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प्राची अक्टूबर 2018 : साहित्य समाचार

साहित्य समाचार

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अटल जी की याद में ‘आजादी के तराने’

नई दिल्लीः यहां हम सब साथ साथ एवं नवप्रभात जनसेवा संस्थान, दिल्ली द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी सभागार में स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘आजादी के तराने’ व राष्ट्रीय कला/समाज रत्न सम्मान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश भर से चुन कर आए चुनिंदा कलाकारों द्वारा देशभक्ति के गीत, नृत्य, अभिनय और संगीत के प्रदर्शन के साथ ही समाज और कला के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही प्रतिभाओं, समाज सेवियों/एनजीओ को प्रशंसा पत्र व स्मृति चिह्न देकर तथा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। अनेक कलाकारों को नकद राशि से भी सम्मानित किया गया।

यह प्रतिभा प्रदर्शन और सम्मान समारोह आईएएस टॉपर सुश्री इरा सिंघल के मुख्य आतिथ्य और सर्वश्री आलोक मिश्रा (IRSS), प्रीति पाल गुप्ता (समाजसेवी), सुंदर सोलंकी (डिप्टी एडीटर इंडिया न्यूज) एवं राजीव नारंग (समाज सेवी) के विशिष्ट आतिथ्य में बेहद खुशनुमा और जोश भरे माहौल में सम्पन्न हुआ।

श्रीमती भावना शर्मा द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा बताने और सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की एंकरिंग अपने रोचक अंदाज में इंडिया न्यूज की एंकर कु. विपनेश माथुर एवं भारत सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारी व कलाकर्मी श्री किशोर श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से किया। और अंत में आभार प्रदर्शन नव प्रभात जन सेवा संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती सुमन द्विवेदी ने किया।

प्रस्तुति : संजय भावना, नई दिल्ली

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान

मुजफ्रफरनगर : मुजफ्रफरनगर में साहित्य जगत की दृष्टि से बहुत ही विख्यात और मशहूर शख्सियत के आगमन से माहौल बहुत ही खुशगवार रहा. साहित्य जगत के भीष्म पितामह कहे जाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी मुजफ्रफरनगर के एक कार्यक्रम में पधारे तथा विस्तृत रूप से अपना व्याख्यान दिया. जानसठ रोड स्थित एस डी इंजीनियरिंग कॉलेज,ं मुजफ्रफरनगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान गोष्ठी पर अपना व्याख्यान देते हुए उन्होंने बताया कि इस जनपद का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है तथा यहां की गौरव गाथा कुछ न कुछ नया करने को उद्वेलित करती है. उन्होंने खतौली के पंडित सुंदर लाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास के पन्नों में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है तथा यह देश सदैव उनका ऋणी एवं आभारी रहेगा, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में उनकी भूमिका और उनके योगदान को कभी भी नकारा नहीं जा सकेगा. हालांकि इतिहासकारों ने इतिहास को लिखते वक्त उनके साथ इंसाफ नहीं किया लेकिन फिर भी सच्चाई छिप नहीं सकती. जो हकीकत है वह हकीकत ही रहेगी। इस अवसर पर एस पी ट्रेफिक बजरंग बली चौरसिया ने जिले के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोगों को यहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद रखते हुए उनके लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए. यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी तो वहीं जेल अधीक्षक अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि इस जिले का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है. यहां के महापुरुषों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर भाग लिया तथा अपनी कुर्बानी दी. उनके योगदान को लिपिबद्ध होने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर उनके नाम का कोई स्मारक या मूर्ति की स्थापना होनी चाहिए। क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी किसी एक की नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है कि जिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को लेकर कई किताबें लिखने वाले साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी हमारे बीच हैं. यह हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है। बाद में सुधीर विद्यार्थी का अभिनंदन किया गया तथा उनके द्वारा लिखी गई किताबों की चर्चा व सराहना भी की गई। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालक्ष्मी चैरिटेबल ट्रस्ट तथा एच डी चैरिटेबल सोसाइटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डॉ अ कीर्तिवर्धन द्वारा डाला गया। डॉ प्रदीप जैन, श्री तरुण गोयल तथा श्री मधुर नागवान ने विभिन्न स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला। एस डी इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ एस एन चौहान ने सभी अतिथियों तथा ट्रस्ट के संचालकों का
धन्यवाद ज्ञापित करते हुये इस प्रकार के कार्यक्रम बार बार आयोजित करने और अपने सहयोग के आश्वासन के साथ सबका धन्यवाद किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रगति मैडम द्वारा किया गया. इस दौरान देवराज पंवार, नादिर राणा, बबलू शर्मा, मुकुल दुआ, निधीष राज गर्ग, प्रोफेसर आर एम तिवारी, अमरीश गोयल, सुनील शर्मा, आचार्य महेन्द्र जी, निरंजन सिंह आदि उनके साथ रहे।

