धनञ्जय द्विवेदी की कविताएँ

SHARE:

1. होली ये पावन पर्व है होली का जल मरी इसी दिन होलिका बूढ़े नाचे बच्चे नाचें,नाचे थे किशोर किशोरी सा.... सब मिलकर धूल उड़ाये थे मस्ती में झू...

image

1. होली

ये पावन पर्व है होली का
जल मरी इसी दिन होलिका
बूढ़े नाचे बच्चे नाचें,नाचे थे किशोर किशोरी सा....
सब मिलकर धूल उड़ाये थे
मस्ती में झूमे गाये थे
भाभी वा देवर भी मिलकर
खुब रंग गुलाल लगाए थे
प्रेमीजन भी थे खूब फबे
आपसे में थे बरजोर किए
वे तनिक न आज लजाए हैं
गालों को गुलाल बनाएँ हैं
मल मल कर कपोल को
लाल किए,
कहते थे रंग लगाए हैं ||

[post_ads]

बच्चे भी आज हो गये जवां
बच्ची संग होली खेल रहे
बाबा भी देवर हुए आज
आजी को खूब भरमाए हैं
सब लाज शरम को तज करके
होली का रंग चढ़ाए है ||

है उड़ा गुलाल अब अम्बर में
सब कुछ धुंधला दर्शाता है
रम गए आज सब आपस में
रिश्ता नाता न भाता है
कहते हैं आज है प्रेम का दिन
बस महज प्रेम दर्शाता है
यह प्रेम रंग की रोली है
या बेशर्मों की टोली है
कुछ मुझसे कहा न जाता है
ये कैसा रिश्ता नाता है..... ?||

यह न तो प्रेम की होली है
न बेशर्मों की टोली है
यह पुरूषों की चाल बड़ी
औरत के साथ ठिठोली है

कैसी यह कथा बनाई है
होलिका को आग लगाई है
औरत को जलाकर के देखो
औरत कैसे भरमाई है
ये कैसी लाग लगाई है..?

गोदी में लेकर भक्त प्रह्लाद को
बैठी आखिर होलिका ही क्यो
बैठा न क्यों हिरण्यकशयपु
है प्रश्न उठ रहा मन में यूँ
करुणा,ममता वत्सलता की
प्रतिमूर्ति रही जो नारी है
वह कैसे लेकर बैठ गयी
यह प्रश्न बहुत ही भारी है
जबकि कठोर, निर्मम, निष्ठुर
निर्दयी हृदय है पुरूष रहा
लेकिन वह लेकर न बैठा
यह कैसा है संयोग रहा

ऐसा तो नहीं यह
पुरूष हृदय का
स्त्री से षड़यंत्र रहा.....?

2. तुम्हारे लिए...1

हे सजनी ! तुम इस कदर,
मुझको सताओ मत।

देकर के अश्क-ए गम,
तुम मुस्कुराओ मत।।

हमारे अश्क़ है ये तेरे दिए,
यह भूल जाओ मत।

यूं भींचकर अधरों को अब,
मुसकी दबाओ मत।।

हमारे अश्क की बूदें,
तुम्हें शबनम जो लगती हो

महज़ बस बोल दो तुम ,
ये सनम आँसू सुखाओ मत |

है हक़ तुम्हें अब भी ,
मेरे से बात करने का,

महज तुम लाज की रजनी में,
मुख पंकज छुपाओ मत |

आज़ तुम मुस्कुरा कर बोल दो ,
मेरी वफा सनम,

प्यार मुझसे करो तुम झूमकर
गज़लें बनाओ मत ।

3. प्रेम का सफर प्रेमी से पिता तक, प्रेमिका से माँ तक

हमारे प्यार में उसको
नींद नहीं आती है
और हम हैं कि ,
खर्राटे भर रहे हैं

कहती है कि मैं तेरे
बिन जिन्दा न रह सकूं
मैं कहता कोई किसी बगैर
मरता कहाँ है?

उसने कहा तुम्ही मेरे सर्वस्व हो
मैंने कहा इसके पहले भी
कोई सर्वस्व था !

जवाब मिला हाँ था और है भी
पर तुम से जो प्रेम है
वह प्राञ्जल निस्वार्थ है.

मैंने कहा लेकिन मैं तो किसी
और को प्यार करता हूँ

वह हमारी मंजिल है,
वही आखिरी ख्वाहिश है
उसके बिना सब अधूरा है

उसने कहा ..
आह् !कुछ दिन पहले
मैंने भी कहा था
उनसे ऐसे ही
लेकिन आज तुम सर्वस्व हो मेरे
सबसे अधिक मैं तुम्हें प्यार करती हूँ........

