रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

पुस्तक समीक्षा // शब्दों के पुल - हाइकुओं में गागर में सागर // समीक्षक - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, 'डी0 लिट्0

साझा करें:

'शब्दों के पुल' हिन्दी हाइकु काव्य की सशक्त हस्ताक्षर डॉ0 सारिका मुकेश का एक उत्कृष्ट हाइकु संग्रह है जिसमें उन्होंने अपने लगभग 310 ...

clip_image002

'शब्दों के पुल' हिन्दी हाइकु काव्य की सशक्त हस्ताक्षर डॉ0 सारिका मुकेश का एक उत्कृष्ट हाइकु संग्रह है जिसमें उन्होंने अपने लगभग 310 हाइकु संग्रहीत किये हैं। कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश का नाम हिन्दी साहित्य जगत के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनकी कृतियाँ 'पानी पर लकीरें' (कविता संग्रह), 'एक किरण उजाला' (कविता संग्रह), 'खिल उठे पलाश' (कविता संग्रह), हिन्दी में तथा Teaching English Language: A New Perspective अंग्रेजी में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपको श्री मुकुंद मुरारी स्मृति साहित्य संस्थान कानपुर (उ0प्र0) द्वारा 'साहित्य श्री (वर्ष 2012-13) सम्मान' तथा यदुनंदंस सेवा संस्थान कानपुर द्वारा समाज में उल्लेखनीय योगदान हेतु 'शिक्षा रत्न सम्मान 2012' से सम्मानित किया जा चुका है।

पुस्तक में संग्रहीत हाइकुओं में आशा-निराशा, प्रकृति का मानवीकरण, मीरा के सुर में सुर, स्वच्छंदतावाद, उदात्त प्रेम, रिश्ते-नातों की खटास, आदर्श-यथार्थ, अपनेपन पर प्रश्नचिह्न, लोकविश्वास, जीवन की परिभाषा, मिथ्या जगत, यादों का संसार, ईश्वर भक्ति, रामायण, महाभारत, अमीरी-गरीबी, संयुक्त परिवारों का विघटन, खुद व बीबी बच्चों तक सिमटते परिवार, शरीर की नश्वरता, धरती माता, रूप सलौना, वसंत की छटा, प्रकृति का रहस्य, बुजुर्गों की उपेक्षा, नारी के विविध रूप तथा उसके प्रति श्रद्धा, बचपन की किलकारी, घिनौनी राजनीति आदि सब कुछ है।

हाइकुकारा कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश का दृष्टिकोण आशावादी है। अपने अनेक हाइकुओं में उन्होंने आशावाद का मंत्र फूँका है। कतिपय उदाहरण दृष्टव्य हैं-

रखें जीवंत /हर परिस्थिति में / आशा की ज्योति

कैसी निराशा/ जीवन का अर्थ / आशा प्रत्याशा

उठाओ हाथ / भर लो आसमान / मुट्ठी में दोस्त

तुम्हारी आँखें / क्यों दिल में जलाती / आशा के दीप

छू ले आकाश / मेरे मन के पाखी / देते विश्वास


जीवन सचमुच ही एक अनबूझ पहेली है। इसका उत्तर खोजते-खोजते जीवन तो समाप्त हो जाता है किन्तु उत्तर नहीं मिलता। विभिन्न विद्वानों, दार्शनिकों, संत-महात्माओं व कवि- साहित्यकारों ने जीवन को अनेक तरह से परिभाषित किया है। हाइकुकारा कवयित्री डॉ0 शारदा मुकेश ने भी जीवन को अपनी तरह से परिभाषित किया है।-

