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प्राची अक्टूबर 2018 : लघुकथा // मैसेज // राकेश माहेश्वरी

लघुकथा

मैसेज

राकेश माहेश्वरी

बाप मर चुका था. बेटा विदेश में था. पड़ोसी चिंतित थे कि दाह संस्कार कैसे होगा? बेटे को फोन मिला रहे थे, परन्तु वह फोन नहीं उठा रहा था. तभी एक बुजुर्ग ने कहा, ‘‘मैसेज कर दो.’’ मैसेज किया गया. उसका जवाब आया-‘‘मैसेज के लिए धन्यवाद! मुझे खेद है कि पिताजी नहीं रहे, परन्तु वह अपनी पूरी उम्र जीकर मरे हैं. मैं यहां पर अति व्यस्त हूं. मेरा आना संभव नहीं है. बार-बार फोन करके मुझे परेशान न करें. आप कोई खाता नं. भेज दें, मैं उसमें पैसा डाल दूंगा. उससे मेरा पिता का अंतिम संस्कार कर दीजिएगा. आप सभी को फिर से धन्यवाद!’’

मैसेज पढ़कर सभी सन्न् रह गये. सभी महसूस कर रहे थे जैसे सेठ सम्पत्तिलाल की नहीं, उनके बेटे की मौत हो गयी थी.

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सम्पर्क : गली नं. 7, धनारे कॉलोनी,

नरसिंहपुर (म.प्र.)

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