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व्यंग्य - - "अस्थि विसर्जन का लफड़ा' // जय प्रकाश पाण्डेय

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इधर काऐ को फूट - फूट कर रो रही हो......हां तो.... ये थाना है, यहाँ हर आदमी ऐसई रोता है। थाने में रोने से आंसू सूख जाते हैं सब कहेंगे नखरे कर रई हो, जब आदमी जिंदा रहा होगा तो खूब मुंह चलाती रही होगी। उसकी 'ठठरी बंध जाय' वाली खूब गालियाँ दीं होगीं। मर गया होगा तब भी छू छू के देखा होगा कि सचमुच का मरा कि नहीं। चुल्लू भर पानी को तरस गया होगा बेचारा, मरते समय।

मर गया तो चलीं आईं उसकी हड्डी सिराने गंगा जी में........ ये सरकार गंगा जी में अस्थि विसर्जन पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा देती। बेचारे अंधविश्वास में जकड़े लोग कब सुधरेंगे। घर के सामने पवित्र कुंवारी नर्मदा बह रही है उसमें अस्थि विसर्जन नहीं करेंगे, पोंगा पंडित और पुराण ने कह दिया कि गंगा जी में विसर्जन से असली मुक्ति मिलती है तो चल दिए गंगा जी। परम्परा रीति-रिवाजों और इज्जत के बहाने गंगा जी में हड्डी विसर्जन गरीबों और अमीरों की प्रतिष्ठा का प्रश्न खड़ा करता है .... इसीलिए मुक्ति की मृगतृष्णा के कारण गंगा जी में विसर्जन को चलीं आईं। पंडित ने कह दिया होगा कि गंगा जी जाओगी तो मृतात्मा को मुक्ति मिलेगी और तुम उससे हमेशा के लिए मुक्त हो जाओगी, तो चलीं आईं नवतपा की भीषण गर्मी में......... देख नहीं रही हो कि सूरज आग उगल रहा है, प्राणलेवा गर्मी है....... ।

- - ऐ बाई थोड़ा दूर खड़ी हो पसीना गंध मार रहा है। ये गंगा जी के चक्कर में बहुत तकलीफ है यार क्या बताएं ।

हां तो...... बोल क्या कहती है रिपोर्ट लिखाना है!

हां तो...... पसेन्जर गाड़ी से समान के साथ पैसा और घरवाले की अस्थियां चोरी चलीं गईं।

हां तो..... थाने में फिरी में थोड़े न रिपोर्ट लिखी जात है पैसा नहीं है तो कहीं से इंतजाम करो, पांव में चांदी की पायल तो अच्छी लग रहीं हैं इसी को उतार दो।

हां तो....... देखो बाई.... जे बार बार फूट फूट के रोने से काम नहीं बनने वाला........ खाकी वर्दी खतरनाक होती है। तुम्हारे साथ वालों को बुलाओ यदि सबकी जेब पूरी कट गई है तो पायल के अलावा कोई चारा नहीं है सो पहले से उतार के यहां हमारी दराज में रख देओ.... समझीं । हां तो.... भरी गर्मी में खुद भी तंग होऊत हो और खाकी वर्दी को भी तंग करत हो। विसर्जन के लिए अस्थियां बिना पूछे रेल में कैसे रख दियो, लेओ एक अपराध और हो गया अब तो और पैसा लगेगा। हां तो... पैसा निकालो नहिं तो काम नहीं बनेगा। सबको अंदर कर दऊंगा।

         ___साब, दया कर दो जे बाई के साथ हम लोगन भी हैं थोड़ा बहुत ले-देकर रफा-दफा कर दो साब, गरीब है बिचारी। इसको कोई नहिंआं, हम तो मदद करन साथ आये हैं और आप हम लोगन को भी बंद कर देहो तो जुलुम हो जाहै, जे तो 'होम करे हाथ जले' वाली बात हो गई.........

     - - - - हां तो चलो अच्छा, बाई का नाम बताओ.... तुम लोग सब अपने अपने नाम पता बताओ, कहाँ से आ रहे हो, ट्रेन में क्या क्या हुआ ?

     __साब, जबलपुर से पसेन्जर गाड़ी पकड़ी रही खूबय की भीड़ रई और गर्मी ऐसी कि क्या बतई। रेल को डब्बा भट्टी जैसों तप रओ थो रस्ता भर । मानिकपुर के पास बाई गश्त खाके गिर गई, पानी मांगें..... बाजू में बैठो एक आदमी ने ठंडो ठंडो पानी दओ प्यास सबखें लगी थी तो सबने पी लओ। थोड़ी देर बाद नींदई नींद..... फिर कछु यादई नहिं। इते जे इलाहाबाद में होश आओ तो सब सामान गायब वो बाजू में बैठो आदमी भी गायब और जिस थैला में अस्थियां रखीं थीं वो भी चोरी।

---अच्छा.. कौन पंडा है तुम लोगन का ?

