रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

प्र्रगतिवादी-जनवादी कवि महेन्द्रभटनागर ने बताया : डॉ. भूपेन्द्र हरदेनिया

साझा करें:

वार्तालाप एवं आत्म-कथ्य  // महेन्द्र भटनागर प्र्रगतिवादी-जनवादी कवि महेन्द्रभटनागर ने बताया : डॉ. भूपेन्द्र हरदेनिया 1 : आप अपने बाल्यकाल के...

image

वार्तालाप एवं आत्म-कथ्य  // महेन्द्र भटनागर

प्र्रगतिवादी-जनवादी कवि

महेन्द्रभटनागर ने बताया :

डॉ. भूपेन्द्र हरदेनिया

1 : आप अपने बाल्यकाल के अनुभवों के बारे में, अपने कवि के मन पर पड़े शुरूआती प्रभावों और निर्णायक प्रसंगों के बारे में कुछ बताएँ।

सर्वप्रथम कविता-विधा के प्रति आकर्शण उत्पन्न हुआ। कविता से परिचय सबसे पहले घर में हुआ। बहुत-कुछ घर के सांस्कृतिक वातावरण के फलस्वरूप। माता जी-पिता जी द्वारा ‘रामचरित मानस’ / वैदिक ऋचाओं का गान / पाठ करने, तीज-त्योहारों एवं विशिष्ट अवसरों पर घर-पड़ोस की महिलाओं द्वारा गायन करने, यहाँ-तक कि मुहल्ले में जब-तब किसी फ़कीर / साधु के गाते हुए गुज़रने पर मेरी काव्य / गायन चेतना जाग उठती थी। सब काम छोड़कर मैं संगीत-गान की तरफ़ खिँच जाता था। तदुपरांत पाठशाला / विद्यालय में साहित्य / काव्य के अध्ययन ने मेरे मन में कविता के प्रति रुचि ही उत्पन्न नहीं की, काव्य-संस्कार भी दिये। और जब बष्हत् समाज से जुड़ा तो नगर के साहित्यिक परिवेष ने प्रभावित किया। कवि-सम्मेलनों / मुशायरों को सुनने में ख़ूब आनन्द आता था। आसपास के सामाजिक जीवन और प्राकृतिक दृष्यों ने भी कोई कम प्रभावित-आकर्शित नहीं किया।

2 : आपने कविता लिखना कब से शुरू की? यदि स्मरण हो तो यह भी बताइए कि, पहली कविता का विशय क्या था? साथ ही यह भी बताइए कि आपकी पहली कविता किस पत्रिका में और कब छपी थी?

परिवारिक संस्कारों से प्रभावित होने के फलस्वरूप बचपन से ही कविता पढ़ने-लिखने में रुचि उत्पन्न हो गयी थी। लगभग बारह वर्ष की उम्र से ही कविता ‘करने’ लगा था। बचपन में लिखे बाल-प्रयासों का आज कोई अस्तित्व नहीं। (देखें - आत्म-कथ्य / ‘समग्र’ : खंड -1 / पष्. 309-310) पहली कविता का विषय तो ज्ञात नहीं; प्रारम्भिक कविताओं के विषय अधिकतर प्राकृतिक दष्श्य हुआ करते थे। सन् 1941 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उच्च-शिक्षा ग्रहण करने हेतु, जुलाई में, ‘विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर’ में प्रवेश लिया। कॉलेज अध्ययन-काल में लेखन और साहित्यिक गतिविधियों में रुचि बढ़ती गयी। साथी छात्र-साहित्यकारों के बीच पर्याप्त समय व्यतीत होता। इन दिनों ‘अज्ञात’ उपनाम से लिखता था। मेरी पहली कविता ‘सुख-दुख’ विक्टोरिया कॉलेज की वार्षिक पत्रिका ‘विक्टोरिया कॉलेज मैगज़ीन’ के किसी अंक में (सम्भवतः सत्र 1943-1944 के अंक में) प्रकाशित हुयी :

सुख-दुख तो मानव-जीवन में बारी-बारी से आते हैं,

जो कम या कुछ अधिक क्षणों को मानव-मन पर छा जाते हैं!

मानव-जीवन के पथ पर तो संघर्ष निरन्तर होते हैं,

पर, गौरव उनका ही है जो किंचित धैर्य नहीं खोते हैं!

यह ज्ञात सभी को होता है, जीवन में दुख की ज्वाला है,

यह भास सभी को होता है, जीवन मधु-रस का प्याला है!

