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लघुकथा // मेरी बहू // अनूपा हरबोला

मेरी बहू...

"आज रेखा कहाँ रह गईं?" लाइम सोडा पीते हुए अंजू बोली।

कहाँ रहेगी रेखा? किट्टी पार्टी तो रेखा की जान है, ये रही रेखा," सोफे पर बैठते हुए रेखा बोली।

"ये मिठाई किस लिए?"  रेखा के हाथ में डिब्बे देख अंजू ने पूछा।

"ये मिठाई तुम सबके लिए, लो मुँह मीठा करो,  मेरे बेटे की शादी तय हो गई है।"

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"अरे वाह! बधाई, कहाँ की है लड़की?" मिठाई का एक पीस लेते हुए अंजू बोली।

"अमेरिकन है, उसी के साथ ऑफिस में काम करती है।"

"अच्छा..."

"भई! जिसमें बच्चे खुश, उसी में हमारी मर्जी... हमारा तो यही मानना है।"

"पर एडजस्टमेंट में दिक्कत होगी, तुम्हें भी और उसे भी..."

"कर लेंगे यार, थोड़ा-थोड़ा दोनों करेंगें तो कुछ कठिन नहीं, कम से कम मेरा बेटा शादी तो कर रहा है, वो भी लड़की से, वरना आजकल की हवा तो तुम जानती ही हो...।"

अनूपा हरबोला

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