महाप्राण निराला की पुत्री सरोज - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, डी0लिट्0

SHARE:

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिन्दी साहित्याकाश के ऐसे नक्षत्र हैं जिनकी कीर्ति रश्मियाँ युगों-युगों तक निखिल विश्व को आलोकित ...

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिन्दी साहित्याकाश के ऐसे नक्षत्र हैं जिनकी कीर्ति रश्मियाँ युगों-युगों तक निखिल विश्व को आलोकित करती रहेंगी। नवनीत हिन्दी डाइजेस्ट के सम्पादक डॉ0 गिरिजा शंकर त्रिवेदी बताते हैं, ''बैसवारा क्षेत्र उन्नाव, रायबरेली एवं फतेहपुर जपनद के एक बड़े भूभाग में फैला हुआ है जो अंग्रेजों के दमन का शिकार हो गया था। इसी क्षेत्र के उन्नाव जनपद में एक गाँव गढ़ा कोला है जो बीघापुर से 4 किमी0 की दूरी पर उत्तर में स्थित है। उसी गाँव में शिवाधार तिवारी नामक एक गरीब ब्राह्मण रहा करते थे। उनके चार बेटों में गयादीन,जोधा, रामसहाय एवं रामलाल थे। गढ़ा कोला के पड़ोसी गाँव के कुछ लोग बंगाल चले गये जिससे उनकी स्थिति सुधर गई। एक बार निराला के पिता भी गरीबी से निजात पाने के लिए उनके साथ बंगाल चले गये और वहाँ जाकर पुलिस में भर्ती हो गये। उसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई राम लाल को भी वहीं बुलवा कर पुलिस में भर्ती करवा दिया। लेकिन पुलिस का कार्य उन्हें नहीं जमा और वे दोनों वहाँ से महिषादल जाकर वहाँ के राजा के यहाँ नौकारी करने लगे। यहीं निराला जी का जन्म हुआ।''

कविवर निराला का जन्म 21 फरवरी 1896 को हुआ था। पंडित ने कुंडली बनाकर बताया था कि लड़का मंगली है किन्तु भाग्यवान है। समय के साथ यह दुनिया में नाम करेगा। निराला जब मात्र तीन वर्ष के थे तभी उनकी माँ का निधन हो गया। उनके पिता ने ही उनका पालन पोषण किया। निराला के पिता उन्हें पैतृक गाँव गढ़ाकोला में लाते रहते थे। निराला का नाम सूर्ज कुमार रखा गया था। जब निराला मात्र 8 वर्ष के थे तभी उनके पिता ने उन्हें गाँव गढ़ाकोला लाकर उनका यज्ञोपवीत संस्कार किया। 14 वर्ष की आयु में निराला का विवाह रायबरेली जिले की डलमऊ तहसील के श्री राम दयाल दुबे व श्रीमती पार्वती की पुत्री मनोहरा देवी के साथ 1910 में संपन्न हुआ। मनोहरा देवी ने 1914 में पुत्र रामकृष्ण व 1917 में पुत्री सरोज को जन्म दिया। साहित्यकार डॉ0 रामनिवास पंथी ने लिखा है, ''सुरजीपुर के किसी अहीर ने निराला को तालाब से तोड़कर दो कमल के फूल दिये थे। निराला ने उस व्यक्ति से कहा कि इसी के नाम पर अपनी पुत्री का नाम सरोज रखा था। सरोज के पैदा होने के वर्ष में ही निराला जी के पिताजी का निधन हो गया। 1918 में आई एक महामारी में मनोहरा देवी का भी स्वर्गवास हो गया। निराला के अन्य परिवारीजन भी इस महामारी में काल कवलित हो गये। निराला ने अपने पुत्र रामकृष्ण व पुत्री सरोज को उनकी नानी के पास डलमऊ में छोड़ दिया जहाँ उनका लालन-पालन निराला की सलहज जानकी ने किया।

कविवर निराला ने अपनी कृति 'सरोज स्मृति' में अपनी पुत्री सरोज के जन्म से लेकर मृत्यु तक का घटनाक्रम प्रस्तुत किया है। सरिता विश्नोई ने वेब पत्रिका www.sahityakunj.net में लिखा है, ''सरोज सिर्फ सवा साल की चपल बालिका थी और अपनी कोमलता और चपलता में माँ का मुख पहचान ही रही थी कि उसकी माँ अपना जीवन चरित्र पूरा कर चली गयी। मातृहीन सरोज नानी के घर पली। वहीं वाल्यकाल के सारे विनोद कौतुक करती रही। महाप्राण निराला ने 'सरोज स्मृति' में स्वयं लिखा है-

