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कहानी संग्रह - वे बहत्तर घंटे - जिद - राजेश माहेश्वरी

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कहानी संग्रह

वे बहत्तर घंटे

राजेश माहेश्वरी

जिद

एक जंगल में एक बन्दर पेड़ की एक डाल से चिपटकर सो रहा था। उसी जंगल में एक बहुत शक्तिशाली एवं बलवान हाथी रहता था। वह घूमता-घूमता उसी पेड़ के नीचे जा पहुँचा। वहां पहुँचकर वह पेड़ के नीचे खड़ा-खड़ा चिंघाड़ने लगा। हाथी की आवाज से बन्दर की नींद खुल गई। विश्राम में खलल पड़ने के कारण वह कुपित हो गया। उसने हाथी को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया। वह पेड़ से कूदकर उसकी पीठ पर आ गया। फिर उसने उसे गुदगुदी लगाना प्रारम्भ कर दिया।

हाथी ने अपनी सूड़ से बन्दर को पकड़ कर पटकने का प्रयास किया लेकिन बन्दर उछल कर फिर पेड़ पर चढ़ गया। वह लगातार इस प्रक्रिया को दोहराता रहा। जब हाथी बहुत परेशान हो गया और बन्दर को नहीं पकड़ पाया तो वहां से रवाना हो गया।

यह सारी हरकत एक पिता और पुत्र दूर से देख रहे थे। पिता ने पुत्र से कहा- कोई कितना भी शक्तिशाली व बलवान हो उसे कमजोर प्राणी भी अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से पराजित कर सकता है। उस हाथी को अपनी ताकत का बहुत घमण्ड था। उसे यह गुमान था कि अन्ततः बन्दर को पकड़ लेगा और उसे अच्छा सबक सिखाएगा, किन्तु जी भरकर प्रयास करने पर भी वह इसमें सफल नहीं हो सका और अन्त में हारकर वहां से चला गया।

हमें उस हाथी के समान अपनी शक्ति का अपव्यय नहीं करना चाहिए। इसे संचित करके सही समय व स्थान पर उसका उपयोग करना चाहिए। तभी हम जीवन में सफलता प्राप्त कर सकेंगे और हमारा उद्देश्य पूरा हो सकेगा। हमारा प्रतिद्वंदी कितना भी शक्तिशाली हो हम उसे अपनी बुद्धि और चातुर्य से पराजित कर सकते हैं।


(क्रमशः अगले भाग में जारी...)

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