कहाँ सुलझी / जीवन की पहेली / यहाँ किसी से

दो मीठे बोल / जीवन नहीं कुछ/ साँसों का खेल

जीवन जैसे / दूब की नोंक पर / ओंस की बूँद

हरेक पल / बढ़ती जाये उम्र / घटे जीवन

मौत देती है / जिन्दगी के द्वार पे / एक दस्तक


कवयित्री ने 'अपनी बात में लिखा है ''हाइकु मुलतः प्रकृति से जुड़े रहे हैं परन्तु चूँकि मनुष्य भी इसी प्रकृति का हिस्सा है और वैसे भी साहित्य समाज का दर्पण है और समाज व्यक्ति / मनुष्य से बनता है सो मनुष्य की अनदेखी करना कदापि उचित नहीं होगा। इसीलिए आजकल मनुष्य को केन्द्र में रखकर खूब हाइकु लिखे जा रहे हैं। ''यहाँ यह कहना समीचीन होगा कि कवयित्री ने अपनी इसी बात को ध्यान में रखते हुए हाइकु लिखे हैं। डॉ0 महावीर सिंह ने अपनी पुस्तक 'हाइकु उद्भव एवं विकास' में लिखा है, ''बारहवीं शताब्दी से हाइकु रचना में ऋतुबोधक शब्दोंका प्रयोग अनिवार्य सा था ताकि यह जाना जा सके कि हाइकु की रचना किस ऋतु में की गई है।'' डॉ0 सत्यभूषण वर्मा ने भी कहा है, ''ऋतु का हाइकु के साथ गहरा सम्बन्ध है।'' जापानी हाइकु की यह मान्यता अब हिन्दी हाइकु में खण्डित होती हुई प्रतीत होती है किन्तु फिर भी कहीं न कहीं प्रकृति के माध्यम से ऋतु संकेत आ ही जाता है। कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश के कतिपय प्रकृति परक हाइकु दृष्टव्य हैं-

पूरब दिशा / प्रातः हो उठी लाल / निकला सूर्य

गूँजते स्वर / खिल उठी कलियाँ / हुई सुबह

नई ताजगी / खिला-खिला सा मन / निकले पक्षी

आया वसंत / धरती ने ओढ़ ली / पीली चूनर

वासंती हवा / बाँचती रही पाती / किसी के नाम

आसमान की / रस्सी पर लटके / ये चाँद सितारे

धरती माता / सब कुछ सहती / देती जीवन


कवयित्री ने प्रकृति को प्रतीक बनाकर मेहनतकशों के बिम्ब का कितना अच्छा चित्रण किया है-

घोंसला छोड़ / दानों की तलाश में / निकले पक्षी


जिस प्रकार कस्तूरी की खोज में हिरन चारों तरफ भटकता रहता है और यह नहीं जान पाता कि कस्तूरी तो उसी के पास है उसी प्रकार मनुष्य भी जीवन के भटकाव में रहता है और अपने आप को पहचान नहीं पाता-

भटकते मृग/ कस्तूरी की खोज में / यहाँ से वहाँ

अस्थिर मन / भोर की हवा जैसा / कसमसाता


आज के युग में जो नई संस्कृति या कहना चाहिए कि अपसंस्कृति पनप रही है उसके भयंकर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। आज अपनापन, मित्रता व प्रेम पर प्रश्नचिह्न लग गया है तथा सभी एक-दूसरे का गला काटने को फिर रहे हैं। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं तथा खुद व बीवी बच्चों तक परिवार सिमट कर रह गये हैं। संकीर्णता चारों तरफ हावी है यह सब कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश के कतिपय हाइकुओं में दृष्टव्य है-

बड़ा आश्चर्य / गला काटते यहाँ / अपने लोग

कैसा विकास / आदमी को आदमी / काटता आज

बढ़ते रहो / चाहे काटना पड़े / किसी का गला

इस दौर में / आत्मीयता का भाव / खो गया कहीं

अब तो यहाँ / आस्तीनों में हैं साँप / रहो सतर्क

डसा करते / आस्तीनों में रहकर / अब तो मित्र

इस दौर में / खुद में संकुचित / हो गये लोग

यूँ मिटा प्यार / खुद में ही सिमटे / सारे त्यौहार

सिमट गये / सब प्रेम में अब / भीतर तक

सिमट गये / मैं मेरी बीवी बच्चे / तक क्यों हम

दिन का कत्ल / रोज करे सूरज / तो भी महान

करे आदमी / स्वार्थ सिद्धि के लिए / कैसे प्रपंच

ओपन सैक्स / हाई फाई जीवन / ऊँचा सेंसेक्स

झूठ दिखावा / इस दुनिया की ये / नई संस्कृति

जान ले लेती / अपनी ही प्रेमिका / एक क्षण में


विवेच्य कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश के प्रस्तुत हाइकु संग्रह में सत्य, त्याग, सहानुभूति, करूणा, धर्म, आत्म विश्वास, विनय, सन्तोष, श्रद्धा, दानशीलता, ईमानदारी, सेवा, प्रेम, अहिंसा, शांति, आस्था, सहनशक्ति, उदारता, परहित तथा आनंद आदि मानव मूल्यों को खोजा जा सकता है। उनके कतिपय हाइकुओं में मानव मूल्य देखें-

