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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 104 // महंगाई भत्ता // राममूरत 'राही'

प्रविष्टि क्रमांक - 104

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-- राममूरत 'राही'

महंगाई भत्ता

घर से थोड़ी दूर पर एक सब्जी वाला ठेले पर सब्जियां बेच रहा था। कुछ मजदूर उससे सब्जियां खरीद रहे थे। जब सब्जी वाला हमारे घर के सामने आया, तो मैंने उससे एक किलो टमाटर लिए और उसे एक बीस का नोट पकड़ा दिया। इस पर वह बोला -- "बाबूजी ! पांच रुपए और दो, टमाटर पच्चीस रुपए किलो है।"

मैंने कहा--"मै देख रहा था, तुमने उन मजदूरों को टमाटर बीस रुपए किलो दिए थे, फिर मुझे पच्चीस रुपए किलो क्यों दे रहे हो ?"

मेरी बात सुनकर वह बोला--"बाबूजी ! वो लोग मजदूर हैं, रोज कमाते रोज खाते है,   मैंने उन्हें भाव के भाव में टमाटर दिए है।"

फिर उसने मेरे घर के बाहर बाउंड्री वॉल पर लगी नेम प्लेट की ओर इशारा करते हुए कहा -- "बाबूजी ! आप की तो सरकारी नौकरी है। आपको तो महंगाई बढ़ने पर महंगाई भत्ता मिल जाता हैं ,उन लोगो को तो नहीं मिलता ना।"

-- राममूरत 'राही'

पता -- 168- बी, सूर्यदेव नगर,

पो.आ. -- सुदामा नगर,

इंदौर -- 452009 (मप्र)


email-- rammooratrahi@gmail.com

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 6145450835780997529

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  1. बेनामी1:06 am

    सार्थक लघुकथा।
    सब्जी वाले का दृष्टिकोण सही है। यही नियम व्यापारियों, उद्योगपतियों पर भी लागु करना उचित होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

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