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व्यंग्य // भैया जी के आदमी // वीरेन्द्र ‘सरल‘

व्यंग्य

भैया जी के आदमी

वीरेन्द्र ‘सरल‘

मरे हुए लोगों के जीवों को लाने के लिए अपने यमदूतों की ड्यूटी लगाने के बाद यमराज साहब अभी अपने ऑफिस में आराम से सिगरेट फूँकते हुए व्हाट्शाप पर एक मैसेज पढ़ रहे थे। पूरा मैसेज पढ़ लेने के बाद उनका चेहरा गुस्से से तमतमा गया। आँखे लाल हो गई और क्रोध से नथुने फड़कने लगे। उन्होंने गदा उठाकर इस तरह से मुद्रा बना ली थी कि यदि मैसेज डालने वाला सामने दिख जाय तो गदा के एक ही वार से उसका सिर फोड़कर उसे सीधे यमलोक ले आये। पर बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय की पंक्ति याद आते ही उन्होने अपने क्रोध पर काबू पाया और फिर से ध्यान से उसी मैसेज को पढ़ने लगे। लिखा था कि मृत्युलोक के किसी गांव के तालाब में एक आदमी नहा रहा था तभी तालाब के किनारे एक बालक और एक मेंढक प्रकट हुआ। देखते ही देखते मेंढक विशालकाय भैंसा बन गया और बालक यमराज। नहाने वाला आदमी डर के मारे वहां से भागने लगा तब यमराज ने कहा कि डरो मत बल्कि मेरी बातें ध्यान से सुनो। संसार के सब लोग सभी देवी-देवताओं की पूजा करते है पर मुझसे डरते हैं। आज से सबकी पूजा बंद करके सिर्फ और सिर्फ मेरी ही पूजा करे। मैं चाहे जितना भी झूठ बोलूं उस पर आंख मूंदकर विश्वास करे। किसी भी प्रकार तर्क-वितर्क न करे तो कभी भी उसकी मृत्यु नहीं होगी। मेरी जानकारी के बिना यदि उसकी मृत्यु हो भी गई तो मैं उसे पुनः जीवित कर दूंगा। जो भी आदमी मेरी इस बात को व्हाटशाप के कम से कम चार सो बीस समूहों में शेयर करेगा उसकी किस्मत चमक जायेगी। एक लोकल भैया जी ने यमराज के इस बात को शेयर किया तो बिना चुनाव जीते ही मंत्री पद को प्राप्त हो गये। एक अनपढ़ ने इस शेयर किया तो वह विश्वविद्यालय का टॉपर हो गया। एक अस्सी वर्ष की बूढ़ी अम्मा ने इसे शेयर किया तो वह सोलह साल की कन्या बन गई। एक गधे ने इसे शेयर किया तो वह लंबी रेस का घोड़ा बन गया। और ऐ नवयुवक यमराज के इस संदेश को फालतू समझकर डिलीट कर दिया तो वह कुछ ही समय में नब्बे वर्ष का बूढ़ा हो गया।

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इस मैसे ज को पढ़कर यमराज का दिमाग अभी भी गरम था। वह बड़बड़ा रहा था। मैं कब प्रकट हुआ और किससे ये सब कहा ये तो मुझे भी पता नहीं। ये कौन मूर्ख है जो इस तरह का अफवाह उड़ा रहा है। यदि मिल जाये जाय तो डिलीट करने वाले को तो इनाम दूंगा पर शेयर करने वालों का थोबड़ा ही पहले तोडूंगा। तभी यमराज मोबाइल की घंटी बजी। उन्होंने मूंछो पर ताव देते हुए कॉल रिसीव किया और कहा-‘‘यस! यमराज हियर। हु आर यू?

अरे! अंग्रेजी-वंग्रेजी छोड़ो यार। तुम्हारे कर्मचारी सब कहाँ मर गये? हमको मरे हुए तीन-चार घंटे हो गये। पर अभी तक कोई हमें लेने के लिए नहीं आया। ऐसे ही विभाग चलाते हो क्या? तुरन्त हमें यहां से ले जाने के लिए अपने कर्मचारियों को भेजो नहीं तो अभी मंत्री जी को फोन करके तुम्हारी शिकायत करता हूँ, समझे?

