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लघुकथा // भूल सुधार // अनूपा हरबोला

आज फिर कपिल के कमरे से चिल्लाने और रोने की आवाज़ आई। रमा खाना छोडकर सीधे उसके कमरे में गई...

तड़ा-तड उसने दो-तीन थप्पड़ कपिल को जड़ दिए।

बहू भी अवाक-सी उसे देखती रह गई....

"क्यों मारा तूने मुझे?" चिल्लाते हुए कपिल बोला।

"जो काम आज किया, वो मुझे बहुत पहले कर लेना चाहिए था।जब तू मुझे और अपने पापा पर बात-बेबात चिल्लाता था, खाने की थाली पटक देता था, अपनी हर ज़िद पूरी करवाया करता था, उसी समय अगर मैंने तेरी हरकतों को रोक दिया होता तो आज ये नौबत नहीं आती। बात-बात पर चिल्लाना अब और सहन नहीं होता।"

"मुझे माफ़ कर दे बेटी...जो मैंने तुझे इतना बेगैरत बेटा, पति के रूप में दिया, जिसे औरत की इज्जत करना ही नहीं आता है...।"

अनूपा हरबोला

कर्नाटक

1 टिप्पणियाँ

  1. सीताराम गुप्ता4:39 am

    "भूल सुधार" सचमुच एक अच्छी लघुकथा है.

    जवाब देंहटाएं

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