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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 27 // मन की आवाज // दीपक दीक्षित

 

प्रविष्टि क्रमांक - 27


मन की आवाज

दीपक दीक्षित

उमा ने अपनी पोती रीना को एक अच्छा खासा भाषण परिवार की इज्जत बचाने और अपने माँ-बाप की मर्जी से शादी को हाँ कहने के ऊपर दे तो दिया पर, उसे अपने खुद की जवानी के दिन भी याद आ गये । चालीस साल पहले वो खुद इसी तरह की स्थिति में थी जहाँ उसके माँ -बाप उसकी मर्जी की खिलाफ उसकी शादी करने वाले थे और वह भाग खड़ी हुई थी घर से। फिर उसने दर दर की ठोकरें खाई और ज़माने के असली चेहरे से साक्षात्कार होने की बाद अंत में घर लौट आयी थी। उसके इस कृत्य ने मोहल्ले में न जाने कितने ही चटपटी किस्से-कहानियों को जन्म दिया था।

उसे लगा जैसे स्वादिष्ट और चटपटा खाना (जो शरीर के लिए हानिकारक है) खाते वक्त हम अपने मन की आवाज को अनसुना कर देते हैं (जो हमें रोकने की कोशिश करता है) , वैसे ही हर शादी में लड़की के मन की आवाज ढोल मंजीरे के शोर में दबा दी जाती है।

शुरू में तो सब ठीक रहता है फिर कुछ वक्त बीत जाने के बाद डॉक्टरों के चक्कर लगाने शुरू हो जाते है शरीर को ठीक रखने में। और इसी तरह शादी में भी शुरू शुरू में तो लड़की निभा ले जाती है किसी तरह से पर फिर अशांति का एक दौर शुरू हो जाता है जो अक्सर कोर्ट- कचहरी तक खींच कर ले जाता है।

वो सोचने लगी कि क्यों नहीं सुन पाते हम अपने मन की आवाज? क्यों है हमारा ऐसा सामाजिक ढांचा? कौन पहल करेगा इन कुरीतियों को ख़त्म करने की?

उसने फैसला किया वह फिर से ऐसा नहीं होने देगी। वह चल दी समझाईश देने पर इस बार रीना को नहीं बल्कि उसके माता पिता को।


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दीपक दीक्षित
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निवास : सिकंदराबाद (तेलंगाना)
सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन
संपर्क​ : coldeepakdixit@gmail.com

रुड़की विश्विद्यालय (अब आई आई टी रुड़की) से इंजीयरिंग की और २२ साल तक भारतीय सेना की ई.ऍम.ई. कोर में कार्य करने के बाद ले. कर्नल के रैंक से रिटायरमेंट लिया . चार निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी कुछ समय के लिए काम किया।
पढ़ने के शौक ने धीरे धीरे लिखने की आदत लगा दी । कुछ रचनायें ‘पराग’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘अमर उजाला’, ‘नवनीत’ आदि पत्रिकाओं में छपी हैं।
भाल्व पब्लिशिंग, भोपाल द्वारा 2016 में "योग मत करो,योगी बनो' नामक पुस्तक तथा पांच साँझा-संकलन प्रकाशित हुए हैं ।
कादम्बिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण सेवा समिति , भोपाल तथा नई लक्ष्य सोशल एवं एन्वायरोमेन्टल सोसाइटी द्वारा वर्ष २०१६ में 'साहित्य सेवा सम्मान' से सम्मानित किया गया। अमृतधारा संस्था ,जलगॉंव द्वारा 'अमृतादित्य साहित्य गौरव' सम्मान प्रदान किया गया (२०१८).
वर्ष 2009 से ‘मेरे घर आना जिंदगी​’ ​(http://meregharanajindagi.blogspot.in/ ​) ब्लॉग के माध्यम से लेख, कहानी,कविता का प्रकाशन। कई रचनाएँ प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं तथा वेबसाइट (प्रतिलिपि.कॉम, रचनाकार.ऑर्ग आदि) में प्रकाशित हुई हैं।
साहित्य के अनेकों संस्थान में सक्रिय सहभागिता है । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई गोष्ठियों में भाग लिया है। अंग्रेजी में भी कुछ पुस्तक और लेख प्रकाशित हुए हैं।
साँझा-संकलन
संपादक का नाम
पुस्तक का नाम
विधा
प्रकाशक
डा. डी. विद्याधर
हिंदी की दुनियां ,दुनियां में हिंदी
निबंध
मिलिंद प्रकाशन ,हैदराबाद
जयकांत मिश्रा
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कहानी
भाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
जयकांत मिश्रा
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लघुकथा
भाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
जयकांत मिश्रा
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भाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
डा प्रियंका सोनी 'प्रीत'
काव्य रत्नावाली
कविता
साहित्य कलश प्रकाशन , पटियाला

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