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लघुकथा // पेंशन // निहाल चन्द शिवहरे

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पेंशन


बैंक के केबिन से मेरी दृष्टि बाहर एकत्र बुजुर्ग ग्राहकों पर पड़ी। मैंने अपने चपरासी से पूछा " यह भीड़ कैसी है ? "

चपरासी ने जवाब दिया ' सर, आप भूल गये आज तो वृद्धावस्था पेंशन का वितरण दिवस है , इसलिए आज सभी बैंक आये हैं ।

" हॉं , याद आया " यह कहते हुए मैं अपने कार्य में व्यस्त हो गया ।

नमस्ते बेटा , अचानक यह सुनकर मेरा ध्यान भंग हुआ । मैंने उनका अभिवादन करते हुए प्रश्नवाचक दृष्टि से उनके साथ आये एक लड़के की ओर ध्यान से देखा तो उन्होंने परिचय कराते हुए कहा कि "ये मेरे छोटे बेटे का बेटा है जो मेरे साथ आया है ।"

कार्य में व्यस्त होते हुए भी मैंने उत्सुकतावश पूछा कि "पिछली बार आपके साथ जो पोता आया था , वह इससे उम्र में छोटा है या बड़ा ।"

अचानक उनके चेहरे के भाव बदल गये और उनकी आवाज़ भर्रा गयी ,करूण भाव से बोली " बेटा पिछली छ:माही में , मैं अपने बड़े बेटे के साथ रह रही थी इसलिए उसका बेटा मेरे साथ आया था । अब अगली छ:माही में , मैं छोटे बेटे के साथ रहूँगी , इस कारण छोटे बेटे का पुत्र आज मेरे साथ पेंशन लेने आया है ।"

मैं अवाक् !!!!!

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निहाल चन्द शिवहरे

     374, नानक गंज , सीपरी बाज़ार

झॉंसी - 284003

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