नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 73 // प्रशंसा // सीताराम गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 73

सीताराम गु्प्ता

लघुकथाः

प्रशंसा

ये एक अनौपचारिक-सी काव्य गोष्ठी थी जिसमें आयोजक महोदय ने अपने गिने-चुने परिचितों व कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को ही आमंत्रित किया था। एक एनआरआई कवयित्री शबनम के सम्मानार्थ इस एकल काव्य-पाठ गोष्ठी का आयोजन किया गया था। वाह-वाह और तालियों की गूँज के बीच कोई दो घंटे से भी ज़्यादा से शबनम का ये काव्य-पाठ जारी था। हर कविता के बाद श्रोता कविता पर अपनी राय भी दे रहे थे और और कविताएँ सुनाने का आग्रह भी करते जा रहे थे। श्रोताओं की प्रशंसा से अभिभूत शबनम भी उत्साहित होकर एक के बाद एक कविता प्रस्तुत करती जा रही थी। शबनम ने कहा भी कि उसका इण्डिया का ये दौरा बहुत व्यस्त है और उसे अन्य कई कार्यक्रमों और सम्मान समारोहों में भी पहुँचना है लेकिन श्रोताओं की फरमाइशें किसी भी तरह से कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। किसी तरह काव्य-पाठ अपने समापन तक पहुँचा। काव्य पाठ के उपरांत सभी श्रोताओं ने पुनः अपने-अपने विचार रखे सिवाय राममनोहर शर्मा के। कार्यक्रम के आयोजक ने राममनोहर शर्मा से भी अपने विचार रखने का आग्रह किया। कई बार ना-नुकर करने के बाद राममनोहर शर्मा ने माइक हाथ में ले लिया और कहा, ‘‘ यदि मैं सच कहूँ तो एक भी कविता मेरी समझ में नहीं आई। सभी कविताएँ मेरी समझ से बाहर थीं।’’ राममनोहर शर्मा की इस स्पष्टोक्ति से किंचित विचलित होते हुए एक सज्जन ने कहा, ‘‘ राममनोहर जी, लेकिन बाक़ी लोगों को तो कविताएँ अच्छी लगीं। सबने ख़ूब प्रशंसा भी की है।’’ ‘‘जी, बाक़ी लोग कविता के अच्छे पारखी हो सकते हैं जो शायद मैं नहीं हूँ। बिना समझे मैं कैसे कुछ कहूँ? वैसे भी मैं विदेश यात्रा का जुगाड़ बिठाने के लिए कविता सुनने नहीं आया हूँ इसलिए भी बिना समझे तारीफों के पुल बाँधना ठीक नहीं समझता, ’’ ये कहकर राममनोहर शर्मा ने माइक वापस आयोजक महोदय के हाथ में थमा दिया। वातावरण में पूरी तरह से निस्तब्धता व्याप्त हो गई। इसके फ़ौरन बाद कार्यक्रम समाप्त हो गया और राममनोहर शर्मा बाहर निकलने के लिए मुख्य द्वार की ओर हो लिए। सभी आगंतुक पुनः शबनम को घेरकर खड़े हो गए और उनकी कविताओं पर चर्चा प्रारंभ कर दी। कार्यक्रम के उपरांत आगंतुकों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई थी लेकिन आयोजक महोदय दूसरे कामों में इतने अधिक व्यस्त हो गए कि राममनोहर शर्मा को जलपान के लिए रुकने के लिए कहना भी भूल गए।

सीताराम गुप्ता,

ए डी 106-सी, पीतम पुरा,

दिल्ली - 110034

Email : srgupta54@yahoo.co.in

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.