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कहानी // हल्दीघाटी नैनों चिप और चेतक // अजय गोयल

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रात में जब वसंत नींद के गहरे समुद्र में गोता लगाते उस समय उसका अवचेतन जाग उठता। उन क्षणों में नये नये संसार उसकी बंद अस्त्रों के पीछे फलक पर...

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रात में जब वसंत नींद के गहरे समुद्र में गोता लगाते उस समय उसका अवचेतन जाग उठता। उन क्षणों में नये नये संसार उसकी बंद अस्त्रों के पीछे फलक पर जगमगाने लगते। उन दृश्यों में उसे आगत का आभास मिलता। सम्बल मिलता। तभी वे एक कम्पनी के सर्विस इंजीनियर से अपनी कम्पनी स्थापित करने की बात की ताकि लम्बी छलांग लगा सके।

काबिल थे। विदेशों से मेडिकल उपकरणों का उन्होंने कबाड़ खरीदा।

इसके साथ कुछ सर्विस इंजीनियरों को साथ लेकर अपनी कम्पनी की नींव रखी। विश्व की नामी कम्पनियों के चुके हुए उपकरणों की मरहम पट्‌टी से लेकर उनमें नये अंग प्रत्यारोपण कर सीसे भरीं। अपनी व्यक्तिगत गांरंटी के साथ उन उपकरणों को नर्सिग होमों में स्थापित कर दिए। यह उसकी एक लम्बी पारी की सुबह थी। बस, अवचेतन के फलक पर वसंत ने देखा था, वक्त ने एक ऊँची कुर्सी पर बैठा दिया था। उसे शतक ठोक सीरीज जीत लेने जैसी अनुभूति हुई थी।

'' वक्त को हथेली पर रख सूंघ लेने की कूवत रखते हैं वसंत।' ' इस सफलता के साथ यह सहमति उसके लिए नत्थी हो गयी थी।

अपने अवचेतन के तिलिस्म द्वारा वक्त पर की गयी टिप्पणियों का वसंत आस्वाद लेते। जैसे जल पम्पों द्वारा चूरने जाने के कारण पानी के लिए कंगाल होता पाताल और ग्रीन हाउस गैसों की दहाड़ से मिमियाते कातर मानसून के कारण प्यास का इलाज वसंत को ध्रुवों से ग्लेशियर को खींच लाना लगाता। सूरज छू लेने के लिए छलांग लगाने वाली सभ्यता अभी पानी जैसी नाचीज वस्तु बना नहीं सकी थी। तभी एक रात अवचेतन के फलक पर दोनों छोरों तक नीले आकाश व गहरे नीले सागर के बीच चमकते ग्लेशियर को वसंत ने अपने कंधे पर लाद लिया था। उसे खींच लाने के प्रयास में पसीना-पसीना थे वसंत। उस सुबह बहुत देर तक इस दृश्य को वह बाथरूम में बैठे अपनी खुली आँखो में जीते रहे थे-जैसे किसी मैच के आखरी रोमांचक क्षणों में दर्शक आँखें फाडे समय में फंस जाते हैं '।

आज सुबह गाती चिड़ियों के साथ मीठी सुबह में उठे वसंत। उसके साथ अवचेतन के नये संसार की आहट थी। हजारों लहराते केसरिया ध्वजों के साथ सूरज तक केसरिया हो गया था हनुमान चालीसा सुमरन गज रहा था। महाराणा प्रताप मन्दिर प्रांगण में बजरंग बली के सामने हताश और उदास बैठे थे। सर झुकाए। भाला उनके पास रखा था। उनके पास बैठा चेतक अपनी टाँगों में सर छिपाए था।

इस दृश्य से सहम गये थे वसंत। उसे सुबह काली रात लगने लगी थी।

अवचेतन की इस पहेली में डूबे वसंत बाथरूम में फिसल गये। शायद उसकी नाक में चोट लगी थी। एक दो बूंद खून की रिसी। तुरन्त परिचित नर्सिंग होम पहुँचा दिए गये। ब्लड प्रेशर से लेकर ब्लड ग्लूकोज व इ० सी० जी. से कैट स्कैन तक का रास्ता कुछ मिनटों में तय कर लिया गया।

