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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 55 // पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी // शंकर लाल

प्रविष्टि क्रमांक - 55

शंकर लाल

पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी

शर्मा जी, आज भी हर रोज ही तरह शाम को खाना खाने के बाद कॉलोनी में टहलने के लिए घर से निकले परन्तु देखा पार्क में एक विशाल पंडाल लगा हुआ है और पार्क के बहार बड़ी बड़ी गाड़ियों की लाइन लगी हुई है। शर्मा जी को कुछ समझ में नहीं आया ये क्या हो रहा है, क्योंकि मोहल्ले में होने वाले हर सामाजिक कार्यक्रम की उनको जानकारी होती थी। पार्क में क्या कार्यक्रम है ये जानने की उत्सुकता से जैसे ही शर्मा जी आगे बढे तो पार्क के गेट पे खड़े संत्री ने इंट्री पास दिखाने के लिए कहा। शर्मा जी सकपका गए, अपने ही मोहल्ले के पार्क में जाने के लिए इंट्री परमिट ?

तभी संत्री ने बताया साहब यहाँ पर्यावरण विभाग के तत्वावधान में ग्रीन NGO द्वारा पर्यावरण बचाने पर एक संगोष्ठी चल रही है। आप कृपया करके यहां से चले जाए वरना किसी ने देख लिया तो मेरी नौकरी चली जाएगी। शर्मा जी ये सोचकर चले गए ही कम से कम इस पार्क का एवं शहर के पर्यावरण को बेहतर बनाने काम होगा।

वो फिर हमेशा की तरह सुबह सुबह पार्क में सेर करने निकले तो पार्क का नजारा देख कर स्तब्धः रह गए। हरतरफ प्लास्टिक के दोने, पत्तल एवं २००-२०० ग्राम की प्लास्टिक की बोतलें बिखरी हुई थी जिनपर कौए मंडरा रहे थे।

2 टिप्पणियाँ

  1. लघुकथाएँ मेल किये तीन दिन हो गये लेकिन अब तक प्रकाशित नहीं हुई स्पष्ट करें

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  2. विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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