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लघु कथा – महादान // सुजाता शुक्ला

 sujata shukla

दे दे बाई ....शनिवार के दिन भिखारियों का एक घर से दूसरे घर मांगने का क्रम निरंतर जारी रहता था । अनुरी हर शनिवार की तरह इस शनिवार भी उस औरत को एक का सिक्का और रोटी सब्जी देने लगी ।

तभी उस भिखारिन ने पूछा घर में और कौन कौन हैं बेटी ,  मैं मेरे पति और दो बच्चे अनुरी ने सहज भाव से कहा । मेरा तो कोई नहीं है बेटी , भगवान तुम्हारा घर परिवार सदा सुखी रखे, ये कह के वो अगले घर की ओर बढ़ गयी ।

आज अनुरी की बेटी की शादी है। घर की रौनक चहल पहल ने खुशी को और दुगना कर दिया है। मेहमानों का आना निरंतर जारी है ।सुबह से ही सब व्यस्त हैं अनुरी घर के बाहर बगीचे में लोगों को मंडप के पास कुछ हिदायत दे रही थी ,तभी वो भिखारिन दरवाजे के पास आकर खड़ी हो गयी। अरे आज तो शनिवार नहीं है । पर रुको आज शुभ दिन है मैं अभी आई, अनुरी चहकते हुए अंदर जाने लगी। तभी उस भिखारिन ने आवाज लगाई बेटी इधर सुन , क्या हुआ अनुरी अंदर जाते जाते वापस मुड गयी । बेटी उस भिखारिन ने अपने आँचल की गांठ से 100 रुपए का मुडा तुडा नोट निकला और कहा इसे इंकार नहीं करना ,ये मेरी ओर से नातिन को आशीर्वाद है। मेरा तो और कोई नहीं है। ये कह के उसने 100 रुपए का नोट अनुरी के हाथ में थमा दिया । अनुरी स्तब्ध थी ।करीब 100 घरों में जाकर मांगने पर उसने सौ रुपए जुगाड़ कर पाया  होगा  और एक झटके में दान कर दिया । अरे माँ तुम्हारा ये आशीर्वाद तो महादान है ।ये कह के अनुरी की आँखें डबडबा गयी ।

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परिचय := एम एस सी वनस्पति शास्त्र से करने के बाद कुछ महीनो कॉलेज में अध्यापन।

आकाशवाणी रायपुर से कविता कहानियाँ प्रसारित ।

,नवभारत पेपर सहित अन्य पत्र पत्रिकाओं में कहानी कवितायें एवम लेख प्रकाशित।

अलग अलग मंचों में कहानी और कविताओं के लिए सम्मानित ।

एक काव्य संग्रह - "कृतिका" प्रकाशित।

,वर्तमान में आकाशवाणी रायपुर में नैमीत्तिक उद्घोषिका एवम दूरदर्शन में कार्यक्रमों का संचालन ।

पर्यावरण संरक्षण मण्डल रायपुर में कार्यरत ।

                       सुजाता शुक्ला

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