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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 44 // चुनावी मुनादी // अर्विना गहलोत


प्रविष्टि क्रमांक - 44

अर्विना गहलोत

चुनावी मुनादी  

रामरती जल्दी चल बाहर पार्टी वाले साड़ी बांटने आए  हैं।

रामरती हल्दी मसाले के सने हाथ साड़ी के पल्लू से पोछती हुई दशरथ ‌ के पीछे हो ली बड़ी भीड़ जुटी हुई थी स्त्री पुरुष भागम भाग से धूल ऊपर आसमान में छा रही थी।

क्योजी हमारा नंबर आयेगा ?

आप भी साथ में रहें ऐसा न हो कोई हमारे हाथ से साड़ी पिछली बार की तरह छीन कर  भाग ना जाए।

अरे रामरती ! डरो नहीं देखो दूरदर्शन पर समाचार में जो दिखाई देते हैं वो भी सूंघते हुए आते ही होंगे इस‌बार ऐसा  कुछ हुआ तो उन्हीं के पास पहुंच जायेंगे । सब बता देना की इधर साड़ी बाँटते हैं और उधर गुंडों से छिनवा लेते हैं।

ऐ जी सुनो साड़ी ले तो ली हैं, लेकिन पार्टी वाले वोट के लिए भी बोल रहे हैं हमे किसे देना चाहिए ? पिछले दिनों साईकिल बटी थी आज साड़ी बटी रही हैं। परसों कुछ और बटेगा  किस किस को वोट देंगे ।

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तुम बुरवक चुप रहो अभी मुंह मत खोलो नहीं तो समझो साड़ी हाथ से गई ।

वोट का समय आयेगा तब सोचेंगे किसे दे किसे ना दे दें ।

हमारी जिंदगी में तो इलेक्शन ही त्योहार है इसी समय कुछ मिल जाता है वर्ना कोई नहीं पूछता पांच साल तक मध्यावधी चुनाव हो जाए तो समझो बोनस मिल गया हम मर्द लोगों थोड़ा पीने पिलाने को साथ में सभा में ताली बजाने का और माला पहनाने का  पैमेंट मिल जाता है ।

माईक  वाले से दूर ही रहना मीठा मीठा बोल कर

ना जाने  टी वी पर क्या क्या चला देता है ?

रामरती हमरी प्यारी हमे तो आप ने काम से काम रखना है , आँख से न देखो ना कान से सुनों न‌ मुंह से कुछ बोलो अपने राम की तो ...

ना काऊ से दोस्ती ना काऊ से बैर

अर्विना गहलोत

ashisharpit01@gmail.com

1 टिप्पणियाँ

  1. विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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