हैं सुख की उन्मुक्त तरंगें, तो दुख की भी भारी कड़ियाँ,

ऊँचे-ऊँचे महल कहीं तो, हैं पास वहीं ही झोंपड़ियाँ!

कितनी विपदाओं के झोंके आते और चले जाते हैं,

कितने ही सुख के मधु सपने भी तो फिर आते-जाते हैं!

क्या छंदों में बाँध सकोगे जन-जन की मूक व्यथाओं को?

औ‘ सुख-सागर में उद्वेलित प्रतिपल पर नव-नव भावों को?

सन् 1941 में लिखित, यह कविता ‘विहान’ नामक कविता-संग्रह में समाविष्ट है (क्र. 25)।

अचानक, एक दिन विदित हुआ कि यह कविता, ‘संचालनालय पाठ्य-पुस्तक, कर्नाटक सरकार’ द्वारा प्रकाशित, दसवीं कक्षा की पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी भारती’ (हिन्दी मातष्भाषा वाले छात्रों के लिए) में समाविष्ट की गयी है (2004)।

वस्तुतः, किसी साहित्यिक पत्रिका में प्रकाशित मेरी प्रथम कविता ‘हुंकार’ है। सन् 1944 में लिखित ‘हुंकार’ कविता, कलकत्ता से प्रकाशित होने वाली, अपने समय की सवोत्कृष्ट मासिक पत्रिका ‘विशाल भारत’ के मार्च 1944 के अंक में प्रकाशित हुयी। यह कविता ‘टूटती शृंखलाएँ में संकलित है ( क्र. 27)ः

हुंकार हूँ, हुंकार हूँ!े

मैं क्रांति की हुंकार हूँ!

मैं न्याय की तलवार हूँ!

शक्ति जीवन जागरण का

मैं सबल संसार हूँ!

लेक में नव-द्रोह का

मैं तीव्रगामी ज्वार हूँ!

फिर नये उल्लास का

मैं शान्ति का अवतार हूँ!

हुंकार हूँ, हुंकार हूँ!

मैं क्रांति की हुंकार हूँ!

3 : आप किस कवि से अधिक प्रभावित हैं या रहे हैं? उनकी कुछ उल्लेखनीय रचनाएँं, जिनसे आपके लेखन को गति या दिशा मिली?

मेरी किशोर अवस्था मुरार-ग्वालियर में व्यतीत हुई। यहाँ मैं यशस्वी कवि श्री. जगन्नाथप्रसाद मिलिन्द और श्री. शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ के घनिष्ठ सम्पर्क में आया। इनके एक पारिवारिक सदस्य के रूप में काफ़ी लम्बे समय तक इनके साथ रहा। इनका अपार स्नेह मुझे निरन्तर मिलता रहा। मेरे यह सम्बन्ध दो पीढ़ियों के थे। मेरे पिताश्री ग्वालियर-रियासत के प्रमुख शिक्षा-शात्रियों में से थे। मिलिन्द जी और ‘सुमन’ जी उनके आात्मीय रहे। जाने-अनजाने में, उनके काव्य-संस्कारों से प्रभावित हो जाना मेरे लिए अस्वाभाविक नहीं।

4 : वर्तमान में क्या कविता के द्वारा समाजार्थिक बदलाव सम्भव है?

सक्रिय रूप में, कविता किसी बदलाव में कभी सहायक हो अथवा नहीं; वह बदलाव के लिए अनुकूल भूमि ज़रूर तैयार करती है। जनमत तैयार करना कोई साधारण कार्य नहीं। जनकवि ही समाज में चेतना उत्पन्न कर सकता है। आन्दोलनों के दौरान तो कविता क्रांतिकारियों-परिवर्तनकामियों के कंठ में विद्यमान रहती है।

5 : क्या कवि के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता का होना आप ज़रूरी मानते हैं। यदि हाँ तो क्यों? यदि नहीं तो क्यों?

वैचारिक प्रतिबद्धता बिना कोई कैसे जी सकता है? बुद्धिजीवी अथवा सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करनेवाला रचनाकार वैचारिक प्रतिबद्धता से असम्बद्ध रह ही नहीं सकता। वह कोई बे-पेंदी का लोटा नहीं होता। उसके अपने विचार होते हैं, उसके अपने विश्वास होते हैं। उसकी अपनी आस्थाएँ-धारणाएँ होती हैं। उसका आन्तरिक व्यक्तित्व उसके अनुभव और उसकी दष्ष्टि से आकार ग्रहण करता है। कहना ज़रूरी नहीं, ऐसे पात्रों को अपने मस्तिष्क के द्वार सदैव खुले रखने चाहिए। वह जड़ न हो। युग के अनुरूप उसका चिन्तन हो। ऐसे परिवर्तन को विकास की संज्ञा दी जाती है।

6 : लेखन एक सामाजिक दायित्व है। अतः आप बताइए कि लेखक का क्या कुछ भी निजी नहीं रह पाता?

