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स्वतन्त्रता दिवस विशेष - कुंजल वेलफेयर सोसायटी काव्य गोष्ठी

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स्वतन्त्रता दिवस की 71वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में कुंजल वेलफेयर सोसायटी का गरिमामय आयोजन

आजादी है.....जिम्मेदारी!!!

‘‘नौनिहालों को आजादी की उॅूची उड़ानों के पर दें।

स्वच्छ-स्वस्थ-सुरक्षित बचपन का वर दें।।’’

बाल शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने की जिम्मेदारी उठाने हेतु आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथि श्री ब्रजेश चौहान-सदस्य मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग, श्री जीवन सिंह मैथिल-अध्यक्ष भोपाल को-ऑपरेटिव सेन्ट्र्ल बैंक लि., श्री महेन्द्र सिंह- पूर्व एसडीएम, श्री पंवार राजस्थानी-वरिष्ठ रचनाकार एवं श्री जहीर कुरैशी-वरिष्ठ रचनाकार द्वारा मां सरस्वती को माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी भोपाल- श्री धर्मेन्द चौधरी जी ने देश की आजादी को बच्चों के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने के नवाचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत ही गम्भीर विषय है जिसमें समाज को ही जागृत होना होगा। सुश्री प्रियल द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया। युगपुरूष पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटलबिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। संस्था अध्यक्ष श्री आर.एन.पाटिल ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, एक ओर हिन्दी भाषा तथा हिन्दी साहित्य का उन्नयन करना; युवाओं को साहित्यिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना; महिलाओं के आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण के साथ ही हिन्दी साहित्य से जोड़ना; हिन्दी भाषा का गौरव स्थापित करना साथ ही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना। अध्यक्ष ने बताया कि यह संस्था के स्वतन्त्रता दिवस कार्यक्रम का पॉचवा आयोजन है और संस्था अपने प्रयासों से निरंतर सफलता की ओर बढ़ रही है। श्रीमती प्रभा गौर ने संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रख्यात रचनाकार श्रीमति अनु सपन, श्रीमति ममता वाजपेयी, श्री घनश्याम मैथिल ’अमृत’, श्री धर्मेंद्र सिंह सोलंकी, श्री अभिषेक अरजरिया, श्रीमति अंशु वर्मा, श्री आशीष यादव, श्री चित्रांश खरे, श्री सांईदीप, श्री भवानी प्रताप, सुश्री अपूर्वा चतुर्वेदी, श्री विशाल राजपूत, बालकवि रूमषा तिलेठे द्वारा ओजपूर्ण और बाल शोषण पर आधारित कविताओं का पाठ किया गया। बाल शोषण पर आधारित लघु नाटिका का मंचन भी किया गया जिसके द्वारा बाल लैंगिक शोषण की पीड़ा को दर्शाया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से सभ्य समाज को बाल लैंगिक शोषण के प्रति संवेदनशील बनाना है। कार्यक्रम का संयोजन कुंजल वेलफेयर सोसायटी की संचलिका श्रीमती प्रभा गौर ने किया । सभी रचनाकारों और अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया गया। मंच संचालन कवि श्री धर्मेंद्र सिंह सोलंकी द्वारा किया गया। अन्त में आभार प्रदर्शन श्री शैलेष गौर द्वारा किया गया।

‘‘काव्य गोष्ठी की झलकियाँ’’

ऽ श्री धर्मेंद्र सिंह सोलंकी जी पढ़ते हैं :-

सारी महंगी खुशियों को हम सस्ती करते हैं।

चौबारे में जब हम बच्चे मस्ती करते हैं।।

जिन्हें मामा, जिन्हें चाचा, जिन्हें ताउु बुला बैठी

उन्हीं की गोद में मासूम अस्मत को लुटा बैठी।

मिठाई और टॉफी तो कभी भी खा नहीं पाई

मगर तनम न पर यार धोखे खूब खा बैठी।।


ऽ श्रीमति अनु सपन कहती हैंः-

रोज ही अखबार या न्यूज चैनल पर हम देखते पढ़ते हैं हमारी छोटी-छोटी बेटियों के साथ अनाचार रेप की घटनायें आम होती जा रही है।

तब बेटी अपनी मॉ से रुदन करते हुए क्या कहती है-एक गीत की कुछ पंक्तियॉ......

कैसी आई री आई री काली रात

जिनगी ने खाई मात,

दिया कि बाती बुझ गई री.........


ऽ श्रीमति ममता वाजपेयी ने बाल शोषण पर आधारित रचना पढी :-

फिर किसी संवेदना की चीख गूँजी। फिर किसी उन्माद ने मूंछें मरोड़ी।।


ऽ श्री अभिषेक अरजरिया ने देश के वर्तमान हालातों को देखते हुए एक गीत प्रस्तुत किया-

भारती के धीर का हॉ, कर रहे हैं जो हरण।

कैसे उनके आचरण, कैसे उनके आचरण ।।


ऽ श्री पवार राजस्थानी ने देश को समर्पित कविता पढी :-

जितने चाहो धर्म बदल लो, पर भगवान नहीं बदलेगा।

मौसम के तेवर बदलेंगे, पर दिनमान नहीं बदलेगा।

बदलेगा हर कफन लाश का, पर शमशान नहीं बदलेगा।

तुम बदलो या हम बदले, पर हिन्दुस्तान नहीं बदलेगा।


ऽ श्रीमति अंशु वर्मा जी पढ़ती हैं :-

परियों के पर कतर दिए हैं, वहशी दानव दुष्टों ने।

  पीड़ा उसकी क्या समझाऊं ,कैसे लिख दूं शब्दों में।।

हाथ उठाए हा हा करती थामें अपनी सॉसों को।

भेद गए जो गहरे मन को कौन भरेगा घावों को।।

--

प्रभा गौर

कविता 2160780421481163376

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