प्रस्तुति : डॉ अ कीर्तिवर्धन

डॉ शम्भु नाथ सिंह शोध संस्थान सम्मान समारोह

वाराणसी : दिनाँक तीन सितम्बर üúûø को प्रख्यात नवगीतकार, साहित्यकार, समीक्षक डॉ शम्भुनाथ सिंह की पुण्य तिथि के अवसर पर परेड कोठी, कैंट, बनारस में आयोजित समारोह में डॉ शम्भुनाथ सिंह शोध संस्थान ने उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत वाराणसी के साहित्यकारों को सम्मानित किया. समारोह की अध्यक्षता श्री ओम धीरज , गीतकार व् वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने की.

इस अवसर पर वरिष्ठ समीक्षक शब्द्बीज के सम्पादक डॉ इन्दीवर, प्रसिद्ध पत्रकार कवि श्री हिमांशु उपाध्याय एवं गीतकार डॉ अशोक सिंह विशिष्ठ अतिथि थे. स्वागत संस्थान के डॉ राजीव सिंह ने किया. वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि डॉ शम्भुनाथ सिंह का छंद्बद्ध एवं भारतीयता से परिपूर्ण

काव्य साहित्य की प्रतिस्थापना में अमूल्य योगदान है. उन्होंने हिंदी साहित्य की अप्रतिम सेवा की और इसे एक नयी दिशा प्रदान की. समारोह को संबोधित करते हुए डॉ इन्दीवर ने बताया कि संस्थान शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर पर शम्भुनाथ सिंह नवगीत विमर्श कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है जिसमें देश भर से नवगीतकार और नवगीत समीक्षक शामिल होंगे. इस अवसर पर कई खण्डों में प्रकाशित करीब आठ हजार पन्नों के डॉ शम्भुनाथ सिंह समग्र का लोकार्पण भी होगा. डॉ राजीव सिंह ने संस्थान के कार्यकलापों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान डॉ शम्भुनाथ सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व के तमाम पहलुओं के प्रचार प्रसार एवं उनके साहित्यिक मूल्यों के प्रोत्साहन की दिशा में सदैव क्रियाशील है.

समारोह में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से दुष्यंत कुमार पुरस्कार से सम्मानित गजलकार श्री अभिनव अरुण, विष्णुराव पराडकर पुरस्कार से सम्मानित प्रो प्रकाश सिंह और नरेश मेहता पुरस्कार से सम्मानित डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश को अंग वस्त्रम, सम्मान प्रतीक एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया. कवि अजीत श्रीवास्तव के संचालन में आयोजित समारोह में समकालीन स्पंदन के संपादक श्री धर्मेन्द्र गुप्त साहिल, शायर नरोत्तम शिल्पी, धूर्त बनारसी, डॉ अशोक अज्ञान आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे. समारोह में डॉ शम्भुनाथ सिंह के प्रति काव्यांजलि भी अर्पित की गयी.