आत्मा का रिश्ता / होता है सच्चा / ना टूटे कभी (प्रेम)

नफरत भी / करते हैं उन्हीं से / जिनसे प्रेम (प्रेम)

संसद मौन / गरीब की व्यथा को / समझे कौन (करुणा)

धरती माता / सब कुछ सहती / देती जीवन (सहन शक्ति व दानशीलता)

जल उठे दीप / जागी एक किरण / जाग उठा विश्वास (आत्म विश्वास)

ओ मेरे कान्हा / रँग दे चुनरिया / अपने रंग (आस्था)

थाम ले हाथ / दुख में जो दे साथ / वो तेरा मीत (परहित)

दिल को भाता / मीठी-मीठी बातों से / मन हर्षाता (आनंद)

पूरी साँस / जाये हरि के पास / बिना प्रयास (धर्म)

सत्य के लिए / दिया राम का साथ / विभीषण ने (सत्य)

क्यों भूले सत्य / भूल गये ईश्वर / अहंकार में (सत्य)

कर दो क्षमा / हर एक भूल को / ओ परम पिता (विनय)

ये जग मिथ्या / है सच्चा यहाँ सिर्फ / हरि का नाम (त्याग)

प्रीत निभाई / दर्द रहे अपने / खुशी पराई (उदारता)

जिंदगी भर / सहता रहा सब / आम आदमी (सहनशक्ति)

पल भर में / मिटे सब थकान / देखूँ जो पुत्र (संतोष)

एक सहारा / बस परमात्मा का / दूजा ना काई (श्रद्धा)

उपजी पीड़ा / वाल्मीकि के मन में / क्रौंच वध से (अहिंसा)

अकेला पड़ा / मौन रह मित्रता / बाकी के दिन (शांति)

सदा से देखा / महँगाई की मार / मारे गरीब (सहानुभूति)

राम के लिए / अर्पित किया जहाँ / जै हनुमान (सेवा)


नारी के विविध रूपों का चित्रण कवयित्री ने अपने कतिपय हाइकुओं में किया है। कहीं उसके प्रति श्रद्धा है तो कहीं उस पर अत्याचारों व शोषण का चित्रण है-

धरती माता / सब कुछ सहती / देती जीवन

गीले में रह / सूखे में सुलाती माँ / ये कर पाती

ये इबादत / महिला-दिवस में / लूटी इज्जत

महानता का / जामा पहनाकर / किया शोषण

राम तुमने / क्यों दिया वनवास / स्वयं सीता को

पाँच पांडव / औ' अकेली द्रौपदी / करती तृप्त

ठगा तुम्हें भी / सोने के हिरन ने / वन में सीता

स्त्री की नीयत / कभी अंकशायिनी / तो कभी जूती

आज भी होती / क्यों द्रोपदी निर्वस्त्र / भरी सभा में

दुःखी हो मन / दिखाते क्यों स्त्री तन / ये विज्ञापन

रोज बेधती / पुरूषों की दृष्टियाँ / नारी तन को

अब न कहो / नारी नर्क का द्वार / नहीं उद्धार


रसराज श्रृंगार को भी डॉ0 सारिका मुकेश के कतिपय हाइकुओं में स्थान मिला है। संयोग श्रृंगार के कतिपय उदाहरण दृष्टव्य हैं-

छुआ तुमने / गरम हुई साँसे / पिघले जिस्म

उतरी शाम / मिले प्यासे बदन / मिटाने प्यास

तुम्हें जो देखा / उभरा मन बीच / इंद्र धनुष

मन हरषा / जब मन का मिला / तन भी खिला

श्रृंगार के वियोग पक्ष पर भी कवयित्री ने कलम चलाई है-

छीन ले गयी / मन का सारा चैन / उसकी याद

मन की पीर / नहीं समझे कोई / सुबके हीर

हुआ उदास / जब चुभी मन में / यादों की फाँस

साथी मन के / कभी तो मिलो मुझे / करूँ प्रतीक्षा


बाल मनोविज्ञान पर भी कवयित्री ने कतिपय हाइकु रचे हैं। देखें कुछ उदाहरण-

लिखो जो चाहे / बच्चे होते हैं सदा / कोरी किताब

एक क्षण में/ हर ले पीड़ा सारी / ये किलकारी


कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश की हिन्दू धर्म में आस्था है। वे हिन्दू धर्म के अवतार और देवताओं में विश्वास रखतीं हैं। उन्होंने कहीं-कहीं मीरा के सुर में भी सुर मिलाया है-