माइनर ओ. टी० में वसंत डा० साहब के साथ थे। वर्षों से डा० साहब से उसका परिचय था।

सिरहाने लगे मॉनिटर को देखकर वसंत बोले. ''सर, सबसे पहले आपने मेरी कम्पनी का मॉनिटर अपने नर्सिंग होम मे लगवा कर मुझे पिच पर पारी के लिए उतार दिया। एक खिलाडी बना दिया।'' जिन्दगी को क्रिकेट से तौलना कब उनकी फितरत में शामिल हो गया, यह उसे स्मरण नहीं था।

मुस्करा पडे डा० साहब।'' बोले ''क्या करें ' तुम जानते हो, सरकार चाहती है हर बेड पर मॉनिटर लगा हो, जबकि मरीज की नीयत एक चवन्नी अतिरिक्त देने की होती नहीं। मरीजों की तृप्ति इण्टरनेशनल ब्राण्डों को देखकर होती है।

-''मुझे सब कुछ ठिठक गया लगता है। रूक गया लगता है।'' वसंत कुछ सोच कर बोला।

-''कैसे-' पूछा डाक्टर साहब ने।

जीन चिप के बाद ऊर्जा चिप की बारी है। परमाणु नैनो चिप।

थोरियम चिप। जहाँ कहीं लग जाए. जीवन भर ऊर्जा की जरूरत पूरी करती रहे। '

जीनियस आइडिया है,'' डाक्टर साहब ऊर्जा चिप का विचार सुनकर खिल उठे थे, ''जीवन बदल देगी ऊर्जा चिप। एक नई लक्ष्मण रेखा होगी मानव की।''

खून रिसना घर पर बद हो चुका था, फिर भी सावधानी के लिए उसे नर्सिंग होम लाया गया।

डाक्टर को वसंत के धर्मरक्षा वाहिनी से जुडने की खबर थी। मंगलवार को नर्सिंग-होम पहुंचने में उन्हें कठिनाई होती। उन्होंने वसंत से पूछा, मैं समझ नहीं पाता, तुम क्यों पुराने हनुमान मदिर के सामने हर मंगल को हनुमान चालीसा सुमरन के लिए सड़क बंद कर शहर को लंगडा करने वालों के साथ मिलकर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने में लगे हो ' अब धर्म रक्षा वाहिनी फतवेबाजी पर उतर आयी है। महाराणा प्रताप महान थे या अकबर ' इस मुददे पर तलवार भांज रहे हो ' '' वे समझ नहीं पा रहे थे कि ग्लेशियर खींच लाने की परवाज का हौसला रखने वाला इंसान कैसे उल्टे गियर में फंस गया।

वसंत ने डा० साहब को अपने मोबाइल पर एक वीडियो दिखाया जिसके पार्श्व में आई० एस० का झंडा था। ए० के० सैंतालीस मशीनगन हाथों में लिए कुछ लड़के गाना गा रहे थे। कह रहे थे, काश्मीर मुट्ठी में करने के बाद अब दिल्ली की बारी है। हमें शौक ए शहादत है। जन्नत में हर हम जैसों के लिए बयासी हूरें इंतजार कर रही है। काफिरों हम में रिल जाओ या समन्दर में समा जाओ।

'' मेरा एक चचेरा भाई शिशिर अमरनाथ यात्रा के समय एक आतंकी हमले में शहीद हो गया। वैज्ञानिक था। उर्जा चिप जैसी बडी बातें करता था। अब चाचा और चाची उसके पुर्नजन्म के इंतजार में सनक गये हैं। कर्म कांडो से सिर फोड़ रहे हैं। कहते कहते वसंत का गला भर आया था। उसके चेहरे पर दुखों की बाबडी झलकने लगी थी। आगे बढ़कर डा० साहब ने उसे सहारा दिया उसका हाथ अपने हाथों में लिया। शायद दुःख के इन क्षणों में वसंत वाहिनी से जुड़ गये थे।

