान करना। उनको सम्मानित करने वाले विचार भी हमें लोगों के सामने रखना है। सभी को अपना काम याद रह गया न? अब चलो सब जुट जाते हैं।

(गोल घेरा बनाकर स्टेज पर सभी बच्चे झूमते हुए गाते हैं -)

“ इस झंडे तले सभी को सीखना है

हमें मिल-जुल कर रहना और काम करना है

जीतेंगे हम मन सभी का और

जग को भी जीतकर दिखाना है।

आगे बढ़ते रहते जाना है।”

(पर्दा बन्द हो जाता है)

पर्दा उठता है। सजा धजा मैदान। चारों ओर सफेद, लाल, पिले, हरे, रंग के कागज के टुकड़ों से बने हार को लटकाकर और फूल पत्तियों से सजाकर एक अनोखा रुप दे दिया है बच्चों ने चार पांच जनों का झुंड बनाकर बच्चे स्टेज पर, आपस में बातें करते हुए खुश – खुश स्टेज पर आने लगे। कुछ कुर्सियां चारों ओर मेहमानों के बैठने के लिए रख दी गई। मंच के बीच में एक स्तंभ रखा गया, जिसमें झंडे के अंदर फूल भरकर बांध दिया गया।

राजेश - बडा अच्छा काम किया है सभी ने अब वक्त पर सब उपस्थित हो जाएं तो कार्यक्रम शुरु कर सकते हैं।

मोहन – सभी को एक साथ जन गन मन गाना है। प्रेक्टिस किया है न?

मीरा – हां भैया हमने तो कब से गाना प्रेक्टिस करना शुरु कर दिया था। हम सब तैयार है।

रामू – मैंने सभी पुरस्कृत लोगों को बुला लिया है। सब नजदीक ही बैठे हैं। कार्यक्रम शुरु होते ही बुला लूंगा। अरे! अभी तक गोलू मोलू नही आए। उनको भी तो बुलाया है न? दोनों मिलकर हमें एक अपने अनुभव की बात बताने वाले है।

साधना – हां दोनों कल मुझ से भी मिले थे और इस बात की चर्चा भी की थी। बैठे होंगे। आएंगे तो जरुर। बहुत उत्साहित लग रहे थे कल।

(सफेद कुर्ते पजामे में एक व्यक्ति धीरे – धीरे चलता हुआ बच्चों के करीब आते हें।)

गुरुजी - बच्चों समय तो हो गया है। झंडा फहराने का। सब तैयार हो न?

सब एक साथ – जी गुरुजी।

(तीन – तीन चार – चार बच्चे एक साथ मिलकर थोड़ी-थोड़ी दूर पर ग्रुप बनाकर खड़े हो जाते हैं। एक ग्रुप में थोड़े बुजुर्ग भी है। उनकी अलग ग्रुप बनी है। मोहन थोडा आगे जाता है।

मोहन – नमस्कार अतिथिगण! आज स्वतंत्रता दिवस है। यह १५ अगस्त को मनाया जाता है। हमारा देश आजाद है और हम बड़े गर्व से सीना तान खुद को एक आजाद देश का आजाद नागरिक कहते हैं। हम में से कितने यह जानते हैं कि इस आजादी को हासिल करने के लिए हमें अपने कितने वतन परस्तों की कुर्बानियाँ देनी पड़ी। विदेशियों के कितने जुल्मो सितम झेलने पड़े। इसमें गांधीजी, सुभाषचंद्र बोस, नेहरुजी, लाल-बाल-पाल, चंद्रशेखर आजाद, तात्या टोपे, लक्ष्मी बाई, आदि देश भक्तों ने अनेक कष्ट सहे है। आज हम आपके सामने आजाद भारत के वासियों के कुछ साहसिक कार्य, कर्तव्य और हमारी संस्कृति परंपरा की एक छोटी सी झलक पेश करने वाले हैं।

