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लघु कथा - चालान - डॉ0 आर0एस0खरे

    “युवाओं में नैतिकता” विषय पर अपने महाविद्यालय में प्रभावशाली व्याख्यान देकर प्रोफेसर देवकुमार अपनी नई कार से वापस घर लौट रहे थे। रास्ते में पड़ने वाले मार्केट में उन्हें मेडिकल शॉप से कुछ दवायें लेना थीं। उन्होंने दवा की दुकान के ठीक सामने “नो पार्किंग जोन” में अपनी कार खड़ी की, यह सोचकर कि दो सौ-तीन सौ मीटर दूर ‘ पार्किंग ’ में जाकर कार लगाकर, वापस मेडिकल शॉप तक आने में न केवल धूप में चलना पड़ेगा, बल्कि पन्द्रह मिनट समय भी आने-जाने में जाया होगा ।
     प्रोफेसर देव तेज कदमों से चलते हुए दवा-दुकान गये और दवा लेकर तीन-चार मिनट में वापस कार तक आ गये। लेकिन तब तक ट्रेफिक-पुलिस ने उनकी कार के अगले पहिये पर ताला लगा दिया था । प्रोफेसर देव के पहुँचते ही उसने तीन सौ रूपये का चालान काट दिया ।
      प्रोफेसर देव को बहुत गुस्सा आ गया । उन्होंने ट्रेफिक कांस्टेबिल को चेतावनी के लहजे में कहा- “ मैं कालेज में प्रोफेसर हूँ, मुझे सभी ट्रैफिक-रूल्स पता हैं, मैं आपके पुलिस अधीक्षक चौहान साहब को अच्छी तरह जानता हूँ। वे मेरे मित्र हैं और  कालेज में ट्रेफिक रूल्स पर व्याख्यान देने मैं बुलाता रहता हूँ । मैं बमुश्किल एक मिनट के लिए कार खड़ी करके दवा लेने गया था। आप अपना चालान वापस रखें और मुझे जाने दें।”
     ट्रैफिक कांस्टेबिल विनम्रता से बोला- “ मैंने माइक से दो-तीन बार आपकी गाड़ी का नम्बर बोला था, कि नो-पार्किंग जोन से कार हटायें। दो मिनट तक किसी के नहीं आने पर मैंने व्हील लॉक कराया । आप प्रोफेसर हैं और स्वयं कह रहे हैं कि अपने कालेज के विद्यार्थियों के लिए ‘ट्रैफिक-रूल्स’ पर सेमीनार आयोजित करते रहते हैं, तो विद्यार्थियों से नियमों के पालन की अपेक्षा रखने के पहले, स्वयं अपने आप पर नियम लागू करने होंगे । नियम सभी के लिए एक समान हैं। नो-पार्किंग जोन में कार खड़ी करना नियम विरूद्ध है, भले ही आपने एक मिनट के लिये खड़ी की हो या पांच मिनट के लिए । शिक्षकों- प्राध्यापकों को “रोल-मॉडल” बनना होगा, तभी विद्यार्थियों में नैतिकता आयेगी, भाषणों और सेमिनारों से नहीं।”
     प्रोफेसर देव को एक व्यावहारिक सीख मिल चुकी थी, उन्होंने तीन सौ रूपये का अर्थदंड भरा, और शर्मिन्दा होते हुए अपनी कार में जा बैठे।
    
डॉ0 आर0 एस0 खरे
11, सियाराम परिसर
सौम्या एनक्लेव, चूना-भट्टी
भोपाल- 462016

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