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हास्य -व्यंग्य // ताले में जिंदगी // सुरेश खांडवेकर

सुरेश खांडवेकर

मानव चांद पर पहुंच गया। मिसाइलों से लड़ने लगा। यहां तक कि उसने चलता-फिरता और आज्ञाकारी ढांचा रॉबोट बना दिया। भूख और आवास की परेशानी से सारा विश्व चिंतित है। अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक संतति निरोध पर बल दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ कृत्रिम मानव का उत्पादन होने लगा है। जहां मानव रोटी खाता है, वहां कृत्रिम मानव ईंधन और बिजली। भूख दोनों को ही है। लेकिन वह संतति को प्राकृतिक उपज मानता और कृत्रिम को मानव अपनी।

इतनी प्रगति के बावजूद वह मनुष्य के मानस की थाह नहीं जान पाया। आदमी ईमान पर विजय नहीं पा सका। अन्यथा मानव का मानव से विश्वास नहीं उठता। ना ही हांडमांस के अलावा बुद्धि रखने वाले मानव की अपेक्षा वह लोहे के आदमी का ज्यादा भरोसा करता।

हम इतनी दूर की सोचते हैं कि पास की खबर ही नहीं। वरना चाँद पर चढ़ने वाले मानव का साम्राज्य ताले में बंद क्यों होता? जीवन और व्यवसाय की बारीकियों को कम्प्यूटर में झांकने वाला मानव, कम्प्यूटर को ताले में बंद क्यों करता?

जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य ताला-चाबी के रिश्तों को नहीं भुला पाया। भ्रम-विभ्रम का संस्कार उसका प्राकृतिक गुण और दोष बन गया है। वरना तालों से जुड़े शब्द और मुहावरे ही उत्पन्न न होते। दबाव में बंद कारोबार को हड़ताल या तालाबंदी कहते हैं, तो दबाये माल की पुष्टि के लिये जांच पड़ताल। संगीत में ताल गति और लय हैं। संगति में ताल ठोकने से लय बनती है, कारोबार में ताला ठोकने से कारोबार की गति रुकती है। तो दौड़ने की गति में अवरोध से कदमताल की शुरूआत। पहलवान ताल ठोकता है तो प्रतिद्वंद्वी को लड़ने का न्यौता देता है। आक्रामक का ताला तोड़ना श्रमिकों का अधिपत्य या भागीदारी। और ताला खुलवाना दोनों पक्षों की सहमति। अपनी लय में बोलने वाले वाचाल के सम्मुख प्रश्न चिन्ह। बोलती बंद होने पर जबाव पर ताले पड़ जाते है।

हिंसक और दुर्दान्त के पांवों में पड़ी बेड़ियां और हथकड़ियाँ भी तो ताले-तालियों के ही कठोर वंशज या अग्रज हैं।

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अपनों से चोरी का भय, चोरों से चोरी का भय। पड़ोसियों से चोरी का भय। विश्वास न टूटने का भय, नियंत्रण न छूटने का भय, अपव्यय होने का भय, भय का भय। न जाने कितने भ्रम विभ्रम से मनुष्य स्वयं को ताले में बंद कर रखता है। इतना कि सड़क के द्वार के ताले से लेकर मुख्य द्वार और अलग-अलग कमरों को छोड़िये ताले में ताला, ताले में ताली और तालियों में तिल्लियां . . .। जिन्हें अपने तालों पर भरोसा नहीं, वे बैंकों के ताले किराये पर लेते हैं और जिन्हें अपने बैंकों पर भरोसा नहीं। वे स्विस बैंको के सहारे हैं। तब कहीं जाकर वही मनुष्य स्वयं को निर्भीक मानकर खुशहाली और भरे पेट की डकार छोड़ता है। आखिर अपने ही बनाए अविश्वास के सागर में कहीं न कहीं ताले का टापू तो मिल ही जाता है।

कितने ही तरह की चोरी से सावधान रखने के लिये ताला समाज को बढ़ावा मिला। हालांकि पुश्तैनी डाकूओं, चतुर-चोरों और उचक्कों ने समाज को सतयुगी से कलयुगी बनाने के लिये हजारों ताले तोड़े। लोगों को निर्भय रहने का संकेत दिया। किंतु बिना ताले के सतयुगी समाज की कल्पना अभी तक अधूरी है।

यह बात अलग है कि ज्यादातर ताले इसलिये लगाये जाते हैं कि हमारा आपस में विश्वास बना रहे। पड़ोस धर्म निश्छल रहे। भाई-भाई में भेद न हो। चाचा-भतीजों में स्नेह बना रहे। सास-बहू में झगड़े न हों। फिर भी, ताला होने से और न होने से भी कलह का शाश्वत इतिहास है। इसलिये आधुनिक युग में दरवाजों पर खुल्लम खुल्ला तालों का रिवाज कम होने लगा है। ताला हो भी और दिखाई भी न दे। घर के, बाहर के, चोरों के डर से चोर ताले लगाने का नया चलन।

हैंडलों के अभाव में पेशेवर चाबीबाज तालों का धड़ को ऐसे पकड़ कर तोड़ते हैं जैसे ककड़ी। तालों की इस दर्दनाक हत्या को तालेबाज सहन नहीं कर सके। इसलिए उन्होंने लटकने वाले तालों के स्थान पर हैंडल वाले तालों का अविष्कार किया। ताला टूटता है तो हैण्डल बना रहता है और हैण्डल टूटता है तो ताला बना रहता है। दोनों एक-दूसरे की हिस्सेदारी में शामिल।