फोन पर किसी अंजान आदमी की धमकी सुनकर यमराज के होश उड़ गये। उन्होंने तुरन्त व्हाट्शाप बंद किया और सोचने लगा, लगता है कि कोई लोकल भैया जी मर गया है। यदि उनके पास हमारे कर्मचारी तुरन्त नहीं पहुंचे तो कहीं सचमुच किसी भैया जी से शिकायत न कर दे। हे भगवान! अब क्या होगा? आजकल हमारे यमदूत भी कामचोर हो गये हैं। ऊपर से नशे की आदत भी हो गई है इनको। कहीं किसी सरकारी शराब भट्ठी पर बैठकर दो-चार पैग खींचकर लुढ़क गये और खर्राटे लेने लगे तो बड़ी मुसीबत हो जायेगी। ऊपर से पता नहीं ये कौन ससुर मरा है जिसका जीव सीधे मंत्री जी से मेरी शिकायत करने की धमकी दे रहा है।

यमराज तुरंत अपने कर्मचारियों को फोन लगाते हुए कहा-‘‘अबे! तुम लोग कहाँ मर गये हो? इधर मेरी जान जा रही है और उधर तुम लोग मटरगस्ती कर रहे हो। ड्यूटी करते हो या मुफ्त की रोटियां तोड़ते हो। अभी तक वहाँ क्यों नहीं पहुँचे जहाँ तुम्हें पहुँच जाना था। सब कान खोलकर सुन लो, यदि अब मुझे तुम्हारी शिकायत मिली तो मैं या तो एक वेतन वृद्धि रोक दूंगा या अवैतनिक कर दूंगा, समझे? मैं जो लोकेशन बता रहा हूँ वहाँ तुरन्त पहुँचो। शायद कोई नेता-वेता मर गया है जिसका जीव अभी फोन पर मुझे धमका रहा है। अरे यार! तुम लोग समझते क्यों नहीं? तुमको पता होना चाहिए कि आजकल के नेता तो पद मिलते ही ये समझते हैं, मानो इन्हें कोई छोटा-मोटा पद नहीं बल्कि हर किसी को धमकाने का लायसंस मिल गया है। नौकरी करनी है तो ये नेता कुछ भी करे तुम अपनी आंख, कान, मुँह सब बंद करके रखो तभी भलाई है।

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यमराज की बातें सुनकर और उनकी मजबूरी को समझते हुए सभी यमदूत उधर दौड़ पड़े जिधर का लोकेशन यमराज ने बतलाया था।

तीन-तीन जीवों को एक साथ बैठकर गप्पे लड़ाते हुए देखकर यमदूत समझ गये, शायद साहब ने इन्हीं के बारे में बतलाया होगा। वे उनके नजदीक पहुँचे। एक जीव के हाथ मे सरकारी शराब की बोतल थी, दूसरे के हाथ में डिस्पोजल और तीसरे के हाथ में नमकीन की कुछ थैलियां। उनके नजदीक ही नशा नाश का जड़ है स्लोगन लिखा एक झंडा पड़ा था।

सभी यमदूत उनके निकट पहुँचे। यमदूतों में से एक ने कहा-‘‘क्या आप ही लोगों में से किसी ने हमारे साहब को फोन किया है महोदय जी। वैसे तो आप लोग अभी अच्छे-भले जवान दिखाई दे रहें हैं। मरने की इतनी जल्दी क्या थी। मजे से जीते फिर आराम से मरते। और आपकी ये बाइक? ये तो बिलकुल क्षत-विक्षत हो गई है।‘‘ तभी सामने पड़े एक पत्थर को देखते हुए दूसरे यमदूत ने कहा-‘‘भाई! सामने इतना बड़ा पत्थर है क्या ये आपको दिखाई नहीं दिया? लगता है इसी से टकराकर आप लोग मरें हैं।

मरने के बाद भी बोतल वाले जीव के दिमाग पर नशा चढ़ा था। टूटे हुए बोतल के कांच के टुकड़े उसके पेट में घुस गये थे। वह बात करना चाहता था पर बात करने की स्थिति में नहीं था। डिस्पोजल वाले के सिर पर चोट लगी थी और नमकीन वाले का टखना टूटा हुआ था।

टूटे टखने वाले जीव ने कहा-‘‘यार! आप लोग यमदूत हैं या क्राइम ब्रांच वाले जो यहीं इंक्यावरी करने लगे। क्या दुनिया भर की सारी बातें यहीं पूछ लेंगे? हमे मरे हुए तीन-चार घंटे बीत गये है और तुम लोग हमें लेने के लिए अभी आ रहे हो। हमारा सारा नशा हिरण हो गया है। पहले कुछ इंतजाम करो उसके बाद जो चाहो आराम से पूछते रहना। यहां सब पूछना बंद करो और अपनी गाड़ी पर बिठाकर सबसे पहले हमें यमराज कार्यालय ले चलो । हम सीधे यमराज से ही बात करना पसंद करेंगे। हम कोई साधारण आदमी नहीं बल्कि भैया जी के आदमी हैं, समझ गये?