उस समय वसंत सोशल मीडिया के वायरल कुछ वीडियो में उलझा था। किसी वीडियो में पूछा जाता, फटा पुराना हिन्दुस्तान। जान से प्यारा पाकिस्तान। भौंकने वालों से कैसे निपटें ' पूछा किसी में जाता, नमाज के लिए सड़क जाम हर शहर में क्या नहीं होती '' व्यंग्य होता, '' आई० एस० के लिए भागे सिरफिरे लोडे यूँ वापस नहीं आ गये। गये थे जेहाद के लडाके बनने। लगा दिए गये केंम्पों के पखानों की सफाई में। कमतर समझे गये।''

डा० साहब ने वसंत के चेहरे पर गुस्से का अंधड़ देखा। उसको थपथपाते हुए बोले '' सब कुछ ठीक है। अब आराम करो वसंत। बाहर तुम्हारा बेसब्री से इन्तजार हो रहा है. लेकिन इतिहास को हमें रोशनदान बनाना है या चीर हरण का समान।.. वे महाराणा प्रताप व अकबर के सम्बन्ध में कह रहे थे। उसके साथ डा० साहब ने वसंत को माइनर ओ० टी० से वार्ड में शिफ्ट करने का आदेश दिया।

ताज्जुब था वसंत को। अपने ही रंगमंच पर फिसल गये। प्रतिदिन वहां कुछ समय अतिरिक्त बिताना आदत थी। उन क्षणों में वसंत शताब्दियों तक में आवाजाही करते। पाताल को सुन लेना चाहते। अपनी आगे की योजनाओं को मन की चाक पर चढा गढ़ते। पिछले दिनों शहीदी दिवस पर मेरा रग दे बसती चोला जैसी पंक्ति पर देर तक थिरकते रहे थे। वसंत शहीदों के जेल की बैरक से फाँसी के तख्ते तक के पलों को चुन लेना चाहते। उन पलों में शहीदों का बी० पी०. ब्लड शुगर व नब्ज मॉनिटर से नाप लेना चाहते। एम० आर० आई० से उनके भीतर झाँक लेना चाहते।

इसी रंगमंच पर एक दिन वसंत ने सोचा कि थोरियम नैनो ऊर्जा चिप लगने के बाद उनके मॉनिटर के सामने कौन सा दुनिया का मॉनिटर टिकेगा। इसी क्रम में एक दिन उसके सपने ने एक अद्भुत छलांग लगायी धीर महाराणा प्रताप और अकबर हल्दीघाटी के युद्ध के दिमागी अन्धेरे से निकल आने वाली नस्लों की जिन्दगी में कुछ इजाफा करने के सवाल पर जूझ रहे थे। वे दोनों एक बडी प्रयोगशाला के सामने थे। जिसके अन्दर वैज्ञानिक उर्जाचिप जैसा कुछ विकसित करने में जुटे थे। उन क्षणों में वसंत ने सोचा '' यदि ऐसा होता तब जीवन कौन सी रेखाओं के बीच धड़क रहा होता ''

माइनर ओ० टी० से निकल व्हील चेयर पर बैठे वसंत ने पत्नी प्रभा बेटे कबीर और दोनों बेटियाँ अनु और तनु को हाथ उठाकर सब कुछ ठीक होने का संकेत दिया। इसके साथ सबकी अटकी सांसें लोटती हुई अनुभव हुई। '' सब ठीक है। शायद गीले फर्श पर पैर फिसल गया था, '' रूम में पहुँचकर वसंत ने कहा।

''मैं चाऊमीन नहीं खाऊँगा। बर्गर नहीं खाऊंगा। कार्टून चैनल नहीं देखूँगा। बस आप ठीक हो जाओ'' ' कबीर बसन्त से रूम में लिपटते हुए बोला था। एक अनजाना डर उसके चेहरे पर बैठा था। इन सबसे दूर रहने के लिए वसंत कबीर से अक्सर कहता था।

मुस्कराने लगा वसंत। उसके बाल सहलाते हुए बोला '' बर्गर। चाऊमीन और कार्टून फिल्मों के अलावा तुम जानते क्या हो '' तनु और मनु भी हंसने लगी थीं।

वसंत के बाथरूम में फिसलने का समाचार फैल गया था। फोन की घंटी लगातार वसंत का ध्यान भंग कर रही थी। प्रभा सबको सब कुछ ठीक होने का समाचार दे रही थी।