तू सवा साल की जब कोमल

पहचान रही ज्ञान में चपल

माँ का मुख हो चुम्बित क्षण-क्षण

भरती जीवन में नव जीवन

वह चरित पूर्ण कर गयी चली

सब किये वहीं कौतुक विनोद

उस घर निशिवासर भरे मोद

खाई भाई की मार विकल

रोई उत्पल-दल-दृग छल-छल

चुमकारा उसने सिर निहार

फिर गंगा तट सैकत विहार

करने को लेकर साथ चला

तू गहकर चली हाथ चपला

आँसुओं धुला मुख हासोच्छल

लखती प्रसार वह ऊर्मि धवल

'सरोज स्मृति' में कवि निराला को वे दिन याद आते हैं जब वे दूर स्थित प्रवास से करीब दो वर्ष बाद अपनी पुत्री सरोज को देखने अपनी ससुराल गये। वहाँ वे फाटक के बाहर मोढ़े पर बैठे थे और हाथ में अपनी जन्म कुंडली पकड़े हुए थे। उनकी जन्म कुंडली में दो विवाह लिखे हुए थे। वे अपना दूसरा विवाह करके बच्चों की सौतेली माँ लाकर उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहते थे। वे अपनी कुंडली में लिखे भाग्य अंक को खंडित करना चाहते थे। उनके विवाह के तमाम प्रस्ताव आये किंतु वे अपने को मांगलिक कहकर टालते रहे। उन्होंने अपनी जन्म कुंडली को सरोज को खेलने को दे दिया। सरोज ने फाड़-फाड़ कर कुंडली के टुकड़े कर दिये। निराला के शब्दों में 'सरोज स्मृति' में यह चित्रण देखें-

याद है दिवस की प्रथम धूप

थी पड़ी हुई तुझ पर सुरूप

खेलती हुई तू परी चपल

मैं दूर स्थित प्रवास में पल

दो वर्ष बाद होकर उत्सुक

देखने के लिए अपने मुख

था गया हुआ बैठा बाहर

आँगन में फाटक के भीतर

मोढ़े पर ले कुंडली हाथ

अपने जीवन की दीर्घ गाथ

पढ़ लिखे हुए थे दो विवाह

हँसता था मन में बड़ी चाह

अपनी पत्नी मनोहरा देवी की मृत्यु के बाद निराला ने सरोज के माता और पिता दोनों के कर्तव्य का निर्वहन किया। बाल्यावस्था को छोड़कर जब सरोज ने यौवनावस्था में प्रवेश किया तो वह सुंदरता की प्रतिमूर्ति बन गयी। निराला जी ने सरोज की युवावस्था का वर्णन भी 'सरोज स्मृति' में किया है-

धीरे-धीरे फिर बढ़ा चरण

बाल्य की कलियों का प्रांगण

कर पार कुंज तारूण्य सुघर

आई लावण्य भार थर-थर

काँपा कोमलता पर सस्वर

ज्यों मालकोश नव वीणा पर

नैश स्वप्न ज्यों तू मंद-मंद

फूटी उषा जागरण छंद

काँपी भर निज आलोक भार

काँपा वन काँपा दिक प्रसार

परिचय-परिचय पर खिला सकल

नभ, पृथ्वी, द्रुम कलि किसलय दल

सरोज जब शादी योग्य हो गई तब निराला जी की सास ने निराला जी से सरोज की शादी करने को कहा। 'सरोज स्मृति' में निराला ने लिखा है-

सासु ने कहा लख एक दिवस

भैया अब नहीं हमारा वश

पालना-पोसना रहा काम

देना सरोज को धन्य धाम

शुचि वर के कर कुलीन लख कर

है काम तुम्हारा धर्मोत्तर

अब कुछ दिन रहो ढूंढकर वर

जो योग्य तुम्हारे करो ब्याह

होंगे सहाय हम सहोत्साह

कविवर सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने अपनी कन्या सरोज का विवाह बहुत ही सीधे-साधे ढंग से किया था। वे कन्नौजी बाह्मणों की विवाह पद्धति का समर्थन भी नहीं करते थे। वे दहेज तथा बारात पर किया गया खर्च व्यर्थ समझते थे। कान्य कुब्ज ब्राह्मणों के पैर पूजने में भी उन्हें संकोच था। 'सरोज स्मृति' में उन्होंने लिखा है-