टूटे टखने वाले जीव की बातें सुनकर सब यमदूत दंग रह गये। अरे बाप रे! मरने के बाद इतना पॉवर तो जीते जीं कितना पॉवर दिखलाते रहे होंगे।

यमदूतों ने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी और उन्हें लेकर सीधे यमराज कार्यालय पहुँच गये।

इधर यमराज भी बेचैनी से चहलकदमी करते हुए उनकी ही प्रतीक्षा कर रहे थे। गाड़ी आती दिखी तभी जाकर अपनी कुर्सी पर बैठे। यमराज कार्यालय पहुँचते-पहुँचते डिस्पोजल और नमकीन वाले जीव का नशा तो उतर गया था पर बोतल वाले जीव के दिमाग पर अभी भी नशा छाया था वह बार-बार अपना मोबाइल निकालकर अपने कान के पास ले जाकर हैलो भैया जी, हैलो भैया जी का रट लगाया हुआ था। और बार-बार कह रहा था कि हम लोग कोई साधारण जीव नहीं बल्कि भैया जी के आदमी के जीव है।

यमराज भैयाजीनुमा आदमी के दिव्य शक्तियों से भली-भांति परिचित था। वह जानता था कि मृत्युलोक में एक देश ऐसा भी है जहां भैया जी अपने चमचे के कान पर फूंक मार कर उसके हाथों में रखे धूल को सोना बना देने या व्यवस्था के कान पर फूंक मार कर अपने विरोधियों को धूल चटा देने में पूर्ण सक्षम होता है। सोने की लंका पर कब्जा जमाना या कुबेर के खजाने पर भी हाथ साफ कर देने की चमत्कारी शक्ति आखिर भैया जी टाइप लोगों के पास ही होती है। किसी भैया जी से दुश्मनी मोल लेना यमराज को खतरे से खाली नहीं लगा। इसलिए उन्होंने उनके आदमियों की अच्छी खातिरदारी की और उनसे प्यार से पूछा-‘‘ पर आप लोगों के मरने का कारण समझ में नहीं आया महोदय।‘‘

बोतल वाले जीव ने मुस्कराते हुए कहा-‘‘कल शाम को भैया जी की नशाबंदी रैली थी। हम सब वहीं गये थे। भैया जी ने नशाबंदी पर झन्नाटेदार भाषण झाड़ा। बीच-बीच में हम जोरदार तालियां बजाते रहे और भैया जी जिन्दाबाद के नारे लगाते रहे। इसी खुशी में रात को भैया जी ने हमारे लिए रेस्टहाऊस में बंदोबस्त किया था। हम सबने छककर शराब पी, खूब एंज्वाय किया और देर रात वहीं से लौट रहे थे। पर पता नहीं उस पत्थर को हमसे क्या दुश्मनी थी जो हमारे बीच आ गया, उसी से टकरा गये और हम मर गये।

उनकी बातें सुनकर यमराज का दिमाग घूम गया। उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए पूछा-‘‘ बड़ी अजीब बात है एक तरफ आप कहते हैं कि नशाबंदी की रैली और दूसरी तरफ नशे का बदोबस्त, ये क्या चक्कर है भाई? ऐसा कैसे हो सकता है।

बोतल वाले जीव ने कहा-‘‘सब होता है यमराज जी। कथनी और करनी की असमानता का साकार स्वरूप देखना हो तो आप हमारे देश के किसी भैया जी का चरित्र देखिए, सारी बातें साफ हो जायेगी। हम तो भैया जी के नस-नस से वाकिफ हैं। हमारा तो काम ही था भैया जी का गुणगान करना। उसकी प्रशंसा के कसीदे गढ़ना। उनके काले कारनामों को को छिपाकर उनकी तुच्छ उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर सोशल मीडिया में वायरल करना। भैया जी के इशारे पर झूठा और भ्रामक समाचार बनाकर व्हाट्शाप पर डालना।

यमराज सोचने लगा-‘‘अच्छा तो ये अफवाह फैलाने को ठेका भैया जी ने अपने आदिमियों को दे रखा है। ‘‘

-वीरेन्द्र ‘सरल‘

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