वसंत ने फेसबुक से सबको अपनी कुशलता का समाचार देना चाहा, लेकिन इंटरनेट सेवा में किसी कारण व्यवधान था। उसे अहसास था. जिन्दगी को नये सांचे में डालता इंटरनेट का हाथ थोडी देर के लिए छूटने पर फीके दूध की तरह बेस्वाद लगने लगता है समय।

वसंत को फेसबुक बिना ईंट गारा का दुनिया भर में पसरा स्टेडियम लगता। इस पर एक लाइव कार्यक्रम फटाफट सीमित ओवरों वाला मैच अनुभव होता लेकिन इंटरनेट का जादू बाधित हो जाए तब सब कुछ गठरी में बंधा सा रह जाता। जगमगाता तिलिस्म पल में ध्वस्त हो जाता। उस समय बिस्तर में लेटे वसंत को बिना इन्टरनेट अपना स्मार्टफोन दीनहीन प्राणहीन लगा। अन्यथा संसार उसे अपनी मुट्‌ठी की परिक्रमा करता हुआ अनुभव होता।

''हनुमान चालीसा सुमरन' के लिए वाहिनी प्रमुख तेजप्रकाश व वाहिनी प्रचारक कर्मवीर सोशल मीडिया पर लगातार लाईव कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे। अपने कार्यक्रम में तेजप्रकाश कहते, हमें ''हे राम' कहने वालों की छत्र छाया से मुक्ति चाहिए। उन्होंने हमें क्या दिया? एक टूटा हिन्दुस्तान। इसे भी दूसरे एक लड्‌डू की तरह निगल जाना चाहते हैं। उनका नजरिया साफ है। वे कहते हैं,'' चीनों अरब हमारा। हिन्दुस्तां हमारा। मुस्लिम हैं हम। सारा जहाँ हमारा । ''सीना फुला फुलाकर चाहे हम गाते रहें, ''मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना'। लेकिन हम भूल जाते हैं यह सब लिखने वाले ने ''सजदा ना करूं हिन्द की नापाक जमीं पर'' जैसी पंक्ति लिखी है।

कर्मवीर हुँकार भरकर कहता,'' जब अल्लाह अल्लाह कहने वाले शिया और सुन्नी एक रंग में साथ नहीं है। तब हम क्यों भाई-भाई का मर्सिया पढ़ते हैं। हमारा और उनका साथ तेल पानी जैसा है। वे संगठित हैं इसकी मिसाल है पाकिस्तान। जिन्ना इस्लाम के बारे में बहुत कम जानते थे। लेकिन उनका सपना था पाकिस्तान। इस सपने को गरीब से गरीब मुस्लिम ने हर सुबह शाम एक मुट्ठी आटा देकर साकार किया।

सबसे पहले हम संगठित हो। हनुमान चालीसा की डोर में बँध जाएँ।

सुमरन का प्रसाद ग्रहण करें।''

वसंत की कुशलक्षेम पूछने के लिए वाहिनी प्रमुख तेज प्रकाश व कर्मवीर सबसे पहले आए थे पिछले मंगलवार मंदिर के पुरोहित जी ने वाहिनी प्रमुख तेजप्रकाश व कर्मवीर का अभिषेक करते हुए कहा था, '' आपके अथक प्रयासों से धर्म की पुन. स्थापना हुई है। आपकी इस सिंह गर्जना ने मंदिर में प्राण फूंक दिए,' आर्य पुत्रों। समय लावे सा प्यासा है। क्या हम आहुति के लिए तैयार हैं?

वाहिनी प्रमुख तेज प्रकाश बार-बार अपनी मूंछों पर ताव देते। प्रभाव जमाने के लिए धीरे-धीरे बोलते। जैसे बीज बो रहे हों।

वसंत ''प्रताप जयंती' के प्रसंग में उनसे कोई वार्ता नहीं करना चाहता था। अवचेतन के फलक पर बजरंग बली के सामने उदास बैठे महाराणा प्रताप और चेतक को देख वह विचलित था।

सुबह के दस बजने वाले थे। मन बदलने के लिए प्रभा से टेलीविजन चलाने के लिए कहा। भारत और श्रीलंका टीमों के मध्य एक दिवसीय क्रिकेट मैच प्रारम्भ होना था।