मैंने कहा सच है,
कुछ दिन बाद
वह भी ऐसे ही
प्यार करेगी
किसी और को
और साथ दूंगा मैं भी
तब मैं कौन हूंगा?
वह कौन होगी
जो बात कर रही हैं
वह कौन है?

जवाब ढूंढ़ रहा हूँ........

4. सहबाला

दूल्हे की शादी में
उसका छोटा भाई
बनता है सहबाला,
बनता है सहबाला
तो दुलराया जाता है
बहलाया जाता है
दुलहन की बहनों द्वारा
फ़ुसलाया जाता है

कितना सुन्दर है देखों
दुलराव यह,
फुसलाव यह
बहलाव यह,
मिलती हैं साली सुन्दर ,
चञ्चल मनभावन

[post_ads_2]

उतना ही घातक है
यह दुलराना ,
बहलाना
फुसलाना

जाता है टूट शादी के बाद

जब.....
भाई से बचपन का अफ़साना

5. मंत्र
राम अधार को पता है
बहुत पुराना मंत्र
बिच्छू साँप विषखोपड़े,
सबसे रहे स्वतंत्र

सबसे रहे स्वतंत्र
तनिक न शंका पावे
करे काम तत्काल
वही जो मन को भावे

कहे धनञ्जय उसकी तो
है महिमा अपरम्पार
उन सर्पों को छोड़ हमें
वह झारे राम अधार

6. फुटबाल

मारो ठोकर
हाथों से नहीं पैरों से
मारो ...मारो...
अरे रुको जूते तो पहन लो
तुम्हारे मजबूत जूतों की ठोकर
मुझे उछाल देती है
दस फीट, पन्द्रह फीट
या उससे अधिक
मैं ज़मीन से ऊपर उठकर
गर्व में फूल जाता हूँ
हवा में झूल जाता हूँ
और यह भूल जाता हूँ
कि मुझे यह उछाल
तुम्हारे जूतों की नोक ने दी है
क्यों याद रखूं?
कौन चाहता है?
जूतों की नोक पर रहना
या उस समय को याद रखना
जब वह जूतों की नोक पर था ?

अरे ! यह क्या ?
मैं तुम्हारे जूते की
नोक के नीचे कैसे आ गया
अभी तो उछाला गया हूँ
उनके द्वारा ....

क्या कहा?
मैं उछाला ही इसीलिए गया था
कि तुम्हारे
जूते की नोक पर आ सकूं
आख़िर मैं क्या हूँ?
कब तक खाता रहूँगा
तुम्हारे पैरों की ठोकरें?
और सूंघता रहूंगा
पसीने से तर जुर्राब की बदबू
कब तक......?

तुम फुटबाल हो ,और....
हम एक ही टीम के खिलाड़ी हैं
जो अभ्यास कर रहे हैं
ठोकरें मारने की
वैसे ये ठोकरें मारने की
ताकत तुमने ही दी है
बार-बार मेरा स्पर्श कर
उन्हें मजबूत कर
ठोकर मारने योग्य
तुमने ही बनाया है...

मैं गोल नहीं हूँ
मुझमें हवा भी नहीं भरी है
फिर फुटबाल कैसे?

तो सीधे सुनो
तुम यूपी के शिक्षामित्र
बी.एड, टेट, सी टेट पास
बीटीसी हो
और वह जिसने उछाला था
अखिलेश था
और मैं जो उछाल रहा हूँ आदित्यनाथ हूँ
मेरे फुटबाल उछलते रहो
यही तुम्हारी फ़ितरत है

7. किसान और रूपसी

मैं किसान हूँ !
हे रूपसी !
तुममें हमारे में कोई न फर्क है
जेठ की चिलचिलाती धूप
आषाढ़ की टिपटिपाती बूंद
पौष-माघ की कंपकंपाती ठंड
हमारी त्वचा को त्रास देती है
इन सबसे बचकर तुम
बचाती हो अपने सौन्दर्य को
और इन सब में खटकर मैं
बचाता हूँ अपनी फसल को
फिर तुम्हारी बची हुई शकल
और हमारी बची हुई फसल पर
कितने ही भेड़ियों की नजर होती है
आज तक ऐसी कोई शकल और फसल न हुई

जो इन भेड़ियों से बच सकी हो
इस नियति से रूबरू होकर भी
हम लगाते हैं अपनी फस़ल को
तुम सजाती हो अपनी शकल को
फिर मुझमें और तुममें फर्क क्या है?..........