प्रस्तुति : अभिनव अरुण, वाराणसी

राष्ट्रीय महिला काव्य मंच दिल्ली इकाई की मासिक गोष्ठी का आयोजन

नई दिल्ली : राष्ट्रीय महिला काव्य र्यक्रम का कुशल संचालन डॉ भावना शुक्ल ने किया।

प्रस्तुति : डॉ. भावना शुक्ल, नई दिल्ली

हिंदी साहित्य के पुरोधा का लोकार्पण

नई दिल्ली : साहित्यायन ट्रस्ट द्वा जी ने किया.

प्रस्तुति : डॉ भावना शुक्ल, नई दिल्ली

विशेष रपट

राष्ट्रीय साहित्यिक कुंभ का आयोजन

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नारनौल (हरियाणा) : स्थानीय सेक्टर 1, पार्ट-2 स्थित अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र ‘मनुमुक्त भवन’ में आज एक राष्ट्रीय साहित्यिक कुंभ का आयोजन मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया गया। जिसमें जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम सहित दस राज्य के 2 दर्जन से अधिक प्रमुख साहित्यकारों तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया। हिंदी सप्ताह के अंतर्गत हिंदी विमर्श एवं पुरस्कार वितरण समारोह के रूप में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण समारोह में केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर अवनीश कुमार मुख्य अतिथि तथा महर्षि बाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ श्रेयांश द्विवेदी और सिंघानिया विश्वविद्यालय राजस्थान के कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव विशिष्ट अतिथि थे। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, जाट पाली, महेंद्रगढ़ में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय_ पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में हिंदी के प्रोफेसर डॉ. अशोक अग्रवाल_ मेजर सतीश दहिया राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ शिवतेज सिंह और महिला महाविद्यालय राजस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश यादव ने विशिष्ट वक्ता के रूप में हिंदी भाषा के रूप विकास क्रम और वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करते हुए हिंदी दिवस को नए आयाम प्रदान किए।

डॉ. रामनिवास मानव के प्रेरक सानिध्य में डॉ. जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना गीत के बाद डॉ. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में संपन्न हुए समारोह में 6 प्रमुख साहित्यकारों को नामित पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इनमें जबलपुर मध्य प्रदेश के राकेश भ्रमर को डॉ. मनुमुक्त मानव काव्य पुरस्कार, जम्मू-कश्मीर की क्षमा कौल को अमर सिंहक- नैना देवी कथा पुरस्कार, हैदराबाद तेलंगाना की पवित्रा अग्रवाल को धूपल सिंह -खीका देवी बाल साहित्य पुरस्कार , खटीमा उत्तराखंड के राज किशोर सक्सेना को कृष्णा- विजय यादव समग्र साहित्य पुरस्कार, अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय को प्रि. धर्मपाल यादव का जीवन साधना पुरस्कार, तथा आइजोल मिजोरम की डॉ. सी ई जीनी को कुंती देवी-बाबूलाल वर्मा संस्कृति पुरस्कार के अंतर्गत 11-11 हजार की राशि व सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त सिद्धार्थ शंकर राय और डॉ. अशोक सबरवाल को डॉ. मनुमुक्त मानव स्मृति सम्मान से नवाजा गया।

इन्होंने यह कहा :- हिंदी को एक समर्थ और गतिमान भाषा बताते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर अवनीश कुमार ने कहा कि हिंदी अब भारत की सीमाएं लांघकर विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है इसके विकास को लेकर. सरकार प्रयासरत ही नहीं प्रतिबद्ध भी है. विशिष्ट अतिथि डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि हिंदी का शब्दकोश और साहित्य कोश दोनों अत्यंत समृद्ध हैं. हिंदी की शब्द ग्रहण की प्रवृत्ति और शब्द निर्माण की क्षमता बेजोड़ है. कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और सच्ची संपर्क भाषा है, अतः इसके व्यवहार में हमें शर्म नहीं गर्व का अनुभव होना चाहिए. हिंदी के विकास से ही देश का विकास संभव है. हिंदी को सूर तुलसी और प्रसाद प्रेमचंद की भाषा बताते हुए अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अश्वनी शर्मा ने कहा कि हिंदी के विकास में हिंदीतर प्रदेशों के लोगों विदेशी विद्वानों तथा प्रवासी भारतीयों का योगदान हिंदी भाषियों से कम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता और सरकार दोनों के सहयोग से हिंदी राजकाज और कामकाज की भाषा बन सकती है।

