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शीत और नव वर्ष के हाइकु // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

(१)सर्दियों के हाइकु –

पंख सिकोड़े
शाल ओढ़े गौरैया
ढूँढती धूप

बाज़ न आए
सूर्य करे ठिठोली
सर्द मौसम

बेमुरव्वत
ओढ़ कर कोहरा
सूरज सोया

गरीब बेचारा
बीरबली खिचड़ी 
तारों से तापे

गर्दिश मारा
आसमान को ओढ़े
ज़मीन बिछाए

सुर न सधा
ठण्ड बजती रही
कोहरा घना

धुंध को चीर
जो आर पार देखे
प्रकाशवीर

अन्धेरा छाया
लुट गई रोशनी
धुंध ही धुंध

निखरा रूप
बहुत दिनों बाद
निकली धूप

धुंध विचित्र
धुंधले कर गई
उजले चित्र

(२) नए वर्ष के हाइकु

यादों में बिंधा
दो हज़ार अठार:
विदा, अल्विदा

व्यतीत वर्ष
पुराना, स्वागत हो
नवल वर्ष

गए वर्ष की
उपजा है राख से
वर्ष ये नया

नए साल में
रचें कुछ मौलिक
नया, सार्थक

अभिनन्दन
हमें तुम्हें सबको
वर्ष नवल

वर्ष नवल
जाग्रत हो चेतना
सच्ची, सरल

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परिचय

नाम – डा. सुरेन्द्र वर्मा  (वरिष्ठ कवि, चिन्तक, और व्यंग्यकार)
जन्म-तिथि – २६ सितम्बर, १९३२
जन्म स्थान –मैनपुरी, (उ. प्र.)
शिक्षा – एम.ए  पीएच. डी.
व्यवसाय – सेवानिवृत्त प्राचार्य, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, (म.प्र.)   सम्प्रति - साहित्य संवर्धन
प्रकाशन – दर्शन, कविता, हाइकु, व्यंग्य, निबंध आदि, की २४ पुस्तकें प्रकाशित
सम्मान – उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा निबंध के लिए महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार तथा व्यंग्य के लिए शरद जोशी पुरस्कार से सम्मानित | अनेक संस्थाओं द्वारा मानद उपाधियाँ – भारतीय साहित्य सुधा रत्न, साहित्य शिरोमणि आदि, - से सम्मानित 
विशेष – चित्रकारिता (रेखांकन में अभिरुचि) इलाहाबाद संग्रहालय में “सर्जना २००९” में रेखा-चित्रों की प्रदर्शिनी | अनेक पत्र-पत्रिकाओं में चित्र प्रकाशित |

ई मेल – surendraverma389@gmail.com
पता – १०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड
इलाहाबाद -२११००१ 
 
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कविता 2074231266897585537

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