निःसंदेह, लेखन सामाजिक दायित्व है; लेकिन उसमें व्यक्तिगत जीवन और अनुभूतियों की अभिव्यक्ति भी सहज होती है। रचनाकार का निजी जीवन जब साहित्य का आकार लेता है तो वह मात्र रचनाकार का निजी जीवन नहीं रहता; वह जन-जन का बन जाता है। वह सामाजिकों के जीवन से भिन्न नहीं होता। उसमें जो.कुछ रहता है; वह यथार्थ होता है। वह व्यक्ति का यथार्थ होता है। ज़ाहिर है, वह मनोविज्ञान के नाम पर अजनबी और कपोल कल्पित नहीं होता। उसमें अनुभव की सचाई और गहराई होती है। मेरी काव्य-सष्ष्टि में ऐसा बहुत है; जो व्यक्तिगत जीवन के अनुभूत क्षणों से सम्बद्ध है। अक़्सर ऐसा साहित्य पुनआर्हूत होता है। माना वह शतप्रतिशत यथावत् नहीं होता; नहीं हो सकता। मेरे काव्य में जो वेदना और दर्द है; वह मेरे निजी जीवन से उद्भूत है। समाज और घर से सताया हुआ इंसान कब-तक नक़ाब ओढ़े रहे! इस संदर्भ में मेरी ‘जीवन-राग’ और ‘अनुभूतियाँ : एक हताश व्यक्ति की’ रचनाएँ द्रष्टव्य हैं। ‘कविश्री : महेन्द्रभटनागर’ (संयोजक - डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ / सम्पादक - डॉ. शम्भूनाथ चतुर्वेदी / प्रकाशक - सेतु प्रकाशन, झाँसी-उ.प्र.) की भूमिका में सम्पादक ने, सम्भवतः मेरी ऐसी रचनाओं को पढ़कर ही, मेरे कवि को ‘ट्रेजेडी ऑफ़ लाइफ़’ का कवि रेखांकित किया है। मेरी काव्य-सष्ष्टि का एक भाग बड़े गहरे नीले तन्तु से आवेष्टित है। इस प्रकार की अभिव्यक्ति में मैंने कभी किसी की परवा नहीं की। दर्द हो या प्रेम। उसे अपनापन दिया। उसे कला से सज्ज और सौन्दर्य से दीप्त किया।

7 : आपके विचार से कला का संबंध कलाकार के जीवन से कितना और किस प्रकार का है ? क्या वही कला महत्ता प्राप्त कर सकती है जिसका सम्बन्ध कलाकार की जीवन-यात्रा से होता है ?

रचना-क्रम में रचनाकार ही प्रमुख होता है। अप्रत्यक्ष रूप से रचनाकार अपनी कृति से अटूट रूप से सम्पृक्त रहता है। उसका व्यक्तित्व उसकी रचना-सष्ष्टि में घुल-मिल जाता है। तभी तो हम कहते हैं - वाल्मीकि के राम / तुलसीदास के राम। जीवन-यात्रा यदि रचनाकार को प्रभावित करती है एवं उसे दिशा देती है तो उसके द्वारा रचित साहित्य प्रथम कोटि का प्रामाणिक साहित्य होगा।

8 : क्या रचनाकार हर समय रचनात्मक रहता है या एक विशेष कलात्मक अनुभव के क्षण के उपरान्त वह सामान्य व्यक्ति जैसा हो जाता है? आपका इस संबंध में क्या अनुभव है?

निःसन्देह, रचनाकार भी सदा सामान्य ही रहता है। साहित्य-रचना के क्षणों में तो विशेष रूप से सामान्य। किसी आध्यात्मिक या रहस्यमय लोक की कल्पना करना हासास्पद है।

9 : आपकी काव्य रचना-प्रक्रिया क्या है ? आप उसे कितने स्तरों में बाँटते हैं?

हमने तथाकथित अपनी रचना-प्रक्रिया के सन्दर्भ में कभी सोचा नहीं। काव्य-रचना यांत्रिक कैसे हो सकती है? स्वयं के संस्कारों, स्वभाव, शिक्षा-दीक्षा और अनुभवों से रचना-शिल्पी का संचालित होना स्वाभाविक है।

10 : सृजन के क्षणों में आपके मन की क्या गति होती है? आप कैसी मनःस्थिति में कविता लिखते हैं ?

