नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

साहित्य समाचार शशांक मिश्र भारती की लघुकथा निरुत्तर पर मिला सम्मान

clip_image002

जैमिनी अकादमी पानीपत हरियाणा द्वारा आयोजित 24 वीं अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता 2018 में ख्यातिलब्ध साहित्यकार संपादक व शिक्षक शशांक मिश्र भारती को उनकी लघुकथा निरुत्तर के लिए सांत्वना पुरस्कार मिला है। अकादमी के निदेशक डा0 वीजेन्द्र कुमार जैमिनी के अनुसार दिनांक 25@11@2018 को आयोजन के बाद सम्मान पत्र पुरस्कार व नकद राशि का चेक आपको भेज दिये गए हैं। इस प्रतियोगिता में देश भर से एक सौ से अधिक लघुकथाकारों ने प्रतिभाग किया था।

2008 से देवसुधा पत्रिका का हर अंक एक विशेषांक के रूप में संपादन कर रहे शशांक मिश्र भारती देवसुधा का चौथा अंक 2012 में लघुकथाओं पर केन्द्रित कर निकाल चुके हैं। इसके अलावा यह 07 जून 2007 को हम-सब साथ कला परिवार नई दिल्ली द्वारा गांधी शान्ति प्रतिष्टान में आयोजित लघुकथा प्रतियोगिता में अपनी लघुकथा कम्बल के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति सम्मान सामाजिक आक्रोश पाक्षिक सहारनपुर से अखिल भारतीय स्तर पर 2009 व 2012 में क्रमशः छायाअकेला चना के लिए सराहनीय पुरस्कार तथा प्रेरणा अंशु पत्रिका द्वारा दिनेशपुर उत्तराखण्ड में आयोजित अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता 20 नवम्बर 2011 को तमाशा लघुकथा के लिए 750 नकद सहित सराहनीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। एक दर्जन से अधिक लघुकथा संकलनों में स्थान मिला है। अब तक लगभग पचास लघुकथाओं का प्रकाशन देश के विविध पत्र--पत्रिकाओं व अर्न्तजालों पर हो चुका है।

साल 1991 से लेखन में रत इनकी अब तक दस पुस्तकों पर्यावरण की कविताएं क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ मुखिया का चुनाव बिना विचारे का फल आओ मिलकर गाएं माध्यमिक शिक्षा और मैं स्कूल का दादा दैनिक प्रार्थना हम बच्चे दस पुस्तकें छप चुकी हैं एक पुस्तक मुखिया का चुनाव उड़िया भाषा में छपी है। कुछ पर उड़िया कन्नड़ मराठी गुजराती व सन्ताली में काम चल रहा है। देश-विदेश के सौ से अधिक संस्था-संगठन इनको सम्मानित पुरस्कृत कर चुके हैं। शहीदों की नगरी के नाम से विश्व में विख्यात उत्तर प्रदेश शाहजहांपुर के पुवायां बड़ागांव निवासी यह सम्प्रति उत्तराखण्ड के टनकपुर में राजकीय इण्टर कालेज में संस्कृत प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहते हुए वहीं से अपनी साहित्य साधना में रत हैं। इनको इस उपलब्धि पर अनके साहित्यकार संपादक पत्रकार व शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है।

कु0 एकांशी शिखा हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर 242401 उ0प्र0

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.