वैसे तालों की जाति-प्रजाति और उसके ऐतिहासिक विकास की गति बहुत तेज रही है। सामाजिक औद्योगिक और सॉफ्रटवेयर टेक्नोलॉजी के उन्नति के साथ चोरो की बुद्धि भी धारदार होती रही है। ताले वाले क्या हाथ पर हाथ धरे बैठते? उन्होंने भी हजार गुना अन्वेषण किये हैं। तालों की किस्मों के बारे में जितना सोचो उतना कम। हमारी आंखों ने बंद दरवाजों को तालों के बंधन में ही देखा है। भाईदूज पर बहन साल में एक बार राखी का बंधन बांधती है। द्वार पर ताले का बंधन उससे ज्यादा आविराम सुरक्षा का वचन देता है। इसलिये बिना ताले का दरवाजा सुहाता ही नहीं। अधूरा लगता है। बिना ताले वाले बंद दरवाजे से किसी अशुभ का संदेह होता है। बिना ताले वाला द्वार किसी कंगाल का आवास, लावारिस किला या सरकारी उजाड़ लगता है।

दूसरी तरफ यूरोप में रंग-बिरंगे ताले ‘आई लव यू, आई लव यू’ कहते-कहते प्राण छोड़ने लगे हैं। पेरिस का लव ब्रिज ऐसे तालों से पटा है। इनकी चाबियों ने नीचे इसी सागर में आत्महत्या कर ली है। प्रेमी समझते हैं कि उनका प्यार लॉक हो गया है।

आज तो ये हाल है कि जिसका ताला जितना मजबूत, वह उतना धनी जिसका ताला जितना चमकदार, वह उतनी पैनी नजर वाला। जिसका ताला विदेशी, उसके पास विदेशी माल। जिसके पास चोर ताला उसके पास सब की चाबियां और जिनके पास चोर चाबियां उनके पास सारी इमानदारी की कमाई!

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तालों में रहने की सभ्यता बनाये रखने के लिये ताले बाजों ने अनेक आविष्कार किये। चाबी से बंद होने वाले और चाबी से खुलने वाले। बिना चाबी के बंद होने व चाबी से खुलने वाले। बिना चाबी खुलने व बंद होने वाले जिन्हें सिर्फ दिमागी चाबी की जरूरत होती है। चुम्बक वाले ताले। घंटी बजाने वाले ताले, करंट पैदा करने वाले और यहां तक कि हवा से बंद होने व दरवाजों को हथोड़ों से तुड़वाने वाले तालों का भी विकास हुआ है। सौ तालों की एक चाबी और बिना चाबी के सैंकड़ों ताले। लो प्लास्टिक ताले भी तैयार हैं और सिमकार्ड के चाबियों के।

ताले में जहां माल की सुरक्षा होती है, वहां बात की भी। ताले के भीतर हुई बातचीत की गोपनीयता केवल बोफोर्स को उछालने वाले चाबीबाज ही पहचान सकते हैं। एक अतिगोपनीय मीटिंग में सबका विश्वास बनाये रखने के लिए भरोसे के चौकीदार ने न ताला ठोका न खुद गेट पर बैठा, और खुले ताले में सारी गोपनीयता फुलझड़ियों की तरह खुल गयी। सतयुग का अंगद और आज का ताला एक जैसा ही समझो। ताला द्वार पर ऐसे खड़ा हो जाता है जैसे कोई किसी गलत आदमी की कालर पकड़ लेता हो। न घर के चोरों की खबर बाहर जाती न बाहरी चोरों को घर की खबर लगती। लोगों की बंधी मुट्ठी लाख रुपये की होती होगी, लेकिन बंद ताला उसके करोड़पति होने का अंदेशा देता है। भ्रम-विभ्रम ये ताले का प्रयोग तो होता ही है, लेकिन कारोबार बंद होने की दशा में प्रयोग आने वाले नौजवान ताला भी अपने दुर्भाग्य पर रोता दिखाई देता है।

यह भी ध्यान में रखे कि जिस दरवाजे पर दो या दो से अधिक ताले लगे हों तो यह कोई दोस्ती की निशानी नहीं है। घोर विरोध के ताले हो सकते हैं। कई मालिकों के ताले बरसों तक लगे रहते हैं। सुलह पर इन तालों की हथौड़े से हत्या ही होती है, तो अब कहीं-कहीं ताला छुपा रहता है।

तथाकथित दार्शनिक भगवा-वस्त्रधारी, जहां बोलते समय हजार बार मुंह में ताला लगाकर कहते मिलेंगे, ‘हरिओम तत्सद् बाकी सब गपशप। लेकिन वे अपने उपलब्ध भौतिक और आध्यात्मिक साधनों को ताले में ही बंद करते हुए मिलेंगे। तमाम अखाड़ेबाज, साधू-सन्यासी कागज पत्र और दानपात्र को पांच-पांच किलो के तालों से बंद करते मिलेगे। गोपनीय दान को भी ताला, चोरी के माल को भी ताला। चोरी का माल भी ताले में। अपनी असल कमाई भी ताले में। हम अपनी ही सुरक्षा में ताला बंद है। अब सीसीटीवी भी ताले का काम करने लगे हैं।

ताला और जूते से क्या संबंध। जूता मनुष्य को कर्मयागी बनाता है। घर से बाहर निकालता है। पुरूषार्थ की छटपटाहट में। और ताला...।

तो कौन बनेगा करोड़पति का अमिताभ बच्चन हर एक प्रतिभागी का जवाब लॉक कर देता है और सबको संदेहों के घेरे में डाल देता है।

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