ओ मेरे कान्हा / रँग दे चुनरिया / अपने रंग

मैं रँग जाऊँ / बस तेरे रंग में / ओ घन श्याम


समाज में प्रचलित लोक विश्वासों को भी कवयित्री के इन हाइकुओं में स्थान मिला है-

अभी भी आते / क्या तुम हर रात / निधि वन में

निधि-वन में / सुना है आज तक / रास रचाते

यकीन मान / है सबके भीतर / वो भगवान


जीवन क्षण भंगुर है। साँसों की डोर कब टूट जाये कुछ भी पता नहीं। जीवन की इस क्षण भंगुरता को कवयित्री ने इस तरह प्रस्तुत किया है-

जीवन जैसे / दूब की नोंक पर / ओस की बूँद

नश्वर देह / है माटी का पुतला / करे घमंड


मानव मन वर्जनाओं में रहने का आदी नहीं है। वह खुले आकाश में स्वच्छन्द होकर उड़ाने भरना चाहता है। स्वच्छन्दतावाद को भी कवयित्री ने कुछ हाइकुओं में प्रस्तुत किया है-

मुक्त होकर / आकाश में उड़ना / चाहता दिल

वक्त है चलें / सरहदों के पार / वहें निर्वंध


आज की घिनौनी राजनीति से कवयित्री का मन खिन्न है। उन्होंने राजनीति पर कटाक्ष किया है-

फैला जहर / सांप्रदायिकता का / नेता ले मौज

यूं चाल चली / जिसको मिला मौका / कुर्सी खींच ली

सेवा के नाम / अपनी जेब भरें / आज के नेता


आज आम आदमी पीड़ा, घुटन, संत्रास, अभाव, गरीबी, महँगाई से त्रस्त है। दैवी आपदाओं का दंश भी उसे झेलना पड़ता है। कवयित्री ने अपने कतिपय हाइकुओं में इन समस्याओं पर भी कलम चलाई है-

आया तूफान/ पल में हुए नष्ट / खेत औ' खलिहान

क्यों त्राहिमाम / कर रहे किसान / सड़कों पर

कहाँ समझी / व्यथा मेरे मन की / कभी किसी ने

सदा से देखा / महँगाई की मार / मारे गरीब


प्रस्तुत हाइकु संग्रह के कला पक्ष पर दृष्टि डालने पर हम पाते है कि संग्रह के समस्त हाइकुओं की भाषा आम बोल चाल की खड़ी बोली है जिसमें अन्य भाषाओं के हिन्दी में रच-पच गये शब्दों को भी स्थान मिला है। फाइल, ओपन, हाई फाई, सेंसेक्स, बॉस जैसे अंग्रेजी शब्द, जिस्म, ख्याल, इज्जत, नफरत, दर्द, नसीब जैसे अरबी शब्द तथा याद, दिल, वक्त, खुद, खूब, खुशी, गरम, जिन्दगी जैसे फारसी शब्द भी इसमें स्थान पा गये हैं। उन्होंने जापानी काव्य विधा हाइकु के छन्द का निर्वाह किया है। उन्होंने जापानी काव्य विधा हाइकु के छन्द विधान जिसमें 5-7-5 वर्ण की तीन पंक्तियों में मात्र 17 अक्षर होते हैं का अक्षरशः पालन किया है। अपवाद स्वरूप एक हाइकु ऐसा भी है जिसमें 5-7-5 वर्ण क्रम का निर्वाह नहीं किया गया है। तीसरी पंक्ति में 5 वर्णों के स्थान पर 7 वर्ण हैं, देखें-

