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ललित निबंध - जल वल्लिका – जलेबी // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

वे मेरे महमान थे। अमेरिका से आए थे। मैंने सोचा आज सुबह इन्हें ब्रेक-फास्ट में कोई ठेठ भारतीय व्यंजन खिलाया जाए। सो जलेबियाँ मांगा लीं। जलेबी देखकर बोले, ये कौन सी मिठाई है, कुण्डली मारे बैठी है? मैंने बताया इसे ‘जलेबी’ कहते हैं। सो तो ठीक है, पर इसके अन्दर यह तरल पदार्थ क्या भरा है ? उन्होंने अपनी जिज्ञासा प्रकट की। मैंने कहा, इसे शीरा कहते हैं। पर इसे भरा कैसे होगा ? क्या किसी सिरिंज से इंजेक्शन के ज़रिए पहुंचाया गया होगा ? उनकी जिज्ञासा अभी भी शांत नहीं हुई थी। बोले इसे खाते कैसे हैं? फिर खुद ही जलेबी को कांटे दार चिम्मच (फोर्क) में फंसा कर खाने लगे।

जलेबियों को देखकर इस तरह की जिज्ञासाएं केवल विदेशियों के मन में ही आ सकती हैं। भारत में तो हम जलेबी बस, जैसी भी है उसे वैसी ही स्वीकार कर लेते हैं और मज़े में उसका स्वाद लेते हैं। जलेबी यहाँ बड़े और बच्चों, बूढ़े और जवानों, स्त्रियों और पुरुषों – सभी की मन पसंद मिठाई है। हम सब इसे बड़े शौक से खाते हैं। गरम और करारी जलेबियाँ खुद खाते हैं, मेहमानों को खिलाते हैं। कोई विशेष अवसर हो तो खा लेते हैं, बेमौके भी खा लेते हैं। अक्सर सुबह खाते हैं, पर शाम को भी खा लेने में परहेज़ नहीं करते। सादा भी खाते हैं, दूध में डालकर भी खाते हैं। जलेबी भारत की राष्ट्रीय मिठाई है। अत्यंत लोकप्रिय। वैसे यह भारत के आसपास सभी देशों में खाई जाती है। अफगानिस्तान में जलेबी लोग मछली के साथ खाते हैं।

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जलेबी कई नामों से पुकारी जाती है। संस्कृत में इसे सुधा- कुंडलिका कहते हैं। जलेबी के अलावा कोई भी मिठाई इस तरह पेंचदार नहीं होती की कुण्डली मार कर बैठ जाए। संस्कृत में इसे जल वल्लिका भी कहते हैं। यह वह वल्लिका है जिसमें जल, शीरे के रूप में तरल पदार्थ, भरा रहता है। हिन्दी में इसे जलेबी क्यों कहते हैं, मालुम नहीं। शायद जल से यह लबालब है, इसलिए कहते हों। हिन्दी की देखादेखी फारसी और अरबी में इसे जलाबिया कहा गया महाराष्ट्र में इसे जिलबी, बंगाल में जिलपी कहने लगे।

हम खुशी के मौके पर अच्छी से अच्छी मिठाई खाना चाहते हैं। संभवत: रावण-दहन के बाद जीत की खुशी में जलेबियाँ खाई गईं थीं। हम उस परम्परा का आज भी निर्वाह करते हैं। हम सत्य पर असत्य की विजय के रूप में दशहरे पर राम लीला देखने के बाद आसपास हलवाइयों की दुकानों पर सपरिवार जलेबियाँ खाते हैं और जो रावण दहन देखने नहीं जा पाए वे घर पर ही जलेबियों का आनंद लेते हैं। इस प्रकार आज भी रावण दहन के बाद जलेबियाँ खाने की परम्परा कायम है।

जलेबी हलवाइयों द्वारा दुकानों में बनाई जाती है। लोग घर पर भी इसे बना लेते हैं। मालवा में सुबह का नाश्ता प्राय: जलेबी और पोहा से किया जाता है। हर हलवाई की दुकान पर ये दोनों चीजें गरम गरम मिल जाती हैं। पोहे के साथ करारी करारी जलेबियाँ लोग शौक से खाते हैं।

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जलेबी टीवी और बौलीवुड में भी बनती है। महेश भट्ट ने हाल ही में जलेबी बनाई है। बस परोसने ही वाले हैं। उनके अनुसार उनकी यह जलेबी हम सबको ज़िंदगी जीना सिखाएगी। बड़ी बात है।

एक जलेबी बाबा हैं। अब गिरफ्तार हो चुके हैं। वे शायद जलेबी का लालच देकर ही, अपनी अंधभक्त महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया करते थे। और ब्लेकमेल करने के लिए वीडिओ भी बना लेते थे। पकडे गए, अब जेल की हवा खा रहे हैं। हो सकता हैं जलेबी बाबा की तर्ज़ पर कोई जलेबी-बाई भी हो, कह नहीं सकता।

जलेबी हिन्दुस्तान में इतनी लोकप्रिय चीज़ है, की यहाँ लाढ में बच्चियों का नाम भी अक्सर जलेबी रख दिया जाता है। ये बच्चियां बड़े होकर भी जलेबी ही कहलातीं हैं, भले ही उनकी तासीर जलेबी की रहे न रहे। नाम का क्या है ? कुछ भी रख लो। निहायत बदसूरत लोग भी सुन्दर लाल हो सकते हैं। लेकिन जलेबी अपने नाम को कभी झुठलाती नहीं। जलेबी जलेबी होती है। मीठी, रसभरी। साथ में गरम और करारी भी हो तो बस, बात ही क्या है।

--डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो.)

१०, सर्कुलर रोड, इलाहाबाद-२२१००१

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  1. वाह, करारी जलेबी के जलवे भी अजीब है!जलेबी शायद पानी से लबालब हो पर उसका नाम सुनने से मुंह में पहले से ही पानी आ जाता है, बहुत खूब।

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  2. डॉ आशा चौधरी7:55 pm

    जलेबी के सुधा कुंडलिका और जल वल्लिका नाम बड़े मोहक लगे, बिलकुल जलेबी जैसे ही । बहुत ही रसयुक्त, मीठा आलेख है । उमीद है कि आगे जलेबी के जैसे सीधे मुहावरे पर भी कुछ पढ़ने को मिलेगा ।👌👌😅👌👌

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  3. बडी़ स्वाद भरी है आपकी जलेबी

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  4. Chandralekha6:15 pm

    जल वल्लिका ने तो सचमुच मन मोह लिया

    उत्तर देंहटाएं

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