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साझा काव्य संग्रह “चलो, रेत निचोड़ी जाए” का लोकार्पण

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साहित्यिक समाचार

साझा काव्य संग्रह “चलो, रेत निचोड़ी जाए” का नई दिल्ली में लोकार्पण समारोह

दिनांक 2 सितंबर, 2018 को सायंकाल कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में प्रसिद्ध कवि श्री ओम प्रकाश कल्याणे और पत्रकार-लेखक प्रकाश हरि के प्रबंधन में दो पुस्तकों के लोकार्पण का एक व्यापक साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लब्ध-प्रतिष्ठ राजनेता और केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया ने की जबकि मुख्य अतिथि वयोवृद्ध प्रतिष्ठित कवि श्री बाल स्वरूप राही थे। मंचासीन प्रतिष्ठित साहित्यकारों में श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, डॉ कीर्ति काले, डॉ मनोज मोक्षेंद्र, तथा श्री प्रेम बिहारी मिश्र के अतिरिक्त प्रसिद्ध मंचीय कवि श्री बी एल गौड़, विख्यात समाजसेवी श्री सूरजभान कटारिया भी उपस्थित थे।

श्री सत्यनारायण जटिया द्वारा लोकार्पित साझा काव्य संग्रह “चलो रेत निचोड़ी जाए” की समीक्षा प्रख्यात साहित्यकार डॉ मनोज मोक्षेंद्र ने की जिन्होंने अपने मुख्य संपादन और ख्यात कवि श्री ओम प्रकाश कल्याणे के सह-संपादन में संग्रह में संकलित सोलह कवियों की गीत-गज़लों-कविताओं को सजाया है। संग्रह की भूमिकाएं प्रसिद्ध कवि डॉ कुँवर बेचैन, डॉ कीर्ति काले, डॉ मनोज मोक्षेंद्र और श्री ओम प्रकाश कल्याणे ने लिखी है। इसमें संकलित रचनाओं को सभा में उपस्थित सभी श्रोताओं और साहित्य पिपासुओं ने मुक्त कंठ से सराहा।

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प्रसिद्ध मंच-संचालक डॉ. विवेक गौतम ने अपनी आकर्षक एवं गरिमामय शैली में संचालन से कार्यक्रम में जिस प्रकार चार चाँद लगा दिए।

अपने समीक्षात्मक वक्तव्य में डॉ मनोज मोक्षेंद्र ने कहा कि साझा काव्य संग्रह “चलो रेत निचोड़ी जाए” में समय की रेत कोनिचोड़कर इस शुष्क जीवन का पोषण करने के लिए रस निकालने का दमखम है। उन्होंने आगे कहा कि इन ग़ज़लों में सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक अधोपतन की जमकर नंगाझोरी कर रही हैं। हमें याद है कि जब शुरुआती दौर में हिंदी में ग़ज़लें लिखी गईं तो उनमें ज़्यादातर प्यार-मोहब्बत,मिलन-विछोह या रोमानी भाव वाले विचार ही प्रमुख होते थे। हिंदी ग़ज़ल को यह लक्षण उर्दू ग़ज़लों से विरासत में मिला था। चुनांचे, हिंदी ग़ज़ल ने उसरोमानी आग्रह को तिलांजलि देकर अपना नया आधार बनाया और उसने आम आदमी की अभावग्रस्त ज़िंदग़ी से शादी रचा ली।

लगभग चार घंटे तक चले इस लोकार्पण समारोह में डॉ. अशोक ‘मधुप’, फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रदीप जैन, कुलदीप सलिल, ओम सपरा, आर.के. महाजन, सूक्ष्मलता महाजन, ममता किरण बाजपेई, मनोज अबोध, रूबी मोहंती, सरफ़राज़ अहमद ‘फ़राज़’ देहलवी, अनुज, वी.के. मन्सोतरा, शैल भदावरी, ताराचंद शर्मा ‘नादान’, रविन्द्र भारद्वाज, सुलेखा मिश्र, रुचि मन्सोतरा, श्रीकांत काले, दिल्ली-दूरदर्शन के विकास गुवालानी, आकाशवाणी की उमा शर्मा, 'सुख दुःख के साथी संस्था' से डीसी माथुर, डी.कुमार, जे के जिंदल, एम एल लूथरा, एस सी चावला, जी पी नौटियाल, आरके शर्मा, पी एस राठी, जोगिन्दर मलिक, विजय नारायण व डॉ. अनीता श्रीवास्तव जैसे अनेक मूर्घन्य साहित्यकार, पत्रकार एवं राज्यसभा के अधिकारी उपस्थित थेl विशेष उपस्थिति मुम्बई से आए फिल्म जगत के पत्रकार, साहित्यकार,समीक्षक, वृत्तचित्र निर्माता डॉ. राजीव श्रीवास्तव की रही।

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उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में श्री प्रेम बिहारी मिश्र के मुक्तक संग्रह “झालर मोतियों की” का भी लोकार्पण किया गया तथा श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने इस पुस्तिका पर समीक्षात्मक वक्तव्य दिया।

कार्यक्रम में डॉ मनोज मोक्षेंद्र और ग़ज़लकार मकीम कोंचवी को ‘साहित्य रत्न सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

कार्यक्रम के अंत में श्री बाल स्वरूप राही जी ने अपना उपसंहारात्मक वक्तव्य दिया और सभी रचनाकारों को बधाई दी। श्री ओम प्रकाश कल्याणे ने सभी श्रोताओं, रचनाकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्य-प्रेमियों को भावभीनी धन्यवाद दिया।

-प्रस्तुति—प्रतीक श्री अनुराग,

(ख्यात पत्रकार, लेखक, कवि और स्तंभकार)

मुख्य संपादक—‘वी विटनेस’

लखनऊ-वाराणसी-ग़ाज़ियाबाद

साहित्यिक गतिविधियाँ 3959320826928922345

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