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व्यंग्य // एक वीवीआईपी की भारत यात्रा // आदर्श झा

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मोदी-मैक्रोन की बनारस यात्रा के समय तो गजब हुआ था..

कुछ बनारसी जैसे ही क़ुल्ला करने के बाद कचौड़ी जलेबी की तरफ रुख किए..देख क्या रहें हैं कि उनके मोहल्ले की सड़क शंघाई की सड़क को मात दे रही है..टूटी-फूटी सड़कों पर सुंदर-सुंदर फूल खिल आए हैं। रातों-रात होर्डिंग-बैनर की आँधी आ गई है।

और हम पक्का महाल में नहीं फ्रांस में खड़े हैं।

इतना व्यवस्थित इतना सुंदर.. वो भी बस रात भर में.

कवन जेसीबी,कवन पोकलेन लगाए बे.. ?

सहसा नागरिक की आंखें एक समस्या से चौड़ीया गई..ई बिकास-विकास तो ठीक है गुरु..लेकिन साला पान खाकर थूकेंगे कहाँ बे..? और जिस रजुआ की गुमटी के पीछे मूतते थे..उहां देखो तनिक तो..सरवा गमला रखके "स्वच्छ काशी सुंदर काशी" लिख दिया गया है...अब मूतेंगे कहाँ बे ?

एक बनारसी के लिए दिव्य निपटान की समस्या खड़ी हो जाए.. इससे ज्यादा  भयंकर समस्या क्या हो सकती है.. ? 

लेकिन महादेव की किरपा. इसका समाधान भी हुआ..

मैक्रोन जी के जाते ही सड़कों पर रखे 6 हज़ार गमले छह घण्टे के अंदर गायब हो गए..सड़कों पर ताड़ के पेड़ जो उग आए थे...उनको बहुत लोगों ने अपने घरों में सजा लिया..होर्डिंग को उखाड़कर भर गर्मी छत पर बिछाके चटाई का काम लिया गया।

और इस क्रांतिकारी कार्य के बाद जो दिव्य ज्ञान निकला उसका मतलब ये हुआ कि...

" मोदी जी पहले से मोटाय गयल हवें भाय..उनके अपने हेल्थ पर धियान देंबे के चाहीं। "?

कल फिर माननीय पीएम का आगमन है। बेहिसाब उमस है। सड़कें धोई जा रहीं हैं। चौराहों की रंगाई-पुताई हो रही है। जहां-जहां कूड़ा है,उसे स्मार्ट सिटी के होर्डिंग से ढंक दिया गया है।

पान के रंग से नहाई दीवाल पर अचानक ही महामना और गाँधी के साथ भोले बाबा और माँ अन्नपूर्णा प्रगट होकर स्वच्छ काशी और सुंदर काशी का आशीर्वाद दे रहें हैं।

एक युवा किस्म का बुजुर्ग और एक बुजुर्ग किस्म का युवा कर्मचारी पान खाकर अपने मातहतों को समझाइस दे रहा है-

"ठीक से चूना लगाओ,ठीक से।

रात साढ़े दस बजे शीतला घाट पर बैठकर समझ नहीं आ रहा कि कौन किसको चूना लगा रहा है।

आदर्श झा

मुजफ्फरपुर

2 टिप्पणियाँ

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