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व्यंग्य // आलेख झूठ बोले कौआ काटे // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

एक फिल्मी गाने में यह सलाह दी गई है कि झूठ नहीं बोलना चाहिए और काले कौए से डरना चाहिए क्योंकि अगर आप झूठ बोलेंगे, तो कौआ आपको काट लेगा। पता नहीं कि कौआ कब से सत्यवादी हो गया जो झूठ बोलने पर आपको बक्षेगा नहीं, और इस ‘जघन्य’ अपराध के लिए आपको सज़ा देगा। अगर सचमुच ऐसा होता तो कौवों की तो सचमुच बन ही आती और वे हर समय किसी न किसी को काटते ही रहते।

क्या कोई कभी बिना झूठ बोले रह सकता है ? दुनिया का सारा व्यापार तो झूठ पर ही आधारित है। हर कोई अच्छी तरह समझता है कि सत्य बोलने में कितनी दुश्वारियां हैं। बिना झूठ का सहारा लिए आदमी दो कदम भी चल नहीं सकता। झूठ ही वह लाठी है कि जिसके सहारे वह चल पाता है। यदि दुनिया में झूठ न बोला जाए तो सारे काम ही रुक जाएं।

फ्राइड ने मानव मन की बड़ी गहराई से जांच पड़ताल की थी और अपनी खोज में उसने भी यही पाया था कि यदि प्रत्येक व्यक्ति यह तय कर ले कि चौबीस घंटे वह सिर्फ सत्य ही बोलेगा, सिर्फ सत्य और सत्य के सिवा कुछ ही नहीं, तो दुनिया में चार दोस्त भी नहीं बचेंगे, पति पत्नियों में तलाक हो जाएंगे, सारे रिश्ते टूट कर तहस-नहस हो जाएंगे। और फ्राइड जब कहता है तो उसकी बात को हलके में नहीं ले सकते; लोगों के मन में झांकने की उसमें अपूर्व क्षमता थी। उसने यह अच्छी तरह समझ लिया था कि लोग जो कहते हैं, वैसा होता नहीं। वे कहते कुछ और हैं, और सोचते कुछ और ही हैं। भीतर कुछ और बाहर कुछ और। सच तो यह है कि हमारे सारे नाते- रिश्ते झूठ पर ही खड़े हैं।

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अगर एक पत्नी अपने पति से कहे कि मैं तो आपके आपके चरणों की दासी हूँ तो पति को चौकन्ना हो जाने की ज़रूरत है। पर भोला पति बड़ा प्रसन्न हो जाता है। फूल के कुप्पा हो जाता है। उसे पता ही नहीं चलता कि पत्नी अब चौबीस घंटे यह सिद्ध करने में लग जाएगी कि असल में तुम ही चरण-दास हो। ऐसी भला कौन सी पत्नी होगी जो अपने पति को अक्लमंद मानती हो। वह उसे सदैव मंद-अक्ल ही मानती है और ऐसा मानना उसका जन्म-सिद्ध अधिकार होता है। इसी प्रकार पति बेचारे को भी अपनी पत्नी की प्रशंसा करते हुए उसे बार बार यह बताना पड़ता है कि वह (पत्नी) अत्यंत सुन्दर है। मजा यह है कि दोनों ही अक्लमंदी और सुन्दरता के मुगालाते में रहते हैं और उनका रिश्ता बड़े इत्मीनान से गुज़रता रहता है।

उपदेश भले ही सत्य बोलने का दिया जाता रहा हो किन्तु झूठ बोलने की वकालत भी खूब की गई है। डेल कारनेगी नाम के एक प्रसिद्ध लेखक हुए हैं। सच तो यह है कि उन्हें उनकी किताब “ हाऊ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ़्लूएन्स पीपल” ने प्रसिद्ध बना दिया है। इस पुस्तक में उन्होंने ऐसे ऐसे सूत्र दिए हैं जो हमें झूठ बोलने के लिए ही प्रेरित करते है। वे कहते हैं कि जब भी घर जाओ तो पत्नी के प्रति प्रेम ( भले ही हो या न हो ), उसे प्रगट करना कभी न भूलो। कुछ न कुछ भले लगने वाले शब्द ज़रूर बोलो। तुम्हारे भीतर क्या है, इससे किसी को क्या लेना-देना है ?

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विद्वानों के द्वारा झूठ बोलने की जो सलाह दी गई है, उसमें सदियों का अनुभव है। अगर हर समय सत्य ही बोला जाए तो दुनिया एकदम उजाड़ हो जाएगी। इस दुनिया में मानवी-संबंधों को बनाए रखने में और उसे रहने लायक बनाने में झूठ का बहुत बड़ा हाथ है। क्या आप सोचते हैं कि राजनीति बिना झूठ बोले चल सकती है ? क्या आप सोच सकते हैं कि बिना झूठे वादे किए नेता लोग नेता बने रह सकते हैं ? क्या आप सोच सकते हैं कि पति-पत्नी के बीच बिना झूठ का सहारा लिए सौहार्द्य कायम रह सकता है ? सच्चाई यही है कि हमारी दुनिया झूठ पर ही कायम है। पर एक सूत्र याद रखें। झूठ बोलें तो अपने झूठ पर कायम रहें। जो अपने झूठ पर कायम रहता है, दुनिया उसी को सच्चा मानती है।

डरिये मत। धड़ल्ले से झूठ बोलिए। कोई कौआ आपको काटने आने वाला नहीं है।

- डा. सुरेन्द्र वर्मा,

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

इलाहाबाद -२११००१

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