8. तुम्हारे लिए..2

प्रेयसी का खिलखिलाना
दौड़कर बाँहों में आना
मदभरी पुतली घुमाना
सबको अच्छा लगता है
हमको भी अच्छा लगता है |

पर उसी का रूठ जाना
झटककर बाहें छुड़ाना
नयन से आँसू गिराना
किसको अच्छा लगता है ?
हाँ हमको अच्छा लगता है |

लाज से मुख को छुपाना
झटक अलकों को उड़ाना
चुप्पियों को तोड़ जाना
सबको अच्छा लगता है
हमको भी अच्छा लगता है |

मुख ढ़ंका पर लाज न हो
केश रूखे अधखुले हों
होंठ पाटल भी खुले हों
पर सभी यह अनमने हों
तब किसको अच्छा लगता है?
हाँ हमको अच्छा लगता है |

दूर तुम हो या हो फिर पास
हो खुशी या फिर उदास
तेरा हँसना रोना गाना
मुझको सब अच्छा लगता है |

जब हँसती हो खिलखिल करके
नदियों सी कलकल ध्वनि आती
नयनों से आँसू जब गिरते
लगता है धरित्री को धोते
तब आँसू हो या फिर हँसना
मुझको सब अच्छा लगता है |

जब लाज से मुख को ढकती हो
लगता बदली में चांद छुपा
मुखपर जब उदासी छाती है
लगता रवि पर बादल छाया
फिर हो उदास या शरमायी
मुझको सब अच्छा लगता है |

जब रहती दूर तुम मुझसे हो
सुन्दर सपनों सी लगती हो
जब पास खड़ी हो तुम मेरे
अपनी सांसों सी लगती हो
तब दूर खड़ी हो या फिर पास
सब मुझको अच्छा लगता है

9. हत्यारे

विषैला हो रहा
स्रोतस्वनी का जल
जिसमें मछलियाँ बिलबिला रहीं हैं,
लोभी मांस के बगुले
भर रहे हैं अपनी चोंच उनसे
छूटने को फड़फड़ा रही हैं
मछलियों का बिलबिलाना चोंच में फड़फड़ाना ,
बस एक आस थी शायद
वह चोंच से छूट कर
जीवन के सागर में गिर जाए
जब उसे ज्ञात हुआ कि वहीं बैठे

बाज और चील उसे घूर रहे है,
तब उसने बिलबिलाना और फड़फड़ाना छोड़ दिया
फिर वह बिन मारे मर गयी बेचारी मछली
ऐसे ही बिन मारे
मर रहे हैं हम
और इन हत्यारों का
पेट भर रहा है

10. तुम्हारे फेसबुक चित्र के लिए

बहुत दिनों के बाद दिखी हैं आप,
सोचता हूँ लाइक करूं ,
या बैठ निहारता रहूं |
निहारने से सुनाई पड़ती है
आपकी वह मधुर बोली जो
जो थके हारे को विश्राम् देती थी
पर देर तक निहारना भी ठीक नहीं
लोग कहेंगे कि लोफड़ हूँ |
कहने को क्या ?
कुछ भी कहेंगे
तब भी कहेंगे
अब भी कहेंगे
एक विवेकहीन,
स्वार्थ से घिरा व्यक्ति
और कह ही क्या सकता है
यही सोच कर लाइक भी किया
निहारा भी
और लिख मारा
अब जो कहना हो कहो
मूर्खों क्या फर्क पड़ता है...

11. सस्ती सोच

वें हँसते हैं ....
जब मैं तुम्हारे साथ
उठता-बैठता व बोलता हूँ
वे टोकते हैं ....
जब मैं तुम्हारे
साथ चलता हूँ
क्योंकि .....
तुम लड़की हो
और मैं लड़का हूँ |
पर कभी यह नहीं सोचते
कि मैं उनके साथ
क्यों नहीं हँसता ,
उठता-बैठता व बोलता हूँ !
सच कहूँ.....
उनकी रद्दी मानसिकता से
निकली छल प्रपंच भरी
रद्दी फूहड़ बातों को
सुनने से अच्छा
मैं तुम्हारे साथ रहना
पसंद करता हूँ
उनका हंसना
पसंद करता हूँ

उन सस्ती मानसिकता वालों की
सस्ती सोच उन्हे मुबारक हो......
मैं उनके साथ बैठ
घुटने से अच्छा
तुम्हारे साथ चलना
पसंद करता हूँ