__ साब, तबिलिया वालो पंडा कहत रहे गांव वाले।

---- छोटा तबिलिया वाला कि बड़ा तबिलिया वाला कि सिर्फ तबिलिया वाला  !  चलो अच्छा फोन करके पता कर लेते हैं ये पंडा लोग बहुत बदमाशी करते हैं जजमान छीन लेते हैं फिर लट्ठबाजी होती है पुलिस फालतू में परेशान होती है।

----हलो... हलो तबिलिया वाले बोल रहे हैं हां तो..... ये बताओ कि मण्डला जिले में मरने वालों का ठेका किसके पास है ?

___ जी सरकार, हमरे ही पास है भेज देवा.. हम आपका कमीशन पहुंचा देबी।

---- और सुनो तबिलिया, इनकी अस्थियां भी चोरी चलीं गईं हैं,  हां तो... ध्यान रखना कमीशन इस बार का ज्यादा रहेगा।

____ होय गवां सरकार, ठीक है न, अपन बन लेबी और अस्थियों का इंतजाम भी होय जई.........

हां तो... ये साला पसीना झर - झर गिर रहा है ये स्टेशन ऐसी जगह है जहां सब जगह की गर्मी और सरगर्मी पहुंच जाती है मुन्शी जी कूलर में पानी - आनी नहीं डालोगे क्या ? ज्यादई पैसे की गर्मी हो गई जेब में क्या ?

-----हां तो, तुम लोगन की रिपोर्ट - ईपोट का काम हुई गया। स्टेशन के बाहर से आटो पकड़ा और तबिलिया वाले के ठीहे को पहुंचा ऐं....

स्टेशन के बाहर निकले, आटो पकड़ा, तबिलिया वाले ठीहे के सामने आटो रुका। आटो वाला सब जानता है। पंडा ने बुलाकर बैठाया, ठंडा पानी पिलाया, ढाढस बंधाया कि चोरी गई अस्थियां स्टेशन से मिल जायेंगी, पुलिस दरोगा से बोल दिया है ये तो रोजई का काम है दरोगा थोड़ा ज़्यादई पैसा लेगा पर काम बन जाएगा। चोर लोग खुद ही दरोगा को चोरी की अस्थियां दे जाते हैं।

पैसा - धेला की चिंता नहीं करना.... आप लोग हमारे जजमान हैं, आप लोगन की 'फिटनेस '  का ध्यान हमें रखना है। सब करम अच्छे से करवा देंगे, बाद में हमारा आदमी उगाही पे आयेगा तो पांच बोरा गेहूं, दस हजार नगद और एक बछिया दान में देनी पड़ती है दक्षिणा अभी हो जाएगी। बछिया की पूंछ पकड़ कर तुम्हारे आदमी की आत्मा बैतरणी पार करती है। इसलिए मृतक की आत्मा भटके नहीं.... वो भूत-प्रेत की योनि में न भटके और नवतपा की गर्मी में न भटके इसलिए उसके काम में कंजूसी नहीं करना।

आज तो ज्यादई गर्मी है पुरुष लोग जब तक नाई से सिर मुंडवा लें अभी अस्थियां आने में थोड़ा देर है।

----- अरे लंगड़ा..... कहां गया बे, काम के वक्त में गायब हो जाता है।

__हां गुरु जी... आय गया ।बोलिये क्या करना है ?

---- देखो लंगड़ा... ये जिनके मूंड़ मुंड़ रहे हैं ये मण्डला जिले से आये हैं अपन कोई आदमी ने ट्रेन से सब माल गायब कर दियो है सो तुम एक काम करो कहीं से थोड़ी हड्डियों का जुगाड़ बना लो एक थैली में रख कर ले आना। जुगाड़ यदि नहीं बने तो मरघट के लॉकर में हड्डियां रखीं हैं ले आना। इन लोगों की शांति और संतोष के लिए ये सब जरूरी है। अच्छा सुन गर्मी ज्यादा है थोड़ा गमछा - वमछा लपेट के निकलियो।

तुम लोग आराम कर लो, दरोगा साब का फोन आया था कि अस्थियां मिल गईं हैं हमारा आदमी लेने गया है बस आता ही होगा। अरे लो आय गया.......

बाई.... तुम अस्थियों के सामने पालथी मार कर बैठ जाओ और बाई तुम आंख बंद करके ध्यान से सुनना। तुम्हारे आदमी की चोरी हुई अस्थियां चोरों के पास से मिल गईं हैं जिनमें तुम गंगा जल छिड़क के पवित्र कर फूल चढ़ा रही हो, मरने के बाद गंगा जी में विसर्जन से मृतात्मा सभी पापों से मुक्त हो जाता है उसकी आत्मा भूत-प्रेत बनके तंग नहीं करती और मृतात्मा को सीधे स्वर्ग मिल जाता है। अब अस्थियों में दूध छिड़क के फूल चढ़ाएं और हाथ जोड़कर बोलें - हे... 'हल्ला महराज ' इस प्रयागराज के संगम पर हमें मुक्त करें और खुद भी मुक्ति पावें और एक बार फिर से गंगा जल छिड़ के हाथ धो लें.....

अरे लंगड़ा गर्मी बहुत तेज है बार बार मंत्र भूल रहे हैं थोड़ा पीछे से पंखा करो, ये गर्मी प्राण लेने पे उतारू है.........

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जय प्रकाश पाण्डेय

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