'' शायद कोई व्यवधान है' मैच शुरू होता न देख प्रभा ने कहा।

हाल चाल पूछने आए तेज प्रकाश के चेहरे पर लम्बी चौड़ी। मुस्कान थी। जैसे किसी उत्सव में सम्मिलित होने आए हो। लगता कि धरती से चार इंच ऊपर चल रहे हों। कुछ क्षणों के बाद उन्होंने वसंत को एक अखबार की कतरन दिखायी। समाचार था। मुस्लिम बाहुल्य इलाके के सरकारी प्राइमरी स्कूल का नाम बदल दिया गया था। नियुक्त प्रधानाचार्य ने स्कूल की. साप्ताहिक छुट्‌टी रविवार के स्थान पर शुक्रवार कर दी थी।

''मैंने शासन को इसकी सूचना दी। अब कार्यवाही हो रही है। इन जिन्ना की औलादों का क्या करें? ये हिन्दस्तान को फाड़ते रहेंगे।

और-हम सिलते रहने की कोशिश में गर्क हो जाऐंगे। मैं आज के कई तैमूर और ओसामा नाम वालों को जानता हूँ। लेकिन आज तक एक दाराशिकोह नाम वाला मुस्लिम नहीं देखा है।''

वसंत ने सुना। शून्य में देखने लगा। कुछ क्षणों के बाद उसने आँखे बन्द कर ली। उसके सामने बजरंग बली के सामने उदास महाराणा व चेतक थे। तेज प्रकाश आश्चर्य चकित थे। ऐसे बेजान व ठंडे वसंत से अपरिचित। उस समय तेजप्रकाश एक वायरल वीडियो वसंत को दिखाना चाहते थे। वह एक मुस्लिम द्वारा कांवर लाने और शिव पर अर्पित किए जाने से नाराज गांव वालों द्वारा उसका बहिष्कार कर दिए जाने से सम्बन्धित था। वीडियो सवाल उठाकर समाप्त होता '' क्या दरगाह-दरगाह की खाक छानने वाले हिन्दुओं को समन्दर में नहीं डूब जाना चाहिए ... वीडियो दिखाना स्थगित कर तेजप्रकाश ने प्रभा से पूछा,'' रिपोर्ट सब ठीक हैं ना त?''

''सब कुछ ठीक है। मेरी डाक्टर साहब से बात हुई है।'' प्रभा का उत्तर था।

'' गैस चेम्बर उस समय के वैज्ञानिक और नायकों की देख रेख में बने थे. वसंत ने अचानक तेजप्रकाश की आँखों में झांकते हुए उत्तर दिया था। इस सारगर्भित उत्तर का वे अता पता नहीं ढूँढ पा रहे थे। लेकिन इस उत्तर से सकपका गये। उन्हें लगा जैसे कोई बीते समय का चक्रधारी वर्तमान में मशीनगन लेकर उनके सामने आ धमका हो।

डा. साहब राउन्ड पर आये थे।

'क्या कोई सर में चक्कर महसूस हुआ था गिरने से पहले '' डा० साहब ने वसंत से पूछा।

'' सर, पिच गीला था। पैर फिसल गया।'' वसंत बोला।

सब मुस्करा दिए थे।

सर मेरा ब्लड शुगर। कोले-स्ट्राल। क्या ये सब नार्मल लिमिट में हैं ? मुझे खिलाडी से दर्शक दीर्घा में नहीं भेज रहे हैं आप ?.. वसंत ने डाक्टर से मुस्कराते हुए पूछा।

'नई लक्ष्मण रेखाएं खिंची जा चुकी है वसंत। उनके अनुसार दवाएँ तुम्हें लेनी होगी। जैसे पहले ब्लड प्रेशर की लोअर नार्मल लिमिट नब्बे थी। अब अस्सी कर दी गयी है। तुम्हारी छियासी है।'' डा० साहब का उत्तर था।

इस बिन्दु पर प्रतीक्षा कर रहे तेज प्रकाश को बातों में सम्मिलित होने का अवसर मिल गया।