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यह रहे उपस्थित :-

समारोह में उक्त विद्वानों के अतिरिक्त फरीदाबाद हरियाणा के असिस्टेंट लेबर कमिश्नर चंद्रपाल चौहान, चिड़ावा राजस्थान के पूर्व जिला वन्यजीव अधिकारी जगदीश चंद्र धीधवल, जम्मू के डॉ. अग्निशेखर हैदराबाद के लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, भादरा राजस्थान के प्राचार्य डॉ. भीम सिंह सुथार, अलीगढ़ के डॉ. संतोष कुमार शर्मा, झज्जर के राजपाल सिंह गुलिया, हिसार के डॉ. नरेश कुमार, जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, लीड बैंक अधिकारी एस डी पाठक, बिजली बोर्ड के
अधीक्षक अभियंता नवीन वर्मा, हु्यस्त्रा के एसडीओ अरुण कौशिक, पूर्व बैंक प्रबंधक विजय सिंह यादव, पार्षद एवं निगरानी समिति के चेयरमैन महेंद्र गोड, महेंद्रगढ़ पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन अशोक बुचोली, पूर्व डाकपाल महेंद्र कुमार वर्मा, हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पूर्व उप सचिव दुलीचंद शर्मा, हैफड के जिला प्रबंधक डॉ. वाईएस शेखावत, शिक्षाविद डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज, किशन लाल शर्मा, गजानंद कौशिक, परमानंद दीवान, सरदार संतोख सिंह, बलदेव सिंह शहर, राम गोपाल अग्रवाल, कृष्ण कुमार शर्मा, एडवोकेट, प्रिंसिपल मुकेश कुमार, भूपसिंह भारती, मनमोहन सोनी, डॉ कांता भारती, श्रद्धा शर्मा, नवरत्न वर्मा, अमर सिंह निमोरिया, देवेंद्र कुमार आदि गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

प्रस्तुति : डॉ कांता भारती

571 सेक्टर एक पार्ट 2

हु्यस्त्रा, नारनौल (हरियाणा) पिन-123001

कवि व पत्रकार विष्णु खरे नहीं रहे

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नई दिल्ली : मशहूर कवि और पत्रकार तथा वर्तमान में हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे (78) का दिनांक 19.09.2018 को नई दिल्ली के जी.बी. पन्त अस्पताल में निधन हो गया. एक सप्ताह पूर्व ब्रेन हैमरेज के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनका जन्म छिंदवाड़ा में हुआ था. वह एक कवि तो थे ही, पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अभूतपूर्व कार्य किया.

हाल ही में मुंबई से वापस दिल्ली आकर उन्होंने हिंदी अकादमी का कार्यभार संभाला था. दिलचस्प बात यह है कि मयूर विहार फेज-1, दिल्ली के जिस मकान को बेचकर वह चले गये थे, उसी मकान में वह बतौर किराएदार रह रहे थे.

विष्णु खरे कवि के रूप में कुछ विशेष थे. वह कविता को कहानी के अंदाज में लिखते थे. ऐसी कविता लिखना एक साधना है. उनके इस अंदाज को बाद के कवियों ने भी अपनाया. विष्णु खरे की छवि एक आलोचक की भी रही. वह ज्ञान-विज्ञान की खान थे. उन्हें फिल्मों की बहुत जानकारी थी. 78 साल की उम्र में भी मीडिया में सक्रिय रहना उल्लेखनीय है. वह नियमित रूप से दैनिक पत्रों में फिल्मों से संबंधित स्तंभ लिखा करते थे.

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

प्रस्तुति : राकेश भ्रमर

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