सोचा मन में हत बार-बार

ये कान्यकुब्ज कुल कुलांगार

खाकर पत्तल में करें छेद

इनके कर कन्या अर्थ खेद

इस विषय बेलि में विष ही फल

यह दग्ध मरूस्थल नहीं सुजल

फिर सोचा मेरे पूर्वज गण

गुजरे जिस राह वह शोभन

कविवर निराला आर्थिक विपन्नता से ग्रस्त रहे थे। उन्हें सरोज के लिए एक ऐसा वर मिल गया था जो धन सम्पन्न तो नहीं था पर विद्धान था। उन्होंने 'सरोज स्मृति' मेंं लिखा है-

कल प्राण-प्राण से रहित व्यक्ति

हो पूजूं ऐसी नहीं शक्ति

ऐसे शिव से गिरिजा विवाह

करने की मुझको नहीं चाह

फिर आई याद मुझे सज्जन

है मिला प्रथम ही विद्वज्जन

नव युवक एक सत्साहित्यिक

कुल कान कुब्ज वह नैमित्तिक

दहेज और बारात पर किये गये व्यय को मिथ्या बताते हुए निराला जी 'सरोज स्मृति' में कहते हैं-

खत लिखा बुला भेजा तत्क्षण

युवक भी मिला प्रफुल्ल चेतन

बोला- मैं हँू रिक्त हस्त

इस समय विवेचन में समस्त

जो कुछ है मेरा अपना धन

पूर्वज से मिला करूँ अर्पण

यदि महा जनों को तो विवाह

कर सकता हँू पर नहीं चाह

मेरी ऐसी दहेज देकर

मैं मूर्ख बनूँ यह नहीं सुघर

बारात बुलाकर मिथ्या व्यय

मैं करूँ नहीं ऐसा सुसमय

निराला जी सरोज के विवाह में कुछ साहित्यिक मित्रों को बुलाकर बिना किसी आडंबर के पुरोहित कार्य स्वयं ही करने लगे थे। निराला ने विवाह के समय कलश का जल पड़ने पर सरोज के सौन्दर्य का वर्णन 'सरोज स्मृति' में इस तरह किया है-

देखा विवाह आमूल नवल

तुझ पर शुभ पड़ा कलश का जल

देखती मुझे तू हँसी मंद

होठों में बिजली फाँसी स्पंद

उर में भर झूली छवि संुदर

प्रिय की अशब्द श्रृंगार मुखर

तू खुली एक उच्छ्वास संग

विश्वास स्तब्ध बँध अंग-अंग

नत नयनों में आलोक उतर

काँपा अधरों पर थर-थर-थर

तरूण कन्या सरोज जब निराला जी का घर छोड़कर दूसरे के घर जातीं है उस समय का चित्रण करते हुए वे लिखते हैं-

जाना बस पिक बालिका प्रथम

पल अन्य नीड़ में जब सक्षम

होती उड़ने को अपना स्वर

भर करती ध्वनि मौन प्रांतर

कविवर श्री राम नरायण 'रमण' ने अपने एक लेख में बताया है कि सरोज का जन्म 1917 में और 1929 में उसका विवाह हुआ तथा 1935 मे उसकी मृत्यु हुई। रमण जी के अनुसार विवाह के समय सरोज की उम्र बारह वर्ष होनी चाहिए जो सही प्रतीत नहीं होती। वेब पत्रिका m.patrika.com पर एक लेख में सुधीर ने बताया है कि निराला की पुत्री सरोज के विवाह के एक वर्ष बाद ही सरोज की मृत्यु हो गई। वेब पत्रिका www.sahityakunj.net पर एक लेख में सरिता विश्नोई ने लिखा है, ''वे सरोज की मृत्यु बीमारी और समुचित चिकित्सा के अभाव को कारण न मानकर यह मानते हैं कि उसके जीवन के अठारह अध्याय पूरे हो चुके थे। सरोज का मरण जीवन के शाश्वत विराम की ओर जाने की यात्रा है क्योंकि उसने अपने जीवन के अठारह वर्ष जो गीता के अठारह अध्याय के समान हैं, पूरे कर लिए थे।'' इस प्रकार यदि 1917 में यदि 18 वर्ष जोड़ दिए जायें तो 1935 में सरोज की मृत्यु होगी। स्वयं निराला ने सरोज की मृत्यु के बारे में 'सरोज स्मृति' में लिखा है-