''सर। तभी कम्पनियों को मौका मिलेगा। उनके मुनाफे बढ़ सकेंगे'; तेज प्रकाश बोले।

वसंत ने तेज प्रकाश का परिचय डा० साहब से कराया।

''आप जैसे महानुभाव मुहिम से जुडे। यह समय की मांग है। काश्मीर से हम खदेड़ दिये गये। पूरे विश्व में इसकी दूसरी मिसाल नहीं है। मुझे लगता है, कुछ समय बीतने के बाद पाकिस्तान बनाने की कीचड़ हमारे चेहरों पर होगी।'' बोले तेज प्रकाश।

शायद उनका संवाद लम्बा खिंचता, लेकिन टेलीविजन पर हो रही घोषणा ने उन सबका ध्यान खींचा था। वातावरण में पसरी धुंध के कारण क्रिकेट मैच स्थगित हो गया था।

क्रिकेट मैदान से संवाददाता रिपोर्ट कर रहा था: हवा की गति कम है। शायद इसलिए व्यापारिक भट्‌टियों से जलने वाले पेटकोक का धुँआ धुँध के रूप में पसरा है। गहरी साँस लेने में कठिनाई होती है। पेटकोक पट्रोलियम रिफाइन करने वाली कम्पनियों का कबाड़ है। इसका बडी मात्रा में आयात इसके सस्ता होने के कारण किया जाता है। इसमें खतरनाक सल्फर की मात्रा मानक से कई हजार गुना होती है। नसीब का हिस्सा बन गया कबाड़ हमारे लिए आइना है।''

इस बात ने सबका रग उतार दिया था। वसंत को लगा जैसे लगातार सीरीज हारने का फरमान सुना दिया गया हो।

लक्ष्मण रेखाओं की सौगात पश्चिम देता है। हमें उनके बीच में गुजर बसर करनी है। घर जाओ वसंत। कुछ दवाएं लिख दी हैं। आराम करो।'' जाते हुए डा० साहब बोले।

उस समय प्रकाश अपनी मूँछों पर ताव देने में मग्न थे। 'हनुमान चालीसा सुमरन की मिलती सफलता के साथ कुछ ज्यादा ताव देने लगे थे तेज प्रकाश। वह करवट कर लेट गया। उसे लगा-हल्दीघाटी पूरा देश बन चुका है। युद्ध जारी है। सदियों से हलकान है। इन हालात में हम घुटनों के बल रहेंगे। जूनूनी बनेंगे।

''घर वापस चले। प्रभा ने वसंत को जगाते हुए कहा। शायद उसकी आंख लग गयी थी।

चौंक कर उठा था वसंत। उठकर अपने हाथों को देख रहा था। जैसे उससे कुछ छूट गया हो।

''क्या हुआ। '' पूछा प्रभा ने।

अभी शिशिर मेरे साथ था। मेरे हाथों में एक कैप्सूल था। जिसमें उर्जा चिप थी। '' वर्तमान में लौटते हुए वसंत बोला।

'' क्या-''' समझ नहीं सकी थी प्रभा। वसंत मुस्कराने लगा।

अपने सपने को याद कर मुस्कराया था वसंत। जिसमें वह उर्जा चिप लिए शिशिर के साथ बजरंग बली के सामने था। जिसे वह महाराणा को देना चाहता। उदास महाराणा ने उसे देखा भर था। उसे लगा जैसे किसी पुरानी बाबडी की सदियों पुरानी जमी काई के बीच से सूरज झोंका हो। चेतक उठ खडा हुआ था। तभी प्रभा ने उसे जगा दिया।

'' तेजप्रकाश और कर्मवीर -? पूछा वसंत ने।

'' आपको झपकी लेते देख चले गये। कुछ कहना था उनसे ?'' पूछा प्रभा ने।

''नई रेखाओं के लिए समूचे एशिया को जुट जाना चाहिए। क्या हमारी मुहिम का रंग यह नहीं हो सकता. '' रूम से निकलते हुए वसंत ने कहा। प्रभा मुस्कराने लगी थी।

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अजय गोयल

निदान नर्सिग होम

फ्री गंज रोड हापुड़।

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नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी 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कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,831,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,4,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1919,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,648,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian 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कहानी // हल्दीघाटी नैनों चिप और चेतक // अजय गोयल
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