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लघुकथा // 'पेट का सवाल' // निवेदिता श्रीवास्तव

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'पेट का सवाल'

आखिरकार आ ही गयी वो घड़ी जिसके इंतेजार में लाजो बार बार झांक रही थी। पड़ोस में एम्बुलेंस आयी थी सुबह। इस समय लाश उतारी जा रही थी ठकुराइन की।

लाजो को कमायी पर गये कई दिन हो गए थे। आज विलाप का न्यौता मिलने की ख़ुशी में लाजो रुदाली जल्दी जल्दी सज के झरोखे पर आ गयी।

आज बच्चे भरपेट खाना पाएंगे।

         द्वारा-निवेदिता श्रीवास्तव

                    लखनऊ

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