12. दिल की बात

हाँ हम पहनते हैं जनेऊं,
लगाते हैं चंदन, बाँधते हैं कलावा
जाते हैं मंदिर चढ़ाते हैं कांवर
होली मनाते हैं, दीपावली में
दीपक जलाते हैं
दशहरा व दुर्गा पूजा
बड़ी धूम से मनाते है
क्योंकि हम हिन्दू हैं

तुम जाते हो मस्जिद
पढ़ते हो नमाज, पहनते हो टोपी
मनाते हो मोहर्रम, बजाते हो ढोल
इद बकरीद उरूस, मिलाद
सब कुछ बड़े प्यार से मनाते हो
क्योंकि तुम मुस्लिम हो

हम हमारा धर्म और तुम तुम्हारा धर्म
निभा रहे हैं फिर भी तुमको बुला रहे हैं

आओ पकड़ो रंगबाल्टी खेलो होली
दीपावली में दीप जला तुम भर लो झोली
दुर्गापूजा और दशहरा तुम्हें दिखाएँ
कलावा जनेऊ का हम राज बताएँ
जब मैं कांवर ले जाऊं तुम पंथ बुहारो
मेरी मंदिर में तुम अपनी चादर वारो
पर मस्जिद का मार्ग हमें अपने दिखलाओ
मोहर्रम में ढोल नगाड़े हमेशा भी बजवाओ
ईद मनाओ तब हमको भी गले लगाओ
कुर्बानी की गाथा अपनी हमें सुनाओ

आते तो हम अब भी हैं एक दूजे़ के त्योहारों पर
भरी हुई बंदूकें और तलवारों की धारों पर
पर ऐसे आने से देखो मनुष्यता मरती है
लहू की धारा बहती वा नफरत की बेलें पलती है
बन्दूकें तलवारें अपनी फेंककर आओ
हम मानव हो जाएँ और तुम भी मानव हो जाओ

13. बचपन की यादें

याद आती है,
हाँ मुझे याद आती है
वो बचपन की बातें मुझको बहुत लुभाती हैं

वो सुन्दर से दिन, वो ख्वाबों की रात
वो पाटी वो बुदके किताबों की बात
गुल्ली-डण्डा कबड्डी वो कुश्ती की बात
वो नहर की बैठक वो बस्ती की बात
वो धनुष वो तरकश वो लट्टू की बात
वो घोड़े वो हाथी वो टट्टू की बात
वो गड़रे की गाँठें, वो झुरुमुट की बात
वो कौरे के आलू लड़ाई की बात
वो चूल्हें वो चौकें, पढ़ाई की बात
वो खो खो वो लुकम-छिपाई की बात
वो पापा मामा के बड़ाई की बात
वो पिंटू की हरकत पिटाई की बात
फिर मम्मी की डांटे वो लोरी की रात
याद आती हैं,
हाँ मुझे याद आती हैं
वो बचपन की बातें मुझको बहुत लुभाती हैं

वो मक्कों वो चनों के खेतों की बात
चोरी से तोड़े अमरूदों की बात
वो ककड़ी वो खीरों खरबूजों की बात
वो भैसों गायों के चरवाहों सी बात
वो झगड़ों वो रगड़ों खुराफातों की बात
वो झूलों वो फूलों वो भूलों की बात
जुम्मन मिया के वसूलों की बात
वो हरखू की बिटिया की तुतली सी बात
वो चंदन की डिबिया वो मछली सी आँख
वो पापा चाचा की लड़ाई की बात
वो आपस में घर की बटाई की बात
फिर मम्मी के साड़ी के सिकुड़न की बात
वो जाड़ों की रातें वो ठिठुरन की बात
फटीहाल जेबें और पापा की आस
याद आती हैं
हाँ मुझे याद आती हैं
बचपन की बातें मुझको बहुत लुभाती हैं ||

---

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: धनञ्जय द्विवेदी की कविताएँ
धनञ्जय द्विवेदी की कविताएँ
https://lh3.googleusercontent.com/-xqzodESznQM/W7hsH-klbsI/AAAAAAABEhI/YctqJvXG8HU5ibD0lmih5A5Z6RVRujZzACHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-xqzodESznQM/W7hsH-klbsI/AAAAAAABEhI/YctqJvXG8HU5ibD0lmih5A5Z6RVRujZzACHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/10/blog-post_6.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/10/blog-post_6.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content