उनविंश पर जो प्रथम चरण

तेरा वह जीवन सिन्धु तरण

तनये ली कर दृक्पात तरूण

जनक से जन्म की विदा अरूण

गीते मेरी तज रूप नाम

वर लिया अमर शाश्वत विराम

सरिता विश्नोई ने वेब पत्रिका www.sahityakunj.net पर बताया है कि निराला सरोज की मृत्यु बीमारी और समुचित चिकित्या के अभाव को कारण न मानकर यह मानते हैं कि उसके जीवन के अठारह अध्याय पूरे हो चुके थे जो गीता के अठारह अध्याय के समान हैं। सरोज का मरण जीवन के शाश्वत विराम की ओर जाने की यात्रा है। निराला जी ने 'सरोज स्मृति' में लिखा है-

पूरे कर शुचितर सपरियाय

जीवन के अष्टादशाध्याय

चढ़ मृत्यु तरणि पर तूर्ण चरण

कहा पितु पूर्ण आलोक वरण

करती हूँ मैं यह नहीं मरण

'सरोज' का ज्योति-शरण-तरण

निराला अपने हृदय की करूणा उड़ेलते हुए अपना जीवन दर्शन प्रस्तुत करते हैं-

मुझ भाग्य हीन की तू संबल

युग वर्ष बाद जब हुई विकल

दुःख ही जीवन की कथा रही

क्या कहूँ आज . . नहीं कही

कविवर निराला को यह बात सालती रही कि वे अपनी एक मात्र पुत्री के प्रति पिता का दायित्व सही तरह नहीं निभा सके। वे लिखते हैं-

धन्ये मैं पिता निरर्थक था

कुछ भी तेरे हित कर न सका

जाना तो अर्थागमोपाय

पर रहा सदा संकुचित काय

लख कर अनर्थ आर्थिक पथ पर

हारता रहा मैं स्वार्थ समर

शुचिते पहना कर चीना शुक

रख सका न तुझे अतः दधिमुख

अपनी पुत्री सरोज का तर्पण स्वयं निराला ने दार्शनिक विधान के साथ किया था-

हो इसी कर्म पर वज्रपात

यदि धर्म रहे नत सदा साथ

इस पथ मेरे कार्य सकल

हो भ्रष्ट शीत के से शतदल

कन्ये गत कर्मों का अर्पण

कर करता मैं तेरा तर्पण

अंत में निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि सरोज महाप्राण निराला की अति प्रिय लाड़ली बेटी थी जिसे असमय ही काल ने अपना ग्रास बना लिया। सरोज अपना पार्थिव शरीर तो निराला जी के जीवन काल में ही छोड़कर चली गयी थी किन्तु निराला जी ने अपनी लेखनी से 'सरोज स्मृति' के माध्यम से उसे अमरत्व प्रदान कर दिया है।

-

डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, 'डी0लिट्0

शाक्य प्रकाशन, घंटाघर चैक

क्लब घर, मैनपुरी - 205001 (उ0प्र0)

स्थाई पता- ग्राम कैरावली, पोस्ट तालिबपुर

जिला- मैनपुरी (उ0प्र0)


ई मेल - harishchandrashakya11@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: महाप्राण निराला की पुत्री सरोज - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, डी0लिट्0
महाप्राण निराला की पुत्री सरोज - डॉ0 हरिश्चन्द्र शाक्य, डी0लिट्0
https://lh3.googleusercontent.com/-KtVQnUHEiYU/WsnDFrzQpFI/AAAAAAABAr4/cPCkRPuyfO8GN-k2JpDADpu2JX2BYIaAACHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-KtVQnUHEiYU/WsnDFrzQpFI/AAAAAAABAr4/cPCkRPuyfO8GN-k2JpDADpu2JX2BYIaAACHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/12/0-00.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/12/0-00.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content