आया तूफान / पल में हुए नष्ट / खेत औ' खलिहान


संग्रह के समस्त हाइकुओं में गागर में सागर भरने का पूरा प्रयास किया गया है। समस्त हाइकुओं में अभिधा, लक्षणा व व्यंजना तीनों ही शब्द शक्तियाँ तथा ओज, माधुर्य व प्रसाद तीनों ही गुण विद्यमान हैं। अलंकारों की हाइकु जैसे लधु छंद में गुंजाइश बहुत कम होती है। किन्तु फिर भी कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश ने अपने कतिपय हाइकुओं में अलंकारों की छटा भी बिखेरी है। उनके संग्रहीत हाइकुओं में कतिपय अलंकार देखें-

नई ताजगी / खिला-खिला सा मन / फैला उजाला (पुनरूक्ति प्रकाश)

तुम्हारी याद / हृदय के सीप में / मोती के जैसी (उपमा)

अस्थिर मन / भोर की हवा जैसा / कसमसाता (उपमा)

तुम्हारी यादें / चंदन सी महँकें / मेरे मन में (उपमा तथा अनुप्रास)

देती दस्तक / मस्तिष्क-पटल पे / तेरी वों यादें (अनुप्रास, रूपक तथा मानवीकरण)

दिल को भाता / मीठी-मीठी बातों से / मन हर्षाता (पुनरूक्ति प्रकाश)

खिले पलाश / कटे हुए पेड़ सा / मन उदास (उपमा)

चमको ऐसे / अनंत ऊँचाई पे / ज्यों ध्रुवतारा (उपमा)

यहाँ औ' वहाँ / बिखराये रहता / खेल खिलौने (अनुप्रास तथा पदमैत्री)

दिन का कत्ल / रोज करे सूरज / तो भी महान (विरोधाभास)

मौत देती है / जिन्दगी के द्वार पे / एक दस्तक (मानवीकरण)

तेरी आँखें में / झिलमिलाते आँसू / सितारों जैसे (उपमा)

आया वसंत / धरती ने ओढ़ ली / पीली चूनर (मानवीकरण)

बजे मृदंग / गूँज उठी आरती / औ' गूँजे शंख (नाद सौंदर्य)


अंत में निष्कर्षतः यही कहा जा सकता है कि कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश का प्रस्तुत हाइकु संग्रह हिन्दी हाइकु संसार में एक उच्च स्तरीय स्थान बनायेगा ऐसा मेरा विश्वास है। संग्रह के समस्त हाइकु गागर में सागर भरने में सक्षम हैं। कतिपय स्थानों पर एक ही भावभूमि के अनेक हाइकु आ गये हैं उनसे बचा जा सकता था। संग्रह डायरी का आनंद भी देता है। इतने अच्छे हाइकु संग्रह हेतु मेरी हाइकुकार कवयित्री डॉ0 सारिका मुकेश को शुभकामनाएँ।

समीक्ष्य कृति - शब्दों के पुल (हाइकु संग्रह)

लेखिका - डॉ0 सारिका मुकेश

प्रकाशक - जाह्नवी प्रकाशन, ए-71, विवेक विहार, फेज-2, दिल्ली - 110095

मूल्य - 200 रूपये

पृष्ठ-112


clip_image004

समीक्षक- डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, 'डी0लिट्0

शाक्य प्रकाशन, घंटाघर चैक

क्लब घर, मैनपुरी - 205001 (उ0प्र0)

स्थाई पता- ग्राम कैरावली, पोस्ट तालिबपुर

जिला- मैनपुरी (उ0प्र0)

ई मेल - harishchandrashakya11/gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3841,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2786,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,831,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,4,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1919,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,648,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: पुस्तक समीक्षा // शब्दों के पुल - हाइकुओं में गागर में सागर // समीक्षक - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, 'डी0 लिट्0
पुस्तक समीक्षा // शब्दों के पुल - हाइकुओं में गागर में सागर // समीक्षक - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, 'डी0 लिट्0
https://lh3.googleusercontent.com/-PTwTkEWCXyg/W-MfJdMIxCI/AAAAAAABFGs/C_xoNR6ya_MsNmE0d2oJTrQ98IVgacbqQCHMYCw/clip_image002_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-PTwTkEWCXyg/W-MfJdMIxCI/AAAAAAABFGs/C_xoNR6ya_MsNmE0d2oJTrQ98IVgacbqQCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/11/0-0-0.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/11/0-0-0.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