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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 183 व 184 // रतन लाल जाट

प्रविष्टि क्रमांक - 183

रतन लाल जाट

मॉर्डन लव एण्ड मैरिज

रातभर उन दोनों के बीच किचपिच होती रही। पत्नी घबराकर मरने की धमकी देती रही, तो पति किसी और के साथ अपने संबंध न होने पर सफाई। इसका अन्तिम परिणाम पत्नी की शराब के नशे में पति द्वारा की गयी धुनायी रहा। तब जाकर कहीं दोनों अलग-अलग सो पाये थे। लेकिन शायद उनकी आँखों में नींद नहीं थी। सिर्फ गुस्सा, नफरत और शंका का ही साम्राज्य था।

अकेले रोते-सिसकते हुए कविता की आँखों के सामने फिल्मी दृश्यों की तरह पुरानी यादें साकार हो उठी। कैसे राहुल ने उसके बिना एक पल भी नहीं जीने की कसमें खायी थी? कैसे सच्चे प्यार के वादे किये थे? और किस तरह आखिरकार उसे कॉर्ट मैरिज के लिए भगा ही लाया?

उसे अब पिछला सबकुछ सपने जैसा लग रहा था। राहुल दिन-रात उसके आगे-पीछे घूम रहा है। उसे बाहों में भरे हुए बालों से खेल रहा है। कॉर्ट में सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खा रहा है।

तभी अचानक उसकी तन्द्रा टूटी, जब उसकी सालभर की बेटी नींद से जगने पर रोने लगी थी।


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प्रविष्टि क्रमांक - 184

रतन लाल जाट

रूपये सबकुछ नहीं हैं

वह पूरे दिन दफ्तर में काम करके घर लौटा। तो बहुत परेशान लग रहा था।

"इतने से पैसों से मैं कैसे हजारों माँगें पूरी करूँ? न ढंग का घर, न गाड़ी और न कोई प्रॉपर्टी है? बस, घर से ऑफिस और ऑफिस से घर। वहाँ साथी कर्मचारी और यहाँ घर-परिवार। फिर रहे-सहे थोड़े बहुत मित्र। यही मेरी दुनिया है।"

इन विचारों की उधेड़बुन के साथ-साथ व्यस्तता के चलते रात की ग्यारह बज चुकी थी। दो-चार पड़ोसी जो मिलने-जुलने आये थे, अपने-अपने घर लौट चुके थे। माँ ने कहा, "बेटा! खूब रात हो गयी, सो जाओ और बेटी दादा के पास ही सो गयी है। उसे बहू के कमरे में लाती हूँ और सुनो, बेटा पढ़ लिया होगा। उसे कहो कि दादी बुला रही है।"

जब वह आकर बिस्तर पर लेटा। तब बड़े प्रेम से पत्नी ने कहा- "क्या बात है? आज बड़े उदास लग रहे हो? मुझे कहो, आपको क्यों दुखी हो।"

तब उसने चंद पलों में अपनी सारी बात कह डाली थी और थोड़ी ही देर में सबकुछ भूल गया था। पता ही नहीं चला, कब नींद आ गयी? जब सुबह माँ आवाज़ नहीं देती, तो आठ बजने तक नींद नहीं खुलती।

वह उठकर बैठा ही था, तभी पत्नी चाय लेकर आ गयी। तभी सहसा बाहर गली में शोरगुल सुनायी दिया। जैसे कोई लड़ाई-झगड़ा हो गया हो। लेकिन जब पिताजी ने आकर बताया कि मिस खन्ना ने पत्नी का मर्डर कर सुसाइड कर लिया है। पता नहीं क्यों? वह तो करोड़पति बिजनेसमैन था। आखिर उसे किस बात की कमी थी।

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लेखक-परिचय

रतन लाल जाट S/O रामेश्वर लाल जाट

जन्म दिनांक- 10-07-1989

गाँव- लाखों का खेड़ा, पोस्ट- भट्टों का बामनिया

तहसील- कपासन, जिला- चित्तौड़गढ़ (राज.)

पदनाम- व्याख्याता (हिंदी)

कार्यालय- रा. उ. मा. वि. डिण्डोली

प्रकाशन- मंडाण, शिविरा और रचनाकार आदि में

शिक्षा- बी. ए., बी. एड. और एम. ए. (हिंदी) के साथ नेट-स्लेट (हिंदी)


ईमेल- ratanlaljathindi3@gmail.in

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 5021580821661761117

एक टिप्पणी भेजें


  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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    1. सबकी ओर से सबको धन्यवाद

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    2. इस प्रतियोगिता में एक से बढ़कर एक रचना देखने को मिली है और सबसे बड़ी खुशी खी बात यह है कि आज भी लिखे जा रहे साहित्य में समाज का दर्पण दिखाई दे रहा है

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  2. बहेतरीन प्लेटफॉर्म है रचनाकार

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