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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 214 व 215 // मधु जैन

प्रविष्टि क्रमांक - 214

मधु जैन

दहशत

"श्यामा, यह मैंने पाँच थालियाँ तैयार कर दी है. तुम इन्हें दो चौबे ,एक वर्मा, एक गर्ग और एक दुबे भाभी के यहाँ देकर आजा. तेरी और मेरी बेटियाँ तो यहीं जीम लेगीं."

"लेकिन दीदी इन लोगों की कन्याएँ अपने यहाँ जीमने क्यों नहीं आ रहीं ?"

"सबने कोई न कोई बहाना बना दिया. दरअसल आजकल कोई भी अपनी बेटियों को किसी के घर भेजना ही नहीं चाहती."

"काहे ?"

"तू टी वी नहीं देखती क्या ?"

"सत्यानाश हो! इन टीवी और बुरे कर्म करने वालों का. बच्चियों का बचपन ही छीन लिया, खेलने की उमर में घर में कैद हो कर रह गयीं बेचारी."

बुदबुदाते हुए "घर में भी कौन सी सुरक्षित हैं,सबसे ज्यादा खतरा तो अपनों से ही है."पेट पर हाथ फेरते हुए एक लम्बी सांस ली.

मधु जैन जबलपुर

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प्रविष्टि क्रमांक - 215

मधु जैन

खिचड़ी

"दादी दादी आपने हमें दशहरा, दीवाली होली सभी त्यौहार क्यों मनाते तो बता दिया था, पर मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं ? नहीं बताया."

"सभी एक साथ आओ फिर बताती हूँ."

"हाँ तो सुनो! मकर संक्रांति सूर्य उपासना का त्यौहार है. इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है और धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. इसलिए इस त्यौहार को मकर संक्रांति कहते हैं."

"पर दादी इस त्यौहार में खिचड़ी क्यों खाते हैं ?"

घर की दोनों बहुओं के बीच हमेशा तनातनी बनी रहती है. एक घर में रहते हुए भी एक-दूसरे से बात नहीं करती. वे भी आकर दादी के पास बैठ जाती है.

दादी उन्हें देख मुस्कुराती हैं.

"खिचड़ी का संबंध परिवार की खुशियों से है."

"वो कैसे दादी ?"

"जैसे दाल चावल हैं तो अलग-अलग अनाज ,अकेला चावल और दाल नहीं खाते मिलाकर ही खाते है." बहुओं की ओर देखते हुए बोली.

"और दादी सब्जी भी."

"हाँ सब्जी तुम लोगों हो. हाँ तो, जब दाल-चावल और सब्जी एक साथ मिलाकर बनाते हैं तो क्या बनती हैं ?"

"खिचड़ी" सभी एक साथ बोले.

"खिचड़ी खाते समय कोई यह नहीं बोलता कि दाल- चावल सब्जी खा रहे क्योंकि खिचड़ी शब्द में यह सब शामिल हैं।

ठीक वैसे ही जैसे हमारा मिश्रा परिवार, मिश्रा परिवार नाम लेने से तुम सभी शामिल हो जाते हो अलग अलग नाम लेने की जरूरत नहीं होती."

"वाऊ! यू आर ग्रेट दादी."

"पर खिचड़ी में एक बहुत जरूरी चीज होती है जो उसके स्वाद को बढ़ाता है बताओ क्या है वह ?"

बहुओं के सम्मलित स्वर में "घी"

दादी ने मुस्कुराते हुए कहा "घी प्यार का प्रतीक है खिचड़ी में जितना घी डालोगे वह उतनी ही ज्यादा स्वादिष्ट होगी." दोनों बहुएँ एक दूसरे को देख मुस्कुरा उठी.

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मधु जैन जबलपुर

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 8706803092179664696

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  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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  2. आ.मधु जैन जी की दोनों लघुकथाएं दहशत एवं खिचड़ी शानदार है। बधाई

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  3. आदरणीय मधु जैन जी की दोनों लघुकथाएं शानदार है। बहुत-बहुत बधाई -- राममूरत 'राही', इंदौर

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  4. दोनो कथायें बढिया एवं संदेशप्रद है।

    उत्तर देंहटाएं

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