स्ृजन के क्षण एकाग्रता की अपेक्षा करते हैं। सर्जना के लिए शान्ति और सुविधा ज़रूरी है। रचनाकार को किसी के सहयोग की ज़रूरत नहीं होती। अकेलापन उसके लिए वरदान है। सष्जन के क्षणों में रचनाकार समाधिस्त हो जाता है। जब-तक वह रचना-रत रहता है; बाहर की दुनिया से कटा रहता है।

11 : कविता के सृजन के दौरान आपकी भाष्ेा किस प्रकार के रचनात्मक तनाव से गुज़रती है ?

प्रत्येक कवि का अपना व्यक्तित्व होता है। उसकी अपनी भाषा और भाषा-लय होती है। अक़्सर, शब्द-चयन के संदर्भ में रचनात्मक तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है।

12 : कविता का सौंदर्यशास्त्र से क्या सम्बन्ध होता है या होना चाहिए?

कविता और सौंदर्य-शास्त्र का सम्बन्ध अटूट है। सौन्दर्य के मापदंडों का पालन रचनाकार को करना ही पड़ता है। अन्यथा उसकी काव्य-सृष्टि असंगत हो उठेगी। कविता में, रेखाएँ, रंग, आकार, पृष्ठभूमि, आधार, आदि को युक्तियुक्त बनाने में सौंन्दर्य-शास्त्रीय नियमों और व्यवस्थाओं पर ध्यान देना अनिवार्य है।

13 : कविता के विकास और सार्थक फैलाव में मल्टीमीडिया की भूमिका एवं कविता की वर्तमान स्थिति के बारे में आपके क्या विचार हैं?

निःःसन्देह, मल्टीमीडिया बड़ा सशक्त माध्यम है। कविता के विकास और सार्थक फैलाव में उसकी भूमिका निर्विवाद रूप से अति महत्त्वपूर्ण है। वर्तमान में, हिन्दी में, कविता-रचना कोई कम नहीं हो रही। बौद्धिक दष्ष्टि से समष्द्ध अनेक समर्थ कवि आजकल रचना-रत हैं। हिन्दी में ऐसा माहौल प्रथम बार देखने में आ रहा है।

14 : आज के टेक्नोलाजी के युग में शहरीकरण, बाज़ारवाद और उपभोक्तावाद के नये रूप उभर कर आये हैं और एक सर्वव्यापी मूल्यहीनता ज़्यादा विकराल हुई है-इन दबावों ने आज लिखी जा रही हिंदी कविता को किस रूप में प्रभावित किया है?

मूल्यहीनता है तो मूल्यों के प्रति आस्था भी है। भारतीय कविता का अपना मौलिक स्वरूप अक्षुण्य है; अक्षुण्य रहेगा। समसामयिकता और निरन्तरता के दो तटों के बीच हिन्दी / भारतीय कविता-गंगा सदा प्रवाहित होती रहेगी।

15 : पिछले एक दशक की आपकी मनपसंद पाँच श्रेश्ठ कहानियॉं कौन-सी हैं?े

कहानियों का मैं नियमित व विशिष्ट पाठक या आलोचक नहीं। पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित अद्यतन कहानियों को प्रायः पढ़ता हूँ। पत्र-पत्रिकाओं से जब-तब कहानी-संकलन समीक्षार्थ आते रहते हैं। उन पर अपने विचार दर्ज़ करता ही हूँ। द्रष्टव्य, इधर ‘जनसत्ता’ में प्रकाशित मेरी पुस्तक-समीक्षाएँ। प्रमुख कहानी-लेखकों और उल्लेख्य कहानियों पर मेरे आलेख मेरे आलोचना-समग्र में समाविष्ट हैं। (‘साहित्य : विमर्श और निष्कर्ष’ / खंड - 1 में। प्रेमचंद-विरचित कहानियों पर एक पुस्तक पष्थक से प्रकाशित है।)

16 : आपकी कहानी की रचना-प्रक्रिया क्या है तथा आप उसे कितने स्तरों में बाँंटते हैं?