(सब पीछे हट जाते हैं। मोहन भी। मालीनी सामने आती है)

मालीनी – उपस्थित सभी को मालीनी का नमस्कार । मीरा के दादाजी और दादीजी को सामने आकर झंडा फहराने के लिए अनुरोध करती हूं। दादाजी, ददीजी कृपया सामने पधारें।

अनूप - अब मैं अनुप आप सभी को नमस्कार करता हूँ। मैं अपने नानाजी और नानीजी को साथ लाया हूं। कृपया नाना नानी सामने आएं।

मोहन - नानाजी – नानीजी, दादाजी दादीजी सभी से विनती है झंडा फहराने में मेरी मदद करें। गुरुजी आज भी हमारी मदद करें।

(सभी एक जुट होकर झंडा फहराते हैं।)

फिर जन गन मन गाया जाता है और जय हिन्द का नारा लगाया जाता है। कुछ बच्चे स्टेज पर से उतर कर उपस्थित सभी में झंडा बांटते है। सभी लोग झंडा हाथ में आते ही उसे हिलाने लगते हैं। एक छोटी सी लकड़ी में तिरंगे कागज को लपेटकर झंडा बनाया गया है। “भारत माता की है, भारत माता की जै” का नारा गूंजता है।

मोहन – अब पुरस्कार की बारी। हमारे पड़ोस के स्कूल का एक होनहार विद्यार्थी दीनदयाल को “जीवों के प्रति दयाभाव” रखने के कारण, पुरस्कार दिया जा रहा है। दादाजी! दीनदयाल को कृपया पुरस्कृत करें। (दीनदयाल सामने आकर दादाजी से पुरस्कार लेकर उनके चरण छूता है।)

(अब रजनी सामने आती है।)

रजनी – उपस्थित अभी को नमस्कार। अब गोलू-मोलू अपना अनोखा अनुभव सुनाएंगे।

गोलू-मोलू आगे आते हैं।

गोलू – नमस्कार भद्रजन। हम दोनों एक ही स्कूल में एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। पर हमारा मन पढने में नही लगता था। एक दिन हमने एक खबर पढ़ी कि जो विद्यार्थी अपनी कक्षा में अव्वल आएगा उसे पर्वतारोहण में जाने का अवसर दिया जाएगा।

मोलू – हमने जी तोड मेहनत की अच्छे नम्बर आए। हम दोनों को पहाड़ पर जाने का बड़ा शौक है। पर घर से अनुमति नहीं मिलती थी। अच्छे नम्बर लाने के कारण पहाड़ पर जानेवालों की टीम में हम भर्ती हो गए हैं। हमारी ट्रेनिंग जारी है। सभी से विनती है मेहनत का फल मीठा होता है। कृपया जी तोड़ मेहनत करें। एक बार वक्त अगर निकल जाता है तो दोबारा नहीं आता है। नमस्कार ।

नानाजी – गोलू मोलू दोनों को बहुत बधाई। सच में आप लोगों का अनुभव सभी के काम आएगा।

(मीरा एक पुरस्कार नानीजी को लाकर देती है)

ये लीजिए यह पुरस्कार आप दोनों के लिए है।

(दोनों पुरस्कार लेकर नानीजी के चरण छूते हैं।)

दादीजी – अब हम एक नृत्य का कार्यक्रम देखेंगे।

(नृत्य होता है, नहीं तो कविता पाठ कुछ भी मनोरंजन का कार्यक्रम किया जा सकता है)

रजिया – आप सभी ने यहाँ पर उपस्थित होकर हमारा उत्साह बढ़ाया इस लिए आप सभी के आभारी है। स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त, आज का दिन हमारे लिए स्मरणीय दिवस बन गया। एक समूह गान।….


“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा,

सदा शांति बरसाने वाला, प्रेम सुधा बरसाने वाला ।

वीरों को हर्षाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा,

झंडा ऊचा रहे हमारा॥”

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