कहानी मैंने अत्यल्प लिखीं। मेरे संदर्भ में, इस विधा पर चर्चा करने का औचित्य प्रतीत नहीं होता। लिखने को तो कहानियाँ, लघु कथाएँ, रिपोर्ताज़, संवाद / कथोपकथन आदि लिखे। दो कृतियाँ प्रकाशित हुयीं - ‘लड़खड़ाते क़दम’ और ‘विकृतियाँ’। ‘विकृत रेखाएँ : धुँधले चित्र’ नामक संकलन में ये दोनों कृतियाँ समाविष्ट हैं। ये पुस्तकें अब अनुपलब्ध हैं। अद्यतन समग्र संकलन ‘जीवन का सच’ अभिधान से प्रकाशित हुआ है; जिसकी भूमिका लघु-कथा के पुरस्कर्ता डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी ने लिखी है। प्रकाशक हैं - अंकित पब्लिशिंग हाउस,, दिल्ली -53. ‘लड़खड़ाते क़दम’ ‘मध्य-भारत कला-परिषद्’ द्वारा पुरस्कृत भी है! लघु-कथाएँ अधिकतर कलकत्ता से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका ‘रानी’ में प्रकाशित हुयीं।

17 : क्या कविता लिखते समय आप समाधिस्थ होते हैं या यूँ ही चलते फिरते कविता गढ़ लिया करते हैं?

इस सम्बन्ध में बताया जा चुका है। यों ही चलते-फिरते कविता गढ़ लेने की बात औरों के सन्दर्भ में लागू हो सकती है; जो ‘कविता’ गढ़ लेते है! मैं ऐसा ‘लिख्खाड’़ नहीं। कविता तो रची जाती है; कही जाती है। प्रत्येक सिद्ध कवि का अपना ‘अन्दाज़े बयाँ’ होता है। मैंने कविताएँ अधिक नहीं लिखीं। एक-हज़ार से कम ही होंगी। जीवन-संघर्ष ने इतना अवकाश नहीं दिया। जीवन के कड़वे अनुभवों ने भी बाधा पहुँचायी। मात्र मन करने से इच्छा साकार नहीं हो सकती; सुविधा मिले। परिवेश और अनुकूलता की बात नहीं करता।

18 : आप अपनी कविता को किस श्रेणी में रखते हैं?

किसी कवि की श्रेणी निश्चित करना आधिकारिक, प्रामाणिक और सर्वमान्य आचार्यों द्वारा ही सम्भव है। तात्कालिकता से इसका वास्ता नहीं होना चाहिए। ऐसे मत पर्याप्त काल-विस्तार की अर्थात् र्प्याप्त समय गुज़र जाने की अपेक्षा रखते हैं।

19 : हिन्दी कविता की वर्तमान स्थिति पर आपकी क्या राय है?

इस सम्बन्ध में भी बताया जा चुका है। मैं आशावादी हूँ। वर्तमान हिन्दी कविता-लेखन से संतुष्ट हूँ। सर्वत्र कविता की उपस्थिति हमें आश्वस्त करती है। अधिकांश रचनाकार कवि कहलाना पसन्द करते हैं। काव्य-कृतियाँ ख़ूब छप रही हैं। ख़ूब पढ़ी-सुनी जा रही हैं। कवि-सम्मेलनों में, साहित्यिक गोष्ठियों में, संसद् में, विभिन्न आन्दोलनों में। हर विशिष्ट कवि या कविता-प्रेमी निकल पड़ता है। राष्ट्रपति हो, प्रधानमंत्री हो, वैज्ञानिक हो, इंजीनियर हो, बैंक-कर्मी हो, डॉक्टर हो, प्रोफ़ेसर-अध्यापक हो, अभिनेता-अभिनेत्री हो।

20 : इन दिनों आप क्या लिख-पढ़ रहे हैं?

90 पार कर गया हूँ; अपने को समेट रहा हूँ। माना, लिखना-पढ़ना कम हो गया है; लेकिन अंत समय तक भी बंद नहीं होगा। ‘राम-भजन’ नहीं करना! ‘मष्त्यु-बोध : जीवन-बोध’ की कविताएँ मेरी शव-यात्रा में गूँजें।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3841,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2786,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,831,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,4,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1919,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,648,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्र्रगतिवादी-जनवादी कवि महेन्द्रभटनागर ने बताया : डॉ. भूपेन्द्र हरदेनिया
प्र्रगतिवादी-जनवादी कवि महेन्द्रभटनागर ने बताया : डॉ. भूपेन्द्र हरदेनिया
https://lh3.googleusercontent.com/-6NWCvLFcAA8/W8bcNGy11_I/AAAAAAABEwo/P8dOxcl7UPgIZCg5lqLuVyRxb2XtM2OggCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-6NWCvLFcAA8/W8bcNGy11_I/AAAAAAABEwo/P8dOxcl7UPgIZCg5lqLuVyRxb2XtM2OggCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/10/blog-post_82